चुत की खुजली और मौसाजी का खीरा-2

This story is part of a series:


  • keyboard_arrow_left

    चुत की खुजली और मौसाजी का खीरा-1


  • keyboard_arrow_right

    चुत की खुजली और मौसाजी का खीरा-3

  • View all stories in series

मेरी हवस की कहानी के पहले भाग में आपने पढ़ा कि मैं मौसी के घर रह रही थी और मेरी चुदाई नहीं हो रही थी. एक रात मैं फ्रिज के पास खड़ी होकर अपनी चूत में खीरा अंदर बाहर कर रही थी तो ऊपर से मौसा जी आ गए.
अब आगे:

“नीतू बेटा, आर यू ओके?”
अचानक मेरे कान पर मर्दाना आवाज पड़ी, आवाज की तरफ देखा तो रसोई के दरवाजे पर मौसाजी खड़े थे।
उनको देख कर मुझे धक्का सा लगा, हे भगवान क्या देखा उन्होंने, मुझे उनकी तरफ देखना भी मुश्किल हो रहा था। जी तो कर रहा था कि ये जमीन फट जाये और मैं उसमें समा जाऊँ।
“नीतू बेटा, तुम ठीक तो हो ना …?”
फिर से उनकी आवाज कान पर पड़ी और मैं होश में आ गयी।

बाहर की लाइट की हल्की रोशनी में मुझे मौसाजी का चेहरा साफ साफ दिख रहा था। उनके चेहरे पर कुछ भी भाव नहीं थे, मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि वे कब आये थे, अभी या थोड़ी देर पहले … उन्होंने कुछ देखा ही नहीं … या ‘देख कर भी कुछ ना देखा हो’ ऐसी एक्टिंग कर रहे थे?
कुछ भी पता नहीं चल रहा था।

“नीतू बेटा, तुम ठीक हो ना … इतनी रात गए फ्रिज के सामने क्या कर रही हो?” उनकी आवाज से मैं फिर से होश में आयी.
उनकी आंखों में अजीब सी चमक दिख रही थी … पर क्यों?

फिर मैंने अपनी अवस्था पर ध्यान दिया। मैं मौसा जी के सामने बिल्कुल छोटी सी नाईटी में थी, अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी इसलिए उनको मेरे उभारों का आकार ठीक से नजर आ रहा था। फ्रिज की रोशनी में मेरा पूरा बदन चमक रहा था और उत्तेजना में खड़े हुए मेरे निप्पल का आकार नाईटी के ऊपर से नजर आ रहा था। शायद इसलिए उनकी आँखों में चमक थी।
उस ख्याल से मेरा बदन थरथराने लगा, मैंने झट से फ्रिज का दरवाजा बंद कर दिया।

उसी वक्त मेरी जांघों में खीरे ने मेरी चुत के दाने को रगड़ा और एक अलग ही उत्तेजना पैदा हो गयी। उसकी ऐसी किक मिली के मैं आँखें बंद करके उस पल का मजा लेने लगी, मौसा जी को सामने देख कर डर से ही सही मेरी चुत ने अपना बांध छोड़ भी दिया था।
“नीतू बेटा … तुम ठीक तो हो ना?”
अचानक मेरे कंधों पर मौसा जी के हाथों का स्पर्श महसूस हुआ, मैंने पलट कर देखा तो मौसाजी पीछे ही खड़े थे।

“रिलैक्स बेटा … क्या हो रहा है तुम्हें?” वे मेरे कंधे को सहलाते हुए बोले।
“क … क … कुछ … न … नही अंकल!”
वे मेरे कंधे को प्यार से सहला रहे थे पर मैं तो उस मर्दाना स्पर्श से और भी उत्तेजित हो रही थी। उस वक्त मेरे प्यासे शरीर को किसी मर्द के स्पर्श की बहुत जरूरत थी।

“इतनी क्यों डरी हो, ठंड लग रही है क्या तुम्हें?” मौसा जी ने पूछा.
मैंने सिर हिलाकर हामी भरी, क्या बोलूं … मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
मेरे हाँ के इशारे पर उन्होंने अपनी शाल उतारकर मेरे बदन पर लपेट दी।

