टास्क गेम: मर्द के सैलून में नंगी लड़की

कॉलेज गर्ल सेक्स एडवेंचर किया अपनी सहेली की मदद से! कॉलेज के आखिरी दिनों में दो सहेलियों ने ऐसा क्या खुराफाती टास्क परफॉर्म किया जिसमें सेक्स था?

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हाय, अन्तर्वासना के प्रिय पाठकों को रसीली रीटा की ओर से प्यार भरा नमस्कार।

दोस्तो, मेरे बारे में बताने से पहले यह बताना पसंद करूंगी की अन्तर्वासना की एक लेखिका मधुरेखा की में बहुत ही बड़ी फैन हूँ।
उनके द्वारा लिखी हर एक कहानी मुझे बहुत पसंद आई है।
लेकिन अब उनकी और से अब कहानियां नहीं आ रही।

जब मैं और मेरी सहेली सीमा अपने कॉलेज में थे और होस्टल में रात को मधुरेखा जी की कहानियां पढ़ती थी तो अंग अंग में एक सिहरन सी दौड़ जाती थी।
कभी कभी हम भी सोचती थी कि हम भी कोई ऐसी करतूत करें … कॉलेज गर्ल सेक्स एडवेंचर करें … लेकिन हिम्मत नहीं होती थी और विवशतावश हम अपनी चूत में सिर्फ उंगली कर के ही हमारे मन को बहला लेती थी।

लेकिन जब कॉलेज के कुछ आखिरी दिन बचे थे तब हमने एक फैसला लिया कि हम भी कोई ऐसा खुराफाती टास्क परफॉर्म करेंगी.

लेकिन दुविधा यह थी कि हम दोनों में से यह करेगा कौन?

पर हवस हम दोनों पर इतनी हावी हो चुकी थी कि हमने इसका भी रास्ता ढूंढ निकाला।
हम दोनों ने अपने अपने नाम की पर्चियां बनाई और फिर उनमें से एक पर्ची को उठाया।
उसमें से सीमा का नाम निकला।
तो अब टास्क सीमा को करना था।

अपना नाम देख सीमा थोड़ी घबरायी ज़रूर लेकिन उसने पक्का इरादा बना लिया था कि वो यह टास्क कर के रहेगी।

अब टास्क कौन सा रखें … यह सोचना बाकी था।

हमारे होस्टेल से ही थोड़ी दूरी पर एक सैलून की दुकान थी जिसका नाम ‘मेन्स पार्लर’ था।
वो दुकान हमारी ही हम उम्र का एक लड़का चलाता था। जब भी हम कहीं बाहर जाती तो वह हमें अक्सर ताड़ता था, हमने यह कई बार नोटिस किया था।

अब मेरे दिमाग में खुराफाती विचार आया कि सीमा उसी मर्दों वाले हेयर पार्लर में अपने माथे के बाल सेट करवायेगी और उसके साथ ही वही पर उसकी अंडरआर्म और चूत के बालों को भी शेव करवायेगी।

अभी एग्जाम में 2 महीने से ज़्यादा का वक़्त था तो सीमा को मैंने तभी से अपने अंडरआर्म और चूत के बाल बढ़ाने को बोल दिया।

अब हम यह सोचने लगी कि आखिर टास्क पूरा करें तो कैसे करें।

कुछ दिन इसी कशमकश में निकल गये।
बीच बीच में यह भी ख्याल आया कि ऐसा करना ठीक होगा या नहीं।

लेकिन जो हवस का कीड़ा था … वो हमें हर हाल में यह करने पर मजबूर कर रहा था।

अब एग्जाम खत्म होने में सिर्फ 3 ही दिन बचे थे तो हमने लास्ट पेपर खत्म कर अपने आईडिया को अंजाम देने का सोचा क्योंकि इसके बाद हमें न तो कभी होस्टेल फिर से आना था और न ही लखनऊ में!
क्योंकि सीमा अपना कॉलेज खत्म कर अपने गांव हमेशा के लिये चली जाने वाली थी जहां से आगे जाकर उसकी सिर्फ शादी होने वाली थी.

