गृहप्रवेश के दिन चाची की चूत में प्रवेश

देसी चाची पोर्न कहानी में पढ़ें कि मैं मेरी चाची की भारी गांड मारना चाहता था. एक बार हमारे गृहप्रवेश में चाची आयी तो मैंने उनकी चूत में प्रवेश किया।

दोस्तो, आज मैं अपनी पहली सेक्स कहानी लिखने जा रहा हूं।
ये मेरी चाची और मेरे बीच हुए एक रोमांचक सेक्स की कहानी है।

मेरी उम्र 24 वर्ष है और मेरी चाची की उम्र लगभग 32 वर्ष है.
चाची एक शानदार जिस्म की मालकिन हैं. उनका रंग गोरा और लंबाई 5′ 7″ है।
उनके शरीर में उनकी गांड और चूचे सबसे शानदार है। मेरी चाची की गांड काफी उभरी हुई है।

आज से 6 महीने पहले हमारे घर का गृहप्रवेश का कार्यक्रम था जिसमें सभी रिश्तेदार लोग आए हुए थे।
उसी में मेरे चाचा चाची भी आए हुए थे।

मैं हमेशा से ही चाची को जब भी देखता था तो उनको चोदने का ख्याल आ जाता था।

जब भी मैं उनके घर जाता था तो किसी ना किसी रूप में मैं उनके जिस्म का दीदार कर लिया करता था।

बिना देर किए दोस्तो, मैं अपनी आज की देसी चाची पोर्न कहानी पर आता हूं।

जब मैंने चाची को घर पर आई हुई देखा तो दिल बहुत खुश हुआ कि आज चाची के जिस्म को ताड़ने का मौका मिलेगा.
मुझे क्या पता था कि आज चाची की चूत चोदने का मौका मिल जाएगा।

हुआ यूं कि दोस्तो, गृहप्रवेश का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कुछ लोग तो अपने अपने घर चले गए परन्तु घर पर बहुत से मेहमान रुक भी गए।

मेरे जिस घर का गृहप्रवेश था उसमे सिर्फ दो कमरे, एक बरामदा और एक रसोई और एक बाथरूम है।

रात्रि के समय जब सब लोग भोजन कर के सोने की तैयारी करने लगे तो एक कमरे में सभी आदमी लोग नीचे गद्दे डाल के सोने लगे और एक कमरे में घर में आई 3 बुआ, दादी, मेरी मम्मी सो रहे थे।

चाची अपने एक बच्चे के साथ जिसकी उम्र 4 वर्ष है. बरामदे में एक कोने में बिस्तर डाल के सो रही थी।

मैं मौका देखते ही उनके पास सोने चला गया।
चाची दीवाल के किनारे सो रही थी, उनके बाद उनका लड़का था।
मैं बच्चे को साइड कर के बीच में सो गया।

जनवरी का महीना था तो उस समय बहुत ठंड रहती है।
मैं अब धीरे से अपना पैर उनके कम्बल में डालने लगा।
मेरा पैर उनके पैर तक पहुंच गया मुझे एहसास हुआ कि उनकी साड़ी उनके घुटनों तक उठी हुई है।

उनके पैरों का स्पर्श जब मेरे पैरों पर होने लगा मेरे अंदर एक कम्पन सी उठने लगी।
चाची गहरी नींद में सो रही थी। उनको यह अहसास ही नहीं था कि मैं उनके पैर पर अपना पैर रगड़ रहा हूं।

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मैंने धीरे धीरे अपना पूरा शरीर उनके कम्बल में कर लिया।
तभी अचानक से चाची ने अपना चेहरा मेरे तरफ कर लिया और मेरे बिल्कुल करीब सट के सो रही थी।

उनके ओंठ मेरे ओंठों के बिल्कुल पास आ गये थे और उनकी सांसें मुझे महसूस होने लगी थी।
उनकी गर्म सांसें मेरे अंदर की आग को और जलाने लगी थी।

मैं अपना एक हाथ उनकी कमर पर रखते हुए उनकी गांड को टटोलने लगा।
मेरे अन्दर एक डर सा भी लगा हुआ था कि कहीं ओ जग ना जाए।
पर उनके स्पर्श से मेरे लन्ड में जो तनाव हुआ था वह कुछ और ही चाह रहा था।

मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उनकी गांड से होते हुए उनकी जांघों को सहलाते हुए नीचे जाने लगा।

तब मैंने उनकी साड़ी को उनकी गांड तक ऊपर उठा दिया।
अब मैं कम्बल के अंदर ही अपने को नीचे करते हुए उनके जांघों पर अपने होंठ से चूमने चाटने लगा और मेरे हाथ चाची की गांड पर थे।

