मॉम की गदरायी जवानी की काल्पनिक कहानी- 2

डर्टी चुदाई फैंटेसी कहानी मेरी हॉट मॉम के बारे में है. एक रात सोते हुए मैंने सपने में अपनी मम्मी के लिए लंड का इंतजाम किया क्योंकि मेरे पापा मम्मी को खुश नहीं करते थे.

हैलो फ्रेंड्स … मैं राजेश एक बार फिर से आप सभी के सामने अपनी काल्पनिक हिंदी सेक्स कहानी का अगला भाग पेश कर रहा हूँ.
डर्टी चुदाई फैंटेसी कहानी के पहले भाग
मेरी मम्मी के जिस्म की आग
में अब तक आपने पढ़ा था कि मेरी मॉम ने बड़ी ख़ुशी से रोहन अंकल के साथ सेक्स करने की बात मान ली थी.

अब आगे डर्टी चुदाई फैंटेसी कहानी:

इसके बाद मैंने ये सब रोहन अंकल को कॉल पर बता दिया.
उन्होंने कहा- शाबाश बेटे, अब कल से तेरी मॉम मेरी जोरू हो जाएगी. तुम कल सुबह सबको लेकर आ जाना. मेरी रंडी को जरा सज कर आने की कह देना.
मैंने हां कह दी.

रात को मैं अपनी मॉम के साथ ही सोता था.
उन्होंने पूछा- बेटा, ये रोहन अंकल कौन हैं … और उसका ही मुझ पर हक़ होगा, इसका क्या मतलब है?

मैं- अरे मॉम वो कल आपको सब पता चल जाएगा. कल से आपकी लाइफ बदलने वाली है, आप बस एंजाय करोगी. सुबह आप जरा अच्छे से सज संवर कर चलना.

मेरी मॉम को अब तक सब समझ में आ गया था कि ये रोहन उसे चोदने के लिए मरा जा रही है. मेरी मॉम को खुद एक मोटे लंड की जरूरत थी.

कुछ देर तक हम दोनों ने बात की और सो गए.

सुबह हम सब रोहन अंकल के घर पहुंच गए.

रोहन अंकल की तो जैसे मेरी मॉम को देख कर लार टपकी जा रही थी.

रोहन अंकल- आओ आओ सब लोग आ जाओ. दादा दादी जी, आप इधर आराम से बैठो और राजेश तू भी बैठ.

हम सब सोफे पर बैठ गए तो रोहन अंकल भी सोफे पर बैठ गए.

फिर जैसे ही मेरी मॉम सोफे पर बैठने को हुईं, रोहन अंकल ने उनको अपने पास बुलाया और उन्हें खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया.

मेरी मॉम ये सब देख कर एक बार को तो चौंक गईं.
लेकिन दादा दादी हंसने लगे और दादी जी बोलीं- अरे रश्मि कोई बात नहीं, रोहन भी सूरज जैसा ही है. बैठ जा … आराम से बैठ जा.

तभी रोहन अंकल ने मेरी मॉम के दूध दबा दिए और उनके कान में बोले- सुन मेरी रश्मि रंडी … आज से तू हमेशा मेरी ही गोद में बैठेगी समझी.
मेरी मॉम- ये आप क्या कर रहे हो रोहन … पापाजी इनको समझाओ न.

दादाजी- अरे बहू, आज से यही तेरा सब कुछ है. तेरा मालिक, तेरा यार, यहां तक कि तेरा पति भी रोहन ही है. इससे कोई शर्म मत कर.

रोहन को दादाजी की बात से मानो दम मिल गई थी.
वो इस बार तेज स्वर में बोले- सुन मेरी रंडी … चल अपना मंगलसूत्र निकाल कर रख दे.
मॉम कसमसा रही थीं- पापा मुझे शर्म आ रही है, आप सबके सामने ये मैं कैसे कर सकती हूँ.