और मुझे भी आगे पढ़ाई नहीं करनी थी तो मैं भी अपने गांव ही जाने वाली थी।

गुरुवार के दिन जब हम अपने होस्टेल से निकली उस सैलून वाले के पास जाने के लिये तो हम दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था।
ऐसे टास्क न करने का ख्याल भी दिमाग में आ रहा था।
कहीं ऐसा करने से हम दोनों कही दिक्कत में न पड़ जायें।

लेकिन फिर भी हम हिम्मत कर निकल पड़ी।

मैंने हरे रंग की अम्ब्रेला कुर्ती पहनी थी और उसके साथ मैच करती हुई सफेद लेगिंस और दुपट्टा पहना था जबकि सीमा ने हल्के गुलाबी रंग की कुर्ती पहनी थी और नीचे मेरे जैसे ही सफेद लेगिंग्स और दुप्पटा पहना था।

लेकिन मेरी कुर्ती के मुकाबले उसकी कुर्ती कुछ ज़्यादा ही पारदर्शक थी।
उस सैलून वाले का ध्यान सीमा की ओर आकर्षित हो सके इसीलिए उसने काले रंग की ब्रा पहनी थी जो उसकी कुर्ती से साफ पहचानी जा सकती थी।

जैसे जैसे हमारे कदम उठते थे, हम बस यही सोच रही थी कि कोई दिक्कत खड़ी न हो जाये.
और वो सैलून वाला अपनी दुकान पे अकेला ही हो … ताकि हम दोनों उसे अपने टास्क के बारे में ठीक से समझा सकें।

लेकिन बात शुरू कैसे करें … यह भी एक सोचनेवाला विषय था।

जब हम उसकी दुकान पर पहुंची तो जैसा हमें चाहिए था ठीक वैसे ही वो अकेला अपने मोबाइल पर सबवे सर्फर खेल रहा था।

हम दोनों उसकी दुकान के सामने जाकर खड़ी हो गयी जहाँ एक चाय के ठेलेवाला चाय बेच रहा था।

वहां खड़े सारे मर्द सीमा की पारदर्शक कुर्ती में दिख रही काली ब्रा की वजह से कभी सीमा के चेहरे को तो कभी सीमा के स्तनों का नाप अपनी हवसभरी निगाहों से ले रहे थे।
हम उस वक़्त बिल्कुल भी सहज महसूस नहीं कर रही थी, फिर भी हम कुछ देर वहां खड़ी रही।

जब उसकी नज़रे हम पर पड़ी तो हमने उसे इशारा कर अपनी ओर बुलाया.
हमारा एक इशारा पाते ही वो हमारी और दौड़ा चला आया।

“क्यों भैया, हमें हर रोज़ क्यों ताड़ते हो?”
जो कुछ भी दिमाग में उस वक़्त आया यह बोल कर मैंने बात शुरू की लेकिन बोलने के बात यह भी सोचने लगी कि कहीं बाज़ी उल्टी न पड़ जाये।

“मैंने आपको कब ताड़ा?” उसने सीधा ही पूछा।
“अच्छा सुनो, हमें तुमसे एक काम था, मदद करोगे?” मेरी बोली हुई बात से बात कहीं और जा सकती थी.