“इतनी क्यों डरी हो? इतनी रात को फ्रिज में क्या ढूंढ रही हो?” वे मुझे शाल लपेटते हुए बोले।
मैंने ठीक से शाल ओढ़ ली, शाल की वजह से मेरे स्तन को तो ठीक से ढक लिया पर मेरी जांघें अभी भी उनके सामने नंगी थी।
“त … त..थैंक्स अंकल!”
शायद मेरी उसी अवस्था की वजह से उन्होंने मुझे शाल ओढ़ने को दी थी।

मौसा जी बहुत स्ट्रिक्ट थे पर उतने ही केयरिंग थे इसलिये यहा आने के एक दो हफ्ते में ही हम अच्छे दोस्त बन गए थे।

उन्होंने शाल मुझे दी पर मेरी नजर उनके हाफ टी शर्ट से बाहर दिख रहे उनके डोलों पर पड़ी। क्या हो रहा था, कुछ समझ नहीं आ रहा था, उस समय मुझे एक मर्द की सख्त जरूरत थी इसलिए सामने खड़े मेरे मौसाजी की ओर मैं आकर्षित होती जा रही थी, और नीचे मेरी चुत में घुसा पड़ा खीरा मेरी उत्तेजना और बढ़ा रहा था।

मौसा जी लगभग पचास साल के हो गए थे पर हर रोज एक डेढ़ घंटे कसरत करके अपने आपको बिल्कुल फिट रखा था। उनके मजबूत डोले, छाती पर सफ़ेद हो रहे उनके बाल … उस वजह से और भी आकर्षक दिख रहे थे।
“नीतू तुम ठीक हो ना, इतनी रात को क्या ढूंढ रही थी फ्रिज में?” मौसा जी ने फिर से मुझे पूछा और मैं होश में आ गयी।
“क … क् … खीरा!” मैं गलती से बोल गई।
“खीरा, क्यों?” उन्होंने कुछ ना समझते हुए मुझे पूछा.

उनके होंठों पर हल्की सी मुस्कान भी थी, मुझे तो यह शक हो रहा था कि उन्होंने मुझे खीरे को मेरी मुनिया में घुसाते हुए देख लिया है.
“हाँ मौसा जी … भूख लगी थी इसलिए खीरा खा रही थी.” मुझे जो सूझा, मैं बोल गयी, उनके होंठों पर मुस्कान और बढ़ गई।
“आज कम खाना खाया था क्या बेटा?” पूछते हुए उनकी नजर कुछ देर के लिए मेरी जांघों के बीच में गयी और मैं डर गई। क्या सचमुच मौसा जी ने सब देख लिया था, शर्म के मारे मैं मरी जा रही थीं, मुझे जल्द से जल्द वहाँ से निकलना था।

“हाँ … भूख लगी थी इसलिये आयी थी, पर आप इतनी रात गए यहाँ कैसे?” मैं खीरे पर से ध्यान हटाने के लिए बोली।
“बेटा, बहुत देर से नींद ही नहीं आ रही थी, इसलिए सोचा एक पेग मार कर देखूँ, किचन में आया तो तुम फ्रिज के सामने खड़ी थी.”
मैं मन ही मन यही प्रार्थना कर रही थी कि मेरी कदमताल उन्होंने ना देखी हो।

“इतनी रात को पेग … तबियत तो ठीक है ना आप की?” मैंने चिंता में पूछा।
“बेटा, सिर्फ पचास की उम्र है तुम तो ऐसे बोल रही हो कि साठ का हो गया हूं, सिर्फ बाल सफेद हो गए है पर बदन में अभी भी उतना ही जोश है.” वे हाथ पर से डोले और बॉडी दिखाते हुए बोले।
“पता है मौसाजी, आप बहुत स्ट्रांग हो!” खुद को ना रोक पाते हुए मैंने अपने हाथ को उनके डोलों पर घुमाए तो अजीब ही सरसराहट हुई।
मैं वैसे ही उनके डोलों पर हाथ फेरते रही, मेरे स्पर्श से मौसाजी भी उत्तेजित हो रहे थे।

“आप बैठो, मैं आपको पेग बना कर देती हूं.” मैंने उनको हेल्प करने के लिए बोला पर ‘खीरा चुत में घुसा पड़ा है.’ बाद में ध्यान में आया।
ओह शिट!