मैं- अरे मॉम, अब से हमारा आपसे कोई रिश्ता नहीं है. आप सिर्फ़ रोहन अंकल की रंडी हो. हम सब इस घर के नौकर हैं, आप ऐसा ही समझो.
रोहन अंकल ने सबके सामने मेरी मॉम के दूध दबाए और कहा- सुन लिया रंडी … चल अब मंगलसूत्र निकाल कर रख दे और मुझे किस कर.

मेरी मॉम के चेहरे पर ख़ुशी सी झलक उठी थी. उन्हें सब समझ आ गया था आज से उनकी चुत की भूख प्यास सब मिटने वाली है.

मॉम ने नखरे से कहा- सुनो जी, मंगलसूत्र क्यों निकाल रहे हो?
रोहन अंकल- अब से मैं तुझको अपना मंगलसूत्र पहनाऊंगा, समझी … और आज से तू मेरी रंडी है, तू वही पहनेगी जो मैं तुझे दूँगा.

इसके बाद मॉम ने अपना मंगलसूत्र उतार कर रख दिया.

अब रोहन अंकल ने नया आदेश दिया- सुनो अब तुम सब अपने कपड़े निकाल दो और नंगे हो जाओ. ताकि रश्मि की शर्म पूरी तरह से खत्म हो जाए.

मैं तो सहर्ष राजी था.
दादा दादी ने बात भी मान ली क्योंकि उनके पास अब कुछ ऐसा था ही नहीं … जिससे उन्हें कोई शर्म आती.

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हम सब नंगे हो गए.

रोहन अंकल मेरी मॉम से बोले- देख तेरा पूरा घर नंगा हो गया है. चल अब तू भी नंगी हो जा.
मॉम इठलाती हुई बोलीं- नहीं जी, मैं ऐसे सबके सामने कैसे नंगी हो सकती हूँ.

दादा जी- अरे बहू, हमसे मत शर्माओ. ये बहुत ही अच्छे इंसान हैं. तुम इनकी बात मानो और ये जैसा कहते हैं, वैसा ही करो.

तभी मॉम का फोन बजने लगा.

रोहन अंकल- किसका कॉल है रंडी!
मॉम- जी, राजेश के पापा का फोन है.

रोहन अंकल- साली अबसे उसे सिर्फ सूरज बोल … चल फोन उठा और स्पीकर में रख कर बात कर.

मॉम ने फोन स्पीकर पर किया और बोलीं- जी बोलिए.
डैड- अरे मेरी प्यारी धर्मपत्नी कैसी है … क्या कर रही है?

रोहन अंकल- इस साले को बोल कि मैं अपने यार से चुद रही हूँ.
मॉम ने फोन पर हाथ रखते हुए रोहन अंकल से कहा- नहीं प्लीज़ ऐसा मत कहो.

दादा जी- सुन बहू, अब ये शर्म छोड़ दे और जो रोहन बोल रहा है, वो ही कर.
मॉम- ठीक है पापाजी.

मॉम फोन पर बोलीं- अपने यार से चुदवाने आई हूँ, आप तो अब मुझे चोद ही नहीं सकते ना.
डैड- ओह साली रंडी … तेरी चुत में बहुत गर्मी है. जा चुद ले अपने यार से … उसमें मुझे क्या दर्द होना है.

मॉम- सोच लो, उसने एक बार चोदा, तो फिर आप मुझे हाथ नहीं लगा सकते कभी. आप सबसे मेरा रिश्ता टूट जाएगा. मैं सिर्फ़ आपकी, नाम की पत्नी रहूँगी.
डैड- हां चुद ले यार … अगर तूने सच में अपने यार से चुदवाया तो मैं तुम दोनों का गुलाम बन जाऊंगा. तेरे अन्दर हिम्मत है, तो अपने यार के साथ एक पिक भेज.

मॉम- सोच लो तुम अपने पापा मम्मी को क्या बोलोगे?
डैड- वो तू सोच, अगर हिम्मत है तो पिक भेज … मैं पापा को बोल दूँगा कि इसका अफेयर चल रहा था और मुझसे ग़लती हो गयी. अब मैं इसका गुलाम बन गया हूँ.