सीमा ने तुरंत ही पहचान लिया और मेरी बात काट कर वो बीच में बोल पड़ी।

वैसे भी सीमा एक असाधारण प्रतिभा वाली लड़की थी, दिमाग से तेज़, गोरी भी इतनी कि कोई मेकअप की ज़रूरत ही न पड़े।

जब उसने बीच में मेरी बात काटी तो वो थोड़ी देर उसको देखता ही रह गया।
बाकी सारे मर्दो की तरह ही उसकी भी नज़र सीमा की पहनी हुई काली ब्रा पर पड़ी।

“बोलो, क्या मदद कर सकता हूँ?” उसने ब्रा को ताकते हुए ही पूछा.
लेकिन जब उसने महसूस किया कि हम उसको ताड़ते हुए नोटिस कर रही थी, तब उसने अपना सर उठा कर सीमा की आंख में आंख मिलायी।

“मैं यहां नहीं बता सकती, कहीं और मिल सकते हो जहां लोग कम हो?” सीमा ने बोला।
“वैसी क्या बात है?” उसने सवाल किया।

“वो मैं यहां पर नहीं बता सकती, अगर कहीं और जगह मिल सकते हो तो बताओ और मदद भी करनी हो तो ही बताना।” सीमा ने अपनी बात ज़ोर डालते हुए कही।
“सोच कर बताता हूँ।”

हमें लगा था कि वो हमको ताड़ता है तो आसानी से पट जायेगा लेकिन उसके मुंह से यह सुन हमको थोड़ा सा धक्का लगा।
ऐसा लगा कि मानो सारे अरमान धरे के धरे रह गये।

“यह लो यह मेरा नम्बर है, शाम तक हा या ना में फोन कर के बता देना। और हां, एक और बात, इसमें हमारे फायदे से ज़्यादा तुम्हारा अधिक फायदा है। जो निर्णय लो सोच समझकर लेना!” इतना बोलते ही सीमा ने अपनी पर्स से एक पर्ची निकाली जिस पर उसने पेन से मोबाइल नंबर लिखा हुआ था।

फिर हम वहां से अपनी होस्टेल की ओर निकल पड़ी।

रास्ते में हम दोनों ने कुछ बात ही नहीं की, हम दोनों के मन में विचारों का सैलाब उमड़ रहा था।

लेकिन जब हम अपने कमरे पर पहुंची तो मैंने सीमा से कहा- उसको अपना नंबर देने की क्या ज़रूरत थी? अगर वो मान जाता है, और हम टास्क भी पूरा कर लेते हैं तो बाद में वो फोन कर कर के तुम्हें परेशान कर सकता है।

“नहीं नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा यह एक कोई और सिम कार्ड है, मेरी सहेली का भाई बेचता है, उसी से लिया है. अगर वो फोन करता है और हमारी बात के लिये राज़ी भी हो जाता है तो हम 3 दिन तक यह कार्ड रखेंगे और फिर इस शहर के साथ साथ यह सिम भी यहीं छोड़ जायेंगे।

जब उसने यह बात बताई तो मुझे ऐसा लगा कि मुझसे ज़्यादा सीमा इस टास्क को करने के लिये बेकरार थी।

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“लेकिन, मुझे एक और चिंता सता रही है।” मैंने सीमा से कहा।
“क्या?” उसने पूछा।

“यदि सब कुछ जैसा हमने सोचा है ठीक वैसे ही हो जाता है तब भी मान लो कि उसने तुम्हारी न्यूड वीडियो कोई स्पाई कैमरे से बना ली तो क्या होगा?”
मेरे इस सवाल ने थोड़ी देर के लिये सीमा को भी खामोश कर दिया.

लेकिन मेरी बात सोचने वाली थी।
हम बस यह उत्साह और हवस के वश कर रही थी। हम यह तो बिल्कुल भी नहीं चाहती थी कि हम इसके बाद किसी मुश्किल में फंस जायें और बाद में वो हमें ब्लैकमेल कर हमारा फायदा उठा सके।

“एक काम कर सकते हैं … यदि उसका फ़ोन आता है और वो मदद करने के लिये राज़ी हो जाता है तो हम उसे यह बोलेंगी कि कुछ पाना चाहते हो तो तुम्हें भी एक काम करना पड़ेगा और हम उसको कहेंगे कि वो अपने सारे कपड़े उतारे और हमारी ब्रा पेंटी पहन कर लिपस्टिक लगा कर लड़कियों वाला डांस करे और उसे हम एक स्पाई कैमरे से कैद कर लेंगे और यदि वो हमें ब्लैकमेल करता है तो हम उसको यह वीडियो दिखा देंगी।

