पड़ोसन भाभी की चूत चुदासी लंड की प्यासी

मेरे सभी प्यारे दोस्तो.. मैं सुमित इंदौर का रहने वाला हूँ. मैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ. मैं 5 फीट 7 इंच लम्बा हूँ और रंग गोरा है. मेरा लंड 7 इंच का नापा हुआ है. मेरा शरीर एथलीट की तरह है और मैं स्मार्ट दिखता हूँ. मैं लड़कियों से थोड़ा शर्माता हूँ लेकिन भाभियों से बहुत लहराता हूँ. मैंने बहुत सी भाभियों को अपने जाल में फंसाया है और उनका फायदा भी उठाया है.

मेरे पड़ोस में मेरे एक भईया रहते हैं. उनकी शादी को अभी एक साल ही हुआ है. मैंने भाभी को पटाया भी है और उनके घर में जा कर उन्हें चोद भी दिया है. ये कहानी उन्हीं भाभी के साथ मेरी चुदाई को लेकर है.. मजा लीजिएगा.

जैसा कि मैंने बताया कि मेरा उनके घर आना जाना था, लेकिन एक साल तक मेरी उनसे कभी बात नहीं हुई.

एक दिन जब मैं अपने घर से बाहर निकला तो मेरी एक फ्रेंड भाभी के पास खड़े होकर उनसे बात कर रही थी.
उसने मुझे देखा और मुझे बुलाया और कहा- तुम यहाँ कैसे?
मैंने कहा- हाँ.. मैं तो यहीं रहता हूँ.
उसने भाभी की ओर हाथ दिखाते हुए कहा- ये मेरी दीदी हैं.
मैंने कहा- अच्छा! लेकिन तुम इतने दिनों बाद यहाँ कैसे?
उसने कहा- हां यार, मैं बाहर थी.
फिर भाभी ने कहा- अरे अन्दर आ जाओ, आराम से बैठ के बात करो.

हम तीनों अन्दर चले आए और अन्दर जाकर सोफे पर बैठ कर बात करने लगे. तब तक भाभी ने चाय बनाई और हम बैठ के पी ही रहे थे कि मेरी फ्रेंड को कोई फ़ोन आ गया और वो बात करने बाहर चली गई.

इसके बाद मैं और भाभी बात करने लगे. मैंने पहले उनसे भईया के बारे में पूछना शुरू किया. तो भाभी ने बताया तुम्हारे भईया तो शहर के बाहर रहकर ही काम करते रहते हैं, मुझ पर तो ध्यान ही नहीं देते.
मैंने पूछा- इसके पहले कब आए थे भईया?
तो उन्होंने बताया कि दो महीने पहले आए थे.

मुझे समझ आ गया कि मतलब भाभी दो महीने से नहीं चुदी हैं, ये तो गलत बात है. ऐसे तो भाभी की जवानी बर्बाद हो जाएगी मतलब अब मुझे ही कुछ करना होगा.

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कुछ देर बाद हम तीनों अपने अपने काम में व्यस्त हो गए.

उस दिन से मेरा भाभी की तरफ विशेष ध्यान रहने लगा. मुझे एक हसीन सी चुत की जुगाड़ दिखने लगी थी.

अब जब भी भाभी छत पर कपड़े डालने आती थीं तो मैं भाभी को देखता रहता था और कभी कभी बात भी कर लिया करता था.

मैंने एक दिन भाभी से पूछा- आपकी भईया से बात हुई.. कब तक आ रहे हैं वो?
तो भाभी ने कहा- अभी आने का तो कुछ नहीं बताया. मैं तो बस यूं ही इन्तजार करती रहती हूँ.

मैंने मन में सोचा कि आपने पूरा नहीं बोला भाभी कि किसका इन्तजार करती रहती हो.. इसका मतलब ये भी हुआ कि आपको लंड का इन्तजार रहता है, अब वो चाहे मेरा हो या भैया का हो.
मुझे लगा रास्ता साफ़ है और फिर मैंने कहा- भाभी अगर कोई भी काम हो तो मुझे बता देना.
भाभी ने लपक कर कहा- हाँ ठीक है.. तुम भी आते जाते रहा करो.. मन लगा रहता है.

अब मैंने रोज़ भाभी के घर जाना शुरू कर दिया और भाभी भी मुझसे खूब हंस हंसकर बातें करने लगी थीं.

कभी कभी भाभी जब मुझे चाय का कप देती थीं, तो वो मेरा हाथ छुआ करती थीं. मैं सोच में पड़ जाता था कि मैं भाभी को पटा रहा हूँ कि भाभी मुझे सैट कर रही हैं. लेकिन जो भी हो रहा था, उसमें मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था.

मैं अब अक्सर यही सोचता रहता था कि भाभी को चोदने के लिए मनाऊं कैसे?

एक दिन मैं ऐसे ही भाभी के घर के सामने से निकला तो भाभी ने मुझसे कहा- क्यों आज नहीं आओगे अपनी भाभी से मिलने?
मैंने कहा- नहीं भाभी, ऐसा नहीं है.
भाभी ने कहा- तो ठीक है फिर आओ बैठो, मैंने चाय भी बनाई है.

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मैं झट से उनके घर में अन्दर चला गया और चाय पीने लगा. मैं चाय पीते हुए भाभी से बात करने लगा. भाभी ने आज अपना पल्लू कुछ ढलकाया हुआ था जिससे उनकी चूचियों के दीदार हो रहे थे. इससे मुझे लगा कि मेरा लंड खड़ा हो रहा है. मैं अपने लंड को पैर से छुपाने लगा.

तभी भाभी मेरे सामने आईं और लंड को फूलते हुए देख कर कहने लगीं- क्या कोई प्रॉब्लम है?
मैंने झेंपते हुए और लंड को दबाते हुए कहा- न..नहीं तो भाभी.
फिर भाभी ने बदस्तूर लंड को घूरते हुए कहा- अच्छा एक बात बताओ.. तुम्हें सेक्स के बारे में तो पता ही होगा?
मैंने कहा- हाँ.
भाभी- क्या तुमने कभी किया है?
मैं भाभी की इस बात पर शांत हो गया. भाभी ने मेरी जांघ पर हाथ रखते हुए कहा- शर्माओ नहीं.
मैंने कहा- हाँ.. लेकिन सिर्फ दो बार.
फिर भाभी ने पूछा- कितना समय पहले किया था?
मैंने कहा- एक साल पहले.
भाभी ने पूछा- और क्या अब भी तुम्हारा मन होता है करने का?
मैंने कहा- हाँ.

मैं मन ही मन समझ रहा था कि भाभी मुझे कहाँ ले जाना चाहती हैं, तो मैंने बातें जारी रखी.

फिर मैंने भाभी से सीधा पूछा- आपका क्या हाल है भाभी?
भाभी ने कहा- बस तुम्हारे भईया आएं तो मेरी प्यास बुझे.
मैंने कहा- अच्छा.. सिर्फ भैया.. कोई और साधन नहीं है?
भाभी ने कहा- किस लिए?
मैंने- प्यास बुझाने के लिए?
तो भाभी ने गहरी सांस लेते हुए कहा- कौन मेरा सहारा बनेगा?
मैंने कहा- भाभी मैंने आपको एक बात बोली थी.. अगर कोई भी काम हो तो मुझे बुला लेना, कोई भी.
भाभी ने कहा- हाँ काम तो है.
मैंने पूछा- क्या?
भाभी ने आँख मारते हुए कहा- यहाँ आओ.

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