मौसा जी डाइनिंग टेबल के पास चले गए और कुर्सी पर बैठ गए।
ओ शिट … मैंने मौसा जी की तरफ देखा तो उनकी लुंगी में तम्बू बना हुआ था, वे क्यों उत्तेजित हुए थे? शायद उनको मेरी लगभग ट्रांसपेरेंट नाईटी में मेरे दूध दिख गए होंगे, या शायद उन्होंने मुझे कदमताल करते हुए देख लिया होगा।
उसी ख्याल से मेरे सब्र का बांध छूटा और चुत का रस खीरे के आजु बाजू से बाहर बहने लगा, वह फीलिंग मुझे पागल बना रही थी, मेरी हवस बढ़ा रही थी.
मैं तो खीरा लेकर के कमरे में जाने के इरादे से आई थी और कहाँ पेग बनाने के चक्कर में फंस गयी, मुझे तो डर लग रहा था कि कहीं खीरा मेरी चुत से फिर से फिसल न जाये, पैंटी उतारी न होती तो उसे खीरे पर लेकर उसको फिसलने से रोक सकती थी।
पैंटी का ख्याल आते ही मैंने नीचे देखा तो फ्रिज के बाजू में ही मेरी पैंटी पड़ी थी, मौसा जी को पैंटी दिखे, उससे पहले मुझे उसे उठाना था।

“क्या हुआ बेटा कुछ ढूंढ रही हो क्या?” मौसा जी मुझे बोले तो मैंने डर कर उनकी तरफ देखा और एक पैर पैंटी पर रख कर उसे पैर के नीचे छुपा लिया।
“कुछ न.. नहीं अंकल, मैं आप को पेग बना कर देती हूं.” मैं धीरे धीरे चलकर किचन टेबल तक गयी। मैं पैरों को पास पास रखकर चल रही थी जिससे खीरा नीचे गिरे नहीं और पैरों के नीचे से पैंटी भी खींच के ले जा रही थी कि जब भी मौका मिले उसको उठा लूं।
पर चलते हुए खीरा मेरी चुत में अजब तरीके से रगड़ खा रहा था और मुझे और उत्तेजित कर रहा था।

मैं गिलास लेने लगी पर वह ऊपर के शेल्फ में था, मुझे डर था गिलास को निकालते वक्त खीरा नीचे न गिर जाए। मैं पैरों की उंगलियों पर खड़ी रहकर प्रयास करने लगी, मेरी हर हलचल से खीरा मेरी चुत की दीवारों पर रगड़ खा रहा था और हर बार अलग उत्तेजना पैदा कर रहा था।
अचानक मुझे मेरे नितम्ब पर कुछ कड़क महसूस हुआ, मैंने डर कर पीछे देखा तो मौसा जी मेरे पीछे खड़े थे।
“हाथ नहीं पहुंच रहा था तो बोल देती … मैं निकाल देता हूँ गिलास!” उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और आगे सरकते हुए शेल्फ से गिलास निकाला, मैं मौसा जी और टेबल के बीच में सैंडविच की तरह दब गई। गिलास निकालते वक्त उनका हथियार मेरे गांड पर मजे से रगड़ खा रहा था, मैं भी बड़े दिनों के बाद मिल रहे लंड के स्पर्श से कामोत्तेजित हो रही थी, भूल ही गयी थी कि यह मेरे मौसा जी का लंड है।

मौसा जी ने गिलास निकाला और सामने रखे ट्रे में रखा, यह करते वक्त उन्होंने अपना पूरा शरीर मेरी पीठ से सटा दिया, मैं उस मर्दाने स्पर्श से और पागल हो रही थी। मैं भी उनका कड़कपन मेरे गांड पर महसूस कर के खुश हो रही थी।
उन्होंने अपना लंड मेरी गांड पर अभी भी दबा कर रखा हुआ था।
“और कुछ निकालना है बेटा?” मौसा जी ने पूछा, उनकी गर्म सांसें मेरी गर्दन पर टकरा रही थी और मैं काम-पागल हो रही थी।
“कुछ नहीं अंकल, पर आप को चखने में क्या चाहिए?” मैंने पूछा।
“खीरा!”