सीमा का आईडिया एकदम धांसू था.
तब हम फिर उसके कॉल का इंतज़ार करने लगी।

कुछ घंटे यू ही निकल गये. उसके बाद उस नम्बर पर एक फोन आया जो सीमा ने सिर्फ उस सैलून वाले को दिया था।

फ़ोन पर जब उसने हां कह दी तो हमने उसको हमारे रूम पर ही बुला लिया और उसको बता दिया कि रिसेप्शन पर बोल दे कि वह सीमा का भाई है जिससे वार्डन उसको हमारे रूम पर आने दे।

जब वह हमारे कमरे पर आया तो हमने उसको हमारे बेड पर बिठाया।

“हाई, माई सेल्फ श्वेता, और तुम?” जान पहचान बढ़ाने के लिये सीमा ने हाथ आगे बढ़ाया लेकिन अपना वास्तविक नाम नहीं बताया।

“मेरा नाम मुकेश है।” सीमा के बढ़ाये हुए कोमल हाथ को पकड़ने में मुकेश ने कोई भी देरी नहीं की, शायद वह भी जानता था कि, इतनी गोरी-चिट्टी, दूध जैसी लड़की उसे फिर कभी नहीं मिलने वाली थी।

“चाय पिओगे?” सीमा ने हाथ छुड़ाकर पूछा।
“जी, आप पिलाओगी तो बिल्कुल!” उसने थोड़ा मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
“किसके दूध की पिओगे? मेरे या श्वेता के?” मुकेश के सामने बैठे मैंने उसकी खिंचाई करते हुए पूछ लिया।

मेरे मुंह से ऐसी बात सुन थोड़ी देर के लिए तो वो सकपका गया।
लेकिन जब सीमा ने कहा कि मैं मजाक कर रही हूं तो उसके चेहरे के भाव देख लग रहा था कि वो शोक हुआ था लेकिन खुश भी था लेकिन सीमा की मजाक की बात सुन वो उदास हो चुका था।

“यह लो चाय! हमारे दूध की!” सीमा ने पेपर के एक कप में मुकेश को चाय थमाई और उसके पास बैठते हुए कहा।

“वैसे क्या मदद चाहिए थी मुझसे?” चाय की एक सिप भरकर मुकेश ने पूछा।

“तुम्हारी दुकान देर रात तक कितने बजे तक खुली रहती है?” मैंने पूछा.
“क्यों? क्या हुआ?” उसने सवाल का जवाब सवाल करके दिया।

“नहीं बताओ, तुम्हारी दुकान देर रात तक कितने बजे खुली रहती है?” सीमा ने फिर मेरी कही हुई बात को दोहराया।
“रात के करीब 10 बजे तक!” उसने बताया.

“और कस्टमर कब तक खत्म हो जाता है?” मैंने फिर से पूछा।
“अरे! क्या बात है, जो इतने सारे सवाल कर रही हो तुम दोनों?” उसने फिर से सवाल किया.

“नहीं, बात विस्तार से बताने के लिये हमारा यह जानना ज़रूरी है।”

“9:30 से 10 तक सब काम खत्म हो जाता है।” सीमा के फिर से पूछने पर उसने बताया।

“अच्छा तो सुनो, शनिवार को रात को हम 10 बजे तुम्हारी शॉप पर आयेंगी और तुम मेरे बाल सेट करोगे।” सीमा ने उनका बनाया हुआ प्लान बताना शुरू किया।
“तो इसमें कौनसी बड़ी बात है जो तुम वक़्त और बाकी वगैरह पूछ रही थी। यह तो मैं दिन में भी कर सकता हूँ न!” सीमा की बात बीच में काटते हुए उसने कहा।

फिर उसने मुकेश को विस्तार से सारा प्लान बताया और जो शर्त उन्होंने तय की थी वो भी बतायी.
जिस पर मुकेश राजी हो गया.

