भाभी की चूत चाटने का मजा-1

मेरे अज़ीज़ दोस्तो, कैसे हो आप सब?
मैं आपका अपना शुभम एक बार फिर से मेरी इंडियन सेक्स कहानी हिंदी में लेकर हाजिर हूं. इसमें पढ़ें कि मुझे एक नयी भाभी की चूत चाटने का मजा कैसे मिला.
मैं उम्मीद करता हूं कि आप लोग अच्छे होंगे. आप लोगों ने मेरी पहली कहानियों को खूब प्यार दिया. बहुत से लोगों ने मुझे ईमेल भी किया. उसके लिए मैं आप सबको दिल से धन्यवाद देता हूं.

इससे पहले मेरी इंडियन सेक्स कहानी हिंदी में प्रकाशित हुई हैं:
मेरी गर्लफ्रेंड की चुदाई
गर्लफ्रेंड की गांड चुदाई
पड़ोसी भाभी से प्यार और फिर चुदाई

आप लोगों ने मेरी इन सभी कहानियों को इतना प्यार दिया जिसके लिये मैं सभी का बहुत आभारी हूं.
इससे पहले की कहानियों में आपने पढ़ा था कि मैं और शिवानी भाभी कैसे चुदाई करते थे. मैंने भाभी की चूत चोद कर उनके पेट में बच्चा भी कर दिया.

उसके बाद पड़ोसन शिवानी भाभी ने अपनी बहन की चूत चुदाई भी मुझसे करवाई.

हम और शिवानी भाभी तीसरे माले पर रहते थे. पहले वाली कहानी में मैंने आपको बताया था कि शिवानी भाभी ने मुझे नीचे वाले फ्लोर में रहने वाली भाभी सुमीना की चूत दिलवाने का भी वादा किया था.

सुमीना एक शादीशुदा महिला थी. यहां पर मैंने उनका नाम बदल दिया है. उनकी उम्र 27 के करीब थी. वो सेकेंड फ्लोर पर रहती थी. जब मैं नीचे काम से जाता था या घर से बाहर कहीं जाना होता था तो अक्सर सुमीना भाभी मुझे दिख जाया करती थी.

कुछ दिन के बाद अब सुमीना मुझसे भी एक दो बात कर लिया करती थी. लेकिन खुल कर कुछ बात नहीं हो पाती थी.

सुमीना अपने पति से बहुत ही परेशान थी. वो एक कम्पनी में काम करता था. मगर बहुत ज्यादा दारू पीता था और रोज उनके घर में हंगामा होता था. वो उसके साथ रोज लड़ाई करता था. हम लोग बीच में कुछ बोल नहीं सकते थे.

उन दोनों का एक दो साल का बेटा भी था.

एक दिन सुमीना भाभी के लड़के की तबियत खराब हो गयी. उसके बेटे की तबियत काफी गंभीर थी. वो शिवानी भाभी के पास पैसे मांगने के लिए ऊपर आई. मगर शिवानी के पास भी उस वक्त सुमीना को देने के लिए पैसे नहीं थे.

शिवानी भाभी ने कहा- मैं शुभम से बात करती हूं. शायद वो कुछ मदद कर सके.

कुछ देर के बाद शिवानी की कॉल मेरे पास आई. उसने मुझे सारी बात बताई और बोली- कुछ पैसों की जरूरत है. अभी दे दो, बाद में तुम्हें लौटा देंगे.
मैं बोला- ठीक है. मगर नोएडा के अस्पतालों में डॉक्टरों की फीस बहुत ज्यादा है. तुम कर पाओगी? बेहतर होगा कि उसको किसी अच्छे प्राइवेट अस्पताल में दिखा दो.

इस तरह से हमने सुमीना के बेटे को एक प्राइवेट अस्पताल में दिखाने का मन बना लिया. फिर मैं सुमीना और उसके बेटे को लेकर नजदीक के एक अस्पताल में लेकर गया.