तभी अचानक से चाची ने करवट बदली.
मैं डर के सीधे ऊपर उनके बगल में आ गया।

कुछ समय बाद मैं अपना हाथ उनकी गदरायी हुई चूची पर रख दिया और धीरे धीरे दबाने लगा।

तभी मुझे थोड़ा अहसास हुआ कि चाची शायद जगी हुई है परन्तु कुछ बोल नहीं रही।

मैंने सोचा कि ऐसा बढ़िया मौका फिर शायद नहीं मिलेगा।
तो मैंने धीरे से उनके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू कर दिए।

अब उनकी चूची सिर्फ ब्रा में थी।

मैं उनकी ब्रा को बिना हूक खोले ऊपर करने लगा.
परन्तु उनके चूचे इतने बड़े थे कि ब्रा पूरा टाईट हो रही थी।
मैं अपना हाथ ब्रा के नीचे से उसमें डालने लगा।

मेरा हाथ उनके ब्रा में चला तो गया परन्तु इतना टाईट हो गया कि मेरे हाथ में उनकी चूची पूरी दबी हुई थी।
शायद इस दबाव की वजह से चाची ने आंखें खोल दी और मेरा हाथ पकड़ लिया.

अब मेरा हाथ ना तो निकल रहा था, ना कि उनमें चल रहा था।

चाची ने फिर अपने ब्रा की हुक खोल कर मेरे हाथ को निकाला।
जैसे ही मेरा हाथ बाहर आया मैंने समय ना गंवाते हुए सीधे चाची को अपने तरफ खींचा और अपने होंठ उनके होंठों पर लगा दिए।

वह बचने की कोशिश कर रही थी परन्तु मैं अपना हाथ सीधे नीचे ले जाते हुए पैंटी के ऊपर से ही चाची की चूत रगड़ने लगा।
5 मिनट तक ऐसा ही चलता रहा.
फिर मुझे लगा मेरे हाथ में उनके चूत का पानी लगने लगा है।

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अब चाची शांत होकर मेरा साथ देने लगी थी।
मैं कम्बल में ही उनके ऊपर चढ़ गया और उनके चूचों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा।
इससे चाची काफी तड़फने लगी और अपनी छाती मेरे मुंह में तेजी से डालने लगी।

मैं उनके बूब्स को दबाते हुए उनके पेट की चाटते हुए चाची की चूत तक पहुंच गया।

मैंने धीरे से उनकी पैंटी निकाल दी।
अब उनकी चिकनी चूत मेरे सामने थी।

मैंने अपनी जीभ उनकी चूत में लगा दी और चाटने लगा।

अब तो मानो जैसे चाची तड़फ ही उठी।
वे मेरा सिर अपनी चूत में लगाने लगी और एक हाथ से मेरा 6 इंच का लन्ड पैंट के ऊपर से ही पकड़ के सहलाने लगी।

मैंने अपनी पैंट निकाल दी और चाची की छाती पर बैठ कर अपना लन्ड उनके मुंह में डाल दिया।
चाची बड़े ही प्यार से मेरे लन्ड को अपने मुंह में चूसने लगी और थोड़ी देर बाद लंड मुख से निकल कर धीरे से बोली- तुम्हारा लन्ड तो काफी मोटा और तगड़ा है।

फिर चाची बोली- चलो जल्दी से चूत में डालो, क्या पता कोई जग ना जाए।

फिर मैंने चाची के दोनों पैरों को उनकी छाती तक मोड़ा और उनकी चिकनी चूत में अपना लन्ड सटा दिया।
धीरे धीरे मैं चाची की चूत में लंड डालने लगा।

मेरा लन्ड अन्दर जाते ही चाची की आह निकाल गई।

अब मैं अपना लन्ड उनकी चूत में पेलने लगा।
उनकी चूत काफी टाइट थी। मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था उनको चोदने में!

फिर मैंने उनको डॉगी स्टाइल में घोड़ी बनाया और अपना पूरा लन्ड उनकी चूत में डाल दिया।
उनके मुंह से सिसकारियां निकलने लगी।

परन्तु बगल में ही कुछ लोग सो रहे थे इसी वजह से वह बहुत ही कंट्रोल किये हुए थी।
मैं पीछे से उनके बाल अपने हाथों में पकड़ के दे दनादन चोदे जा रहा था और उनकी गांड को रगड़े जा रहा था।

मेरा लन्ड अब काफी स्पीड में था और मेरा वीर्य अब कुछ ही समय में निकलने वाला था।
मैंने अपना सारा वीर्य उनकी गांड के ऊपर निकाल दिया।

फिर उनको वैसे ही पेट के बल नीचे लेटा कर सारा वीर्य उनकी गांड और पीठ पर रगड़ दिया।

इसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए और हाथ पकड़ के सो गए।

दोस्तो, अब जब भी मैं मौका पाता हूं चाची के घर चला जाता हूं।
उनको मेरे लन्ड के आगे अब चाचा का लन्ड दिखता ही नहीं है।

प्रिय पाठको, आप सभी भाई बहन को मेरी देसी चाची पोर्न कहानी कैसे लगी, प्लीज मेल कर के जरूर बतायें।
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