हमने मुकेश को अपनी ब्रा पेंटी पहनने के लिए दी.
फिर हम दोनों ने उसका पूरा मेकअप किया लड़कियों वाला … उसके होंठों लिपस्टिक भी लगायी.
और हमने उसे नाचने के लिए कहा.

स्पाई कैमरा की मदद से हमने उसकी एक वीडियो भी बना ली।

ये सब करने के बाद अब उसे वापिस भेजना था.
“अच्छा तो फिर हम शनिवार को मिलते हैं।” कहकर सीमा ने मुकेश को गले लगाया।

मुकेश सीमा के स्तन अपनी छाती पर महसूस कर सकता था।
जब वो अलग हुए तो सीमा ने मुकेश को एक लिप किस दी और उसके बाद मैंने भी मुकेश को किस की और उसे विदा कहा।

अब हम बेसब्री से शनिवार की रात 10 बजने का इंतज़ार करने लगी।
हम इतनी बेसब्र थी कि हम लास्ट 2 पेपर की ठीक से पढ़ाई भी नहीं कर पा रही थी।

शनिवार जब आखिरी पेपर देकर मुकेश की दुकान के पास से निकली, तब मुकेश क़ातिल निगाहों से हमारी ओर देख रहा था।

हम अपने कमरे पर आयी और अपनी सारी किताबें बिस्तर पर फेंक अपने कपड़े निकालने लगी और सीधे ही बाथरूम में चल पड़ी।

सीमा की बगल में काफी बाल बढ़ चुके थे, चूत पर मानो बालों का काला घना जंगल बन गया था।
लेकिन सीमा सिर्फ अकेली नहीं थी … मैं भी थी.
सीमा को कंपनी देने के लिए मैंने भी अपने बाल बढ़ाये थे और जो हालत सीमा की थी ठीक वैसी ही मेरी थी।

हमारी बग़ल में से बदबू आ रही थी और अभी तो शाम के 6 ही बजे थे.

करीब डेढ़ घंटे एक दूसरी को नंगी नहलाने के बाद हम बाथरूम से किस करती हुई बाहर निकली और बिना शरीर को पौंछे ही बिस्तर पर गिर गयी।

आधे से ज़्यादा घंटे तक हम दोनों अपने बिस्तर पर ऐसे ही नंगी पड़ी रही।

फिर सीमा उठी और नंगी ही मैग्गी बनाने लगी.
हमने नंगी रहकर ही मैगी खाई।

9 बजे तक हम ऐसी ही नंगी रही और एक दूसरी के कभी जिस्म से खेलती, कभी किस करती, कभी एक दूसरे को चाटती।

तब हम दोनों तैयार हुई और मुकेश को फ़ोन लगाया।
मुकेश की ओर से साफ सिग्नल मिलते ही हमने 10 मिनट तक आपस में किस किया और फिर सीमा मुकेश की दुकान पर चल पड़ी।

सीमा के पीछे पीछे कुछ दूरी पर मैं थी.
दूकान पर पहुँचते ही सीमा अंदर घुस गयी.

सीमा के अंदर दाखिल होते ही मुकेश ने दुकान का शटर नीचे गिरा दिया।

“कोई स्पाई केम तो नहीं लगाया न तुमने?” सीमा ने मुकेश से पूछा।

“नहीं नही, चाहे तो देख सकती हो।” मुकेश ने कहा।

“नही, तुम पर भरोसा है। लेकिन बता दूं कि अगर कोई स्पाई कैमरा लगाया हो तो निकाल दो, वरना तुम्हारा वो ब्रा पेंटी पहनकर डांस करने वाले मोमेंट का वीडियो हमारे पास है, तुम हमें ब्लैकमेल नहीं कर पाओगे।”
“क्या? तुमने उसका वीडियो बनाया लिया था?” मुकेश कुछ देर के लिये हैरान रह गया।