डॉक्टर ने उसके बेटे की जांच करने के बाद बोल दिया कि उसके बेटे को यहीं अस्पताल में ही भर्ती करना होगा और यहीं पर उसका इलाज होगा.
सुमीना ये सुन कर डर गयी. एक तो उसके बेटे की हालत गंभीर थी और उसके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वो अपने लड़के का इलाज वहां पर करवा सके.

मैंने पैसों के बारे में डॉक्टर से बात की तो वो बोला कि इलाज में रोज का 20 से 25 हजार तक का खर्च आयेगा. ये बात मैंने सुमीना को बताई तो वो सन्न रह गयी और बोली कि मैं इतने पैसे लाऊंगी कहां से?
सच तो ये था कि मैं भी उसकी मदद नहीं कर सकता था क्योंकि मेरे पास भी इतने रूपये नहीं थे.

सुमीना ने इस बारे में अपने पति से बात की तो उसने साफ ये कह कर मना कर दिया कि उसके पास इतने पैसे नहीं हैं.
ये सुनकर सुमीना रोने लगी.

फिर मैंने उसको नोएडा के सरकारी अस्पताल में चलने का सुझाव दिया.
वो बोली- देख लो, जैसा तुम्हें ठीक लगे, मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि मैं कहां जाऊं और क्या करूं।

फिर हम दोनों उसके बेटे को सरकारी अस्पताल में ले गये. वहां के डॉक्टर ने भी भर्ती करने का बोला. मगर साथ में ये भी कह दिया कि अभी उनके पास बेड उपलब्ध नहीं हैं. इसको यहां भर्ती नहीं कर पायेंगे.

मुझे गुस्सा आ गया. मैंने अपनी पहचान के एक बड़े आदमी से बात की और उसकी सिफारिश पर सुमीना के बेटे को अस्पताल में भर्ती करवा दिया. सुमीना और मैं रात में वहीं रुक गये. रात को मैं उसके लिए खाना भी लेकर आया.

हम दोनों ने साथ में खाना खाया. सरकारी अस्पताल में प्राइवेट वार्ड की सुविधा थी. मैंने लड़के को वहीं पर भर्ती करवाया ताकि उसका अच्छा इलाज हो सके और जल्दी हो सके.

सुमीना बोली- आपके जो भी पैसे खर्च हो रहे हैं वो मैं आपको सब वापस कर दूंगी.
मैं बोला- तुम्हें अभी से पैसों की लगी है, पहले बच्चे को ठीक तो हो जाने दो. उसके बाद देख लेंगे हिसाब तो, मगर पहले इसका इलाज जरूरी है.

हैरानी की बात थी कि सुमीना का पति अभी तक अपने बच्चे को हॉस्पिटल में देखने तक नहीं आया था. जो भी दवा डॉक्टर्स बता रहे थे वो सब मैं ही लेकर आ रहा था.

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मुझे उन मां बेटे दोनों का ही ध्यान रखना पड़ रहा था. मगर खुशी की बात ये हुई कि भगवान की कृपा से उसका बेटा तीन दिन के अंदर ही ठीक हो गया. अब हम दोनों घर लौटने की तैयारी कर रहे थे.

सुमीना मेरे पास आकर बोली- शुभम, मैं तुम्हारा ये अहसान जिन्दगी भर नहीं उतार पाऊंगी.
मैंने कहा- कोई बात नहीं, ये तो मेरा फर्ज था. पड़ोसी होने के नाते मेरी भी जिम्मेदारी बनती है.

हम दोनों के फोन नम्बर अस्पताल में ही एक दूसरे के पास एक्सचेंज हो गये थे. उसके बाद हम घर आ गये. मैंने घर पहुंच कर सुमीना को सारी दवा बता दी कि कौन सी दवा कितनी और किस टाइम पर देनी है.

फिर मैं जाने लगा तो वो बोली- रुको, मैं तुम्हारे लिये चाय बना देती हूं. तुम चाय पीकर ही जाना.
मैं बोला- फिर कभी पी लूंगा. अभी मैं जाकर आराम करूंगा. तुम भी थक गयी होगी. तुम्हें भी आराम करना चाहिए.

वो बोली- ठीक है.
उसने मुझे कस कर हग कर लिया.