मैंने आश्चर्य से पीछे उनकी तरफ देखा, उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।
खीरा बोलते हुए उन्होंने उनका खीरा भी जोर से मेरे नितम्ब पर रगड़ा था। शायद उन्होंने अंडरवियर नहीं पहनी थी, पचास साल के मौसा जी का लंड भी मेरी वजह से खड़ा है सोच कर ही अजीब सी सरसराहट हो रही थी।
“खीरा क्यों अंकल?”
“क्योंकि तुम खा रही थी ना!” मौसा जी अपना लंड मेरी गांड पर दबाते हुए बोले।
“मैं खा रही थी इसलिए क्यों?” मैंने सवाल पूछते हुए मेरी गांड पीछे कर के उनके लंड पर दबा दी। शायद उनको भी यह अहसास हो गया था, मेरी चुत की आग न जाने मुझसे क्या क्या करवा रही थीं।
“क्योंकि वह मीठा है इसलिये!” उनकी उत्तेजना उनकी आवाज से ही समझ में आ रही थी, मैं और भी खुश हो गई थी। पहली बार मैं एक पचास साल के आदमी के साथ कामुक हरकतें करके उनकी कामुकता बढ़ा रही थी।

“बेटा … यह पैर को क्या चुभ रहा है?” उन्होंने पूछा और मुझे याद आया, मेरे पैरों के पास मेरी पैंटी पड़ी थी, मौसा जी के लंड के स्पर्श में, मैं उसे हटाना भूल ही गयी थी।
“कुछ नहीं मौसा जी पौंछा होगा, मैं बाद में उठाती हूँ.” मैं लड़खड़ाते हुए बोली, मुझे जल्द से जल्द उन्हें मुझसे दूर करना होगा।
“खीरा काट कर दूँ मौसा जी?” मैंने पूछा.
“हाँ … और नमक भी लगाकर दो!” कहते हुए उन्होंने अपने हाथ मेरी कमर पर रखे और मेरे मुँह से दबी सी सिसकी निकल गयी।

धीरे धीरे मौसाजी अपना हाथ मेरी गांड पर घुमाने लगे, शायद उनको स्पर्श से ही पता चल गया होगा कि मैंने पैंटी नहीं पहनी है। मेरी तरफ से कुछ भी विरोध न होने पर उनकी हिम्मत और बढ़ गई और मेरे दोनों नितम्बों पर अपने हाथ साफ किये और मैंने भी उनको रोका नहीं।
“थैंक्स फ़ॉर हेल्पिंग बेटा, मेरी इतनी हेल्प पहले किसी ने नहीं की थी!” ऐसा कहते हुए उन्होंने अपने हाथ मेरे बालों पर फिराए।
“मौसी नहीं है तो आप की पूरी जिम्मेदारी मेरी है, आप को क्या चाहिए वह देना मेरा काम है.”
“थैंक्स नीतू!” कहकर वे अपने हाथ मेरे गालों पर ले आए और मेरे गालों को सहलाने लगे। एक नाजुक पल हम दोनों के बीच में पैदा हो गया था। मैंने भी अपने हाथ उनके हाथों पर रख दिए, हम दोनों भी एक दूसरे के आँखों में देख रहे थे।

कहानी जारी रहेगी.
मेरी जवान बदन की हवस की कहानी आपको कैसी लग रही है, मुझे इमेल करके अवश्य बतायें।
मेरा मेल आई डी है [email protected]

More Sexy Stories  60 साल के गे अंकल की जबरदस्त चुदाई