“हां, और अगर कैमरा नहीं लगाया तो मेरी कपड़े निकलने में मदद करो।”

मुकेश धीरे धीरे सीमा की ओर आगे बढ़ा और उसने उसकी कुर्ती को नीचे से उठाया।

सीमा ने वही कुर्ती पहन रखी थी जो उसने पहली बार मुकेश से मिलने पर पहनी थी।

कुछ ही देर में सलवार और ब्रा में सीमा मुकेश के सामने थी।
मुकेश की तो नज़र सीमा के स्तनों से हट ही नहीं रही थी।

“अब ऐसे ही देखोगे? बाकी का नज़ारा नहीं देखना चाहोगे?” सीमा ने अपना सलवार का नाड़ा ढीला करते हुए कहा।

मुकेश अपने ख्यालों में से बाहर आया और किसी भूखे शेर की तरह सीमा का नाड़ा खोल दिया।

अब सीमा केवल ब्रा और पेंटी में थी।
उसके गोरे गोरे पांव, गोरी चिट्टी बांहें और एकदम फिट शरीर को मुकेश एक नज़र देखता ही रहा।

“चलो इस ब्रा और पेंटी से भी मुझे आज़ाद कर दो।” सीमा ने अपनी ब्रा की ओर उंगली करते हुए मुकेश को कहा.

बिना कोई देरी किये मुकेश ने सीमा की बात मान ली और उसकी ब्रा पेंटी भी निकाल दी।

अब सीमा मुकेश के सामने बिल्कुल नंगी थी, उसने सिर्फ अपनी सैंडल पहनी हुई थी।

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उसकी बग़ल और चूत के बढ़े हुए बाल उसकी खूबसूरती को दाग लगा रहे थे।
लेकिन कुछ ही क्षणों में वे दूर होने वाले थे।

मुकेश ने अपने ड्रावर में से एक बड़ा सा श्वेत तौलिया निकाला जो सीमा की गोरी खूबसूरती से बिल्कुल मैच करता था।

सीमा जब सैलून की सीट पर बैठी तब उसने सीमा को पूरी तरह से ढक दिया और बारीकी से देख लिया कि कही से भी वो नंगी तो नहीं दिखाई पड़ रही।

जब उसे पूरी तरह से तसल्ली हो गयी तो उसने दुकान का शटर फिर से खोल दिया और मुझे फ़ोन लगा दिया।

मैं बस थोड़े ही दूर थी मुकेश की दुकान से!

फिर वह सीमा के बालों में पानी का स्प्रे कर के उसके बालों को कंघी से सीधा करने लगा।
पीछे से सीमा के खुले काले घने बाल थोड़े से मतलब कहने मात्र के सेट कर दिये।

इतने में ही मैं वहां पहुंच गई।
अब सबसे कठिन पार्ट था।

अब जिस तौलिये ने उसके पूरे शरीर को कवर कर के रखा था वो हटने वाला था और अपनी बग़ल साफ करवाने के लिये उसे खड़ा होना था और तो और ऊपर से दुकान का शटर भी खुला था।
कोई देख न ले उसी के टेंशन में उसका दिल जोरो से धड़क रहा था।

“यदि आप कंफर्टेबल न हो तो मैं दुकान का शटर बंद कर दूं?” उसने परिस्थिति को संभालना चाहा क्योंकि यह सब हमारे अलावा उसके साथ भी तो पहली ही बार हो रहा था।

रात के साढ़े दस बजने को थे दूर दूर तक कोई दिखाई तो नहीं पड़ता था और ऊपर से उसकी दुकान साइड कार्नर में होने की वजह से ऐसे ही कोई नहीं देख सकता था।

लेकिन फिर भी इस तरह के खतरनाक कारनामे को अंजाम देना हो तो दिल तो धड़केगा ही।

“नहीं नहीं, जैसा हमने डिसाइड किया था ठीक वैसे ही मैं चाहती हूं कि यह टास्क पूरा हो।” यह कहकर वो अपने शरीर से तौलिया हटाने लगी और सैलून की कुर्सी छोड़ खुद ही खड़ी हो गयी।