मॉम- फिर तो मैं आपके पापा मम्मी और हमारे बेटे के सामने चुदूँगी.
डैड- चल झूठी … तेरे में इतना दम नहीं है. अगर होता, तो अब तक उन सबके सामने तू नंगी हो जाती और चुदती हुई पिक भेज देती.

मॉम- ऐसा है क्या … तो अब रूको, अभी पिक भेजती हूँ … तेरे पूरे गुलाम खानदान की.
रोहन अंकल- शाबाश रश्मि, अब बनी तू मेरी सच्ची रंडी. सुनो बे सारे हिजड़ो, इधर आओ और हम दोनों के पैर छूकर अपनी गुलामी दिखाओ.

इसके बाद मॉम ने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और अपना मंगलसूत्र उठा कर रोहन अंकल के लंड पर बांध दिया.
फिर हम सबकी एक पिक खींच कर मॉम ने डैड को भेज दी.

मैं अपनी मॉम का ऐसा मदमस्त रूप पहली बार देख रहा था. उनकी तनी हुई चूचियां मेरे लंड को खड़ा करने लगी थीं.

मॉम- देख ले साले नामर्द … अब से मुझ पर तेरा कोई हक़ नहीं बचा.
डैड- अरे ये कलूटा सांड कौन है … और तुम सब कहां पर हो इस हालत में नंगे क्यों हो?
मॉम- जब तू वापस आएगा, तब देख लेना मेरे गुलाम. चल अब देख … मेरे नए पति मुझे चोदना चाहते हैं. ये ले तू अपने बाप से बात कर.

दादाजी- हां बेटा बोलो.
डैड- ये सब क्या है और रश्मि ऐसी क्यों है?

दादाजी- हम सबने मिलकर रश्मि को एक तरह से इसे दूसरा पति दिला दिया है. बेटा अब से हमारा उस पर कोई हक़ नहीं है.
डैड- ये सब कब हुआ? मैं कल ही वापस आ रहा हूँ. अभी मैं अपने शहर से आधे घंटे की दूरी पर ही हूँ.

दादाजी- अब सब कुछ फाइनल हो गया है. तुझे आना है तो खूब मजे से आ मगर अब तो रश्मि बेटी रोहन की हो गयी. आज ही मैं उसका कन्यादान करके उसको रोहन को सौंप दूंगा. आज रात को हम सबके सामने उसकी सुहागरात है. अब से वो वही करेगी, जो उसका नया पति रोहन उसको कहेगा.

डैड- ठीक है पापा … जब आपने सब कुछ फाइनल कर ही दिया है, तो मैं क्या कर सकता हूँ … पर मैं चाहता हूँ कि मेरी बीवी की चुदाई मेरे सामने हो … और उसका बिस्तर मैं खुद सजाऊंगा. मैं अभी चल कर घर वापस आ रहा हूँ.

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दादा- ठीक है … बेटा आ जा.

रोहन अंकल- सुन लिया … तेरा नामर्द पति तेरा बिस्तर सजाएगा. आज इन सबके सामने मैं तुझे चोदूंगा.

मॉम खुश होकर अपनी गांड मटकाती हुई बोलीं- जी, अब तो मैं आपकी ही हूँ, जो मर्ज़ी हो कर लो. जब मेरे पापाजी और मम्मी जी ने अनुमति दे दी, तो मैं क्या कर सकती हूँ.

रोहन अंकल- सुन राजेश बेटे, अपनी मॉम को लेकर ब्यूटी पार्लर चला जा और इसे एकदम नयी दुल्हन की तरह तैयार करवाके ला. ये पैसे रख ले … इसके लिए कुछ नए कपड़े ले लेना. तेरी मॉम के लिए हो जाएंगे.

मैंने आगे बढ़ कर पैसे ले लिए.

रोहन अंकल- और हैलो तुम दोनों, पुराने आइटम … जाकर सब तैयारी करो. मेरी रंडी रश्मि, तू अपना ये मंगलसूत्र तेरी चुत में डाल कर बाहर जा.
मॉम- ये कैसे डालूं?