अब दुकान का शटर खुला था और वो बिल्कुल नंगी थी।

उसने अपने हाथ खड़े किये और अब उसकी बालों से भरी बग़ल बिल्कुल साफ दिख रही थी।

मैं कुछ देर तक वहां बिल्कुल स्तब्ध सी खड़ी सब देख रही थी।
मुझे नहीं पता था कि सीमा में इतनी हिम्मत होगी।

“अरे अब मोबाइल निकाल कर वीडियो भी बनायेगी या नहीं?” जब उसने बोला तो मैं तंद्रा से जागी और जल्द अपना फ़ोन निकाला और वीडियो रिकॉर्ड करने लगी।

मुकेश उस्तरा लेकर धीरे-धीरे सीमा की दायीं बग़ल के बाल निकालने लगा।
थोड़ी ही देर में उसकी दायीं बग़ल बिल्कुल साफ थी।

अब बारी थी बायीं बग़ल की … कुछ देर में मुकेश ने वो भी साफ कर दी।

अब बग़ल से बाल हट जाने के कारण सीमा की खूबसूरती और भी चहक रही थी।

रात के करीब 11 बजने को थे।
मुकेश बाल शेव करने में, मैं वीडियो बनाने में व्यस्त थी हमें पता नहीं था कि किसी ने हमें देखा भी था या नहीं।
लेकिन फिलहाल मुकेश की दुकान पर कोई नहीं था।

अब उसने पाउडर सीमा की बगल में लगा दिया जिससे उसकी अंडरआर्म से सुंगंध आने लगी थी।

मुकेश ने अब सैलून की चेयर को घूमा दिया और फिर सीमा अपनी टांगें चौड़ी करके उस पर बैठ गयी।
उसकी चूत बालों के कारण बिल्कुल ही ढकी हुई थी।

मुकेश ने शेविंग क्रीम हाथ में ली और सीमा की चूत पर बने बालों पर लगाने के लिये आगे बढ़ा।

लेकिन सीमा ने वो क्रीम लगवाने से मना कर दिया।
वो चाहती थी कि बिना ही कोई क्रीम लगाये मुकेश केवल सिर्फ उस्तरे से उसकी चूत के बाल शेव करे।

मुकेश ने उसको चेताया कि बिना क्रीम के शेव करने पर उसे तकलीफ होगी.
लेकिन वह फिर भी अपनी बात पर अड़ी रही।

जैसे ही मुकेश ने उसकी चूत पर हल्के हाथों से उस्तरा फिराना शुरू किया तो वो दर्द से कराह उठी।
उसके मुंह से सिसकियाँ निकलनी शुरू हो चुकी थी और वो कैमरे में कैद भी हो रही थी.

लेकिन फिर भी वो हर हाल प्रयास कर रही थी कि उसके मुंह से कराहने की आवाज़ न निकले.
अगर कोई उसकी कराहने की आवाज़ सुन लेता तो हम तीनों के लिये दिक्कत हो सकती थी।

लेकिन बिना क्रीम के शेविंग करवाने का दर्द इतना था कि वो चाहकर भी अपने आप को रोक नहीं सकती थी।

मुकेश हल्के हाथों से शेविंग कर रहा था लेकिन एक पराये मर्द का हाथ अपनी चूत पे पाकर सीमा की चूत पानी भी छोड़ रही थी, जो मुकेश के लिये परेशानियां खड़ी कर रही थी।

घंटे भर की मशक़्क़त के बाद सीमा की चूत बिल्कुल साफ थी लेकिन बिना क्रीम के शेविंग करने के कारण लाल हो चुकी थी।

वो उठी और मुकेश को लिप किस करने लगी।

मुकेश के हाथ से उस्तरा नीचे गिर पड़ा।
वो मदहोश हो चुका था।

धीरे-धीरे किसी पोर्न स्टार की तरह वो सैंडल पहने हुए ही अपने घुटनों के बल बैठी और मुकेश की पैन्ट खोलने लगी।
उसने मुकेश का लंड निकाला जो उत्तेजना के चलते पहले से ही बड़ा था।

बिना कोई देरी किये सीमा ने मुकेश के लंड को मुंह में भर लिया।

मुकेश अपना लंड सीमा के मुंह में पाकर सातवें आसमान पर था।
वो सपने में भी ऐसी हसीन लड़की के मुंह में अपना लंड देगा ऐसा सोच भी नहीं सकता था।
लेकिन आज उसके साथ हकीकत में यह हो रहा था।

उत्तेजना के वश मुकेश का लंड इतना तन चुका था कि कुछ ही मिनटों में उसने अपना पानी सीमा के मुंह में छोड़ दिया जिसे सीमा ने खुशी खुशी चाट लिया।

हालांकि, किसी मर्द का स्पर्म पीना सीमा के लिये पहला अनुभव था फिर भी उसने कर दिखाया।

मुकेश का लंड शांत करने के बाद वह उठी और उसी वीर्य भरे हुए मुंह से मुकेश को किस करने लगी जबकि एक हाथ से उसने अभी भी मुकेश के लंड को पकड़ रखा था।

कुछ देर तक वे यूँही किस करते रहे और बाद में वे एक दूसरे से अलग हुए।

सीमा ने अपने कपड़े पहन लिये।

लेकिन सीमा को देख मुझ पर भी अपनी बग़ल और चूत के बाल शेव करवाने का भूत सवार हो चुका था।

सीमा की तरह मैंने भी मुकेश के पास अपने बाल शेव करवा लिये।
इसके बारे में विस्तार से फिर कभी लिखूंगी।

फिर मैंने कपड़े पहने।

हमने हमारी वॉर्डन को पहले से ही कुछ पैसे देकर फ़िल्म देखने जाने का बहाना बनाकर पटा लिया था।

कपड़े पहनने के बाद मुकेश हमे हमारे होस्टेल के गेट तक छोड़ने आया।

“रूम तक छोड़ने नहीं आओगे?” सीमा ने मुकेश के हाथ को पकड़कर कहा जिस पर मुकेश मना नहीं कर सका।

“रूम पर पहुँचने के बाद सीमा ने मुकेश को दहलीज़ पर ठहराया और खुद अपने सारे कपड़े फिर से उतारने लगी।
कुछ ही क्षणों में वो मुकेश के सामने फिर से नंगी थी।

“ये लो रखो मेरे कपड़े संभाल कर, तुम्हारे लिये मेरी ओर से गिफ्ट!”
सारे कपड़े निकाल के सीमा ने मुकेश को थमा दिए और विदा कहते हुए फिर से एक बार किस कर लिया।

मुकेश ने जाते जाते दहलीज़ पर ही सीमा के स्तनों का स्तनपान किया और उसकी शेव करी हुई रसीली चूत का रसपान किया फिर वहां से चला गया।

मुकेश के जाने के बाद मैंने भी खुद को कपड़ों से अलग कर लिया और फिर हम दोनों साथ में फिर से नंगी नहायी और फिर कुछ देर तक लेस्बियन सेक्स करने के बाद हम नंगी ही सो गई।

अगली सुबह हम जल्दी उठी, नंगे ही नाश्ता किया और फिर कपड़े पहन कर अपने रूम को खाली कर अपने गांव जाने के लिये निकल पड़ी।

सीमा ने वो सिम कार्ड निकाल कर नाले में फेंक दिया.

हमने अपने बीते हुए कल को अलविदा कहकर एक सफल और रोमांचक कॉलेज गर्ल सेक्स एडवेंचर की यादों को संजोये हुए शहर को अलविदा कह दिया।

उसके बाद मुकेश से कभी मिलना नहीं हुआ।

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