रोहन अंकल- मैंने जो बोला, वो कर रंडी.
मॉम- ठीक है.

मॉम ने मंगलसूत्र रोहन अंकल के लंड से उतारा और अपनी चुत में डाल लिया, जिससे उनको चलने में काफ़ी तकलीफ़ हो रही थी. चुत से बाहर चैन लटक रही थी.

मॉम ने जल्दी से अपने बदन पर अपने कपड़े डाल लिए. इस बार उन्होंने ब्रा पैंटी नहीं पहनी थी.

मैं और मॉम ने बाजार आ गए. मॉम ने अपने लिए ब्रा पैंटी और शादी की सारी शॉपिंग कर ली. जब हम दोनों घर वापस आए, तब तक शाम के आठ बज चुके थे और मेरे डैड भी आ चुके थे

रोहन अंकल ने उन्हें भी नंगा कर दिया था और उनसे अपने पैर दबवा रहे थे.

कुछ ही देर में मेरी मॉम की ओपन सुहागरात का कार्यक्रम शुरू हो गया. डैड ने मेरे मॉम की सुहागसेज सजाई और हम सब सुहागसेज के सामने खड़े हो गए.

मॉम आकर बिस्तर पर घूँघट निकाल कर बैठ गईं. पीछे से रोहन अंकल आए और उन्होंने बिस्तर पर बैठ कर मेरी मॉम का घूँघट उठाया.

मॉम का खूबसूरत चेहरा देख कर रोहन अंकल ने उन्हें एक बहुत कीमती नेकलेस पहनाया और मेरी मॉम ने उनके पैर छुए.

फिर अंकल ने उनसे कहा- अब मेरे कपड़े उतारो और मेरा लंड मुँह में लेकर शुरू हो जाओ.

कुछ ही देर में रोहन अंकल का मोटा लम्बा लंड मॉम के सामने लहराने लगा.
मॉम उनके लंड को देख कर बहुत खुश हो गईं. उन्होंने रोहन अंकल के लंड को अपने माथे से लगाया और मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.

ये सीन देख कर दादा दादी ने रोहन अंकल से बाहर जाने की इजाजत मांगी तो अंकल ने कहा- ठीक है तुम लोग बाहर जा सकते हो, लेकिन सूरज और राजेश यहीं रहेंगे.

मेरी खुद बड़ी तमन्ना थी कि मैं अपनी मॉम को चुदवाते हुए देखूँ.

फिर रोहन अंकल ने मॉम को नंगी करना शुरू किया. मॉम लाल रंग की ब्रा पैंटी में एकदम मस्त परी सी लग रही थीं. मेरे डैड एकदम मुरझाए चेहरे के साथ सब देख रहे थे.

कुछ ही देर में रोहन अंकल ने मॉम को पूरी नंगी कर दिया और उनकी टांगें फैला दीं. रोहन अंकल ने पोजीशन बनाई और अपना भीमकाय लंड मेरी मॉम की चुत में पेल दिया. मेरी मॉम ने चिल्ला कर मोटे लंड का मीठा दर्द जज्ब करना शुरू कर दिया. अंकल ने मेरी मॉम को आधे घंटे तक हचक कर चोदा और उसके बाद अपने लंड का नमकीन रस मॉम की चुत में ही टपका दिया.

चुदाई समाप्त हुई तो मैं मॉम की नंगी जवानी को देख रहा था.

तभी किसी ने मुझे हिलाया और आवाज आई- उठ जा राजेश कितने बजे उठेगा … आज स्कूल नहीं जाना क्या तुझे?

मैं झटके से उठा और अपने सामने अपनी मॉम को देख कर कुछ सोचने लगा कि मॉम, मैं कितना हसीन सपना देख रहा था. आपने बेकार में ही जगा दिया.

खैर … ये थी मेरी डर्टी चुदाई फैंटेसी कहानी. आप सभी को कैसी लगी, प्लीज़ मेल जरूर कीजिएगा.

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