मैं भी सोच में पड़ गया कि इसको एकदम से ये क्या हो गया. उसके बाद मैं वहां से निकल आया और ऊपर शिवानी भाभी के पास गया.

कई दिनों से मेरे लंड को चूत नहीं मिली थी. वैसे भी सुमीना के हग करने से उसकी चूचियों का स्पर्श पाकर मेरे अंदर सेक्स की प्यास जाग गयी थी.

मैं शिवानी के रूम में गया और उसको नंगी करके चोदा.

शिवानी भाभी की चूत मार कर मैं अपने रूम में आ गया. कुछ देर के बाद ही मुझे नींद आ गयी. मैं सो गया. शाम को मैं सुमीना के यहां गया ये देखने कि उसके बच्चे की तबियत अब ठीक है या नहीं.

मैं गया तो उसका पति भी आ गया. फिर मैं अंदर नहीं गया और उल्टे पांव वापस आ गया.
मैं शिवानी भाभी के पास गया और उनसे बोला- आज रात के लिए मेरा खाना भी अपने यहां ही बना लेना.

शिवानी भाभी ने खाना तैयार करने के बाद मुझे बुलाया. हम दोनों ने साथ में खाना खाया.

फिर मैं भाभी के साथ लेट गया और उसने मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया. मैं भी भाभी की चूची दबाने लगा और उसकी चूत को मसलने लगा.

कुछ ही देर में दोनों बहुत गर्म हो गये. मैंने शिवानी के कपड़े उतार कर उसको नंगी कर दिया. उसने भी मेरे कपड़े उतार दिये और हम दोनों एक दूसरे को जोर से चूमने और चूसने लगे.

मैं भाभी की चूचियों को पीने लगा और वो मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसकी मुठ मारने लगी. मैंने भाभी को बेड पर पटक लिया और उसकी चूत में मुंह देकर उसकी चूत चाटने का मजा लेने लगा. वो मेरे मुंह को चूत में दबाने लगी.

फिर वो उठी और मुझे नीचे पटक कर मेरे लंड को भूखी शेरनी की तरह चूसने और खाने लगी. कुछ ही देर में मैं बेकाबू हो गया. मैंने उसको नीचे पटका और उसकी चूत में लंड घुसा दिया.

मैं भाभी की चूत को जोर जोर के धक्के लगा कर चोदने लगा. वो भी मदहोश होने लगी. मैंने 15 मिनट तक उसकी चूत मारी और फिर दोनों हांफते हुए लेट गये. कुछ देर के बाद फिर से उसने मेरे लंड को चूस चूस कर खड़ा कर दिया.

एक बार फिर से मैंने शिवानी को बेड पर झुका कर घोड़ी बना लिया और उसकी चूत में लंड पेल दिया. मैंने 20 मिनट तक भाभी की चूत चुदाई का दूसरा राउंड खेला. अब मैं काफी थक गया था. रात भी काफी हो गयी थी.

मैं सोने के लिए अपने रूम में जाने लगा. तभी सुमीना के नम्बर से मुझे व्हाट्सएप मैसेज रिसीव हुआ.
वो पूछने लगी- कैसे हो आप शुभम?
मैं बोला- मैं ठीक हूं. आप बताओ, बेटे की तबियत अब कैसी है?

वो बोली- अब ठीक है, सो रहा है. मैं भी ठीक हूं.
इस तरह से सुमीना और मेरी रोज फोन पर भी बात होने लगी.

सुमीना भाभी की उम्र 27 के करीब थी और उनका फिगर 34-30-32 का था. सुमीना ने अपने आपको बहुत मेंटेन करके रखा था।

सुमीना रोज व्हाट्स एप पर मुझे मैसेज किया करती थी. मेरा हाल चाल पूछती रहती थी.
कई बार वो मुझे अपने घर में आने के लिए न्यौता दे चुकी थी. कई बार उसने बोला- कभी मेरे घर आओ, चाय पीकर जाओ.

मैंने यह बात शिवानी को बताई तो वो कहने लगी कि सुमीना शायद तुमसे चुदना चाहती है. अगर मौका मिले तो इसकी प्यास को बुझा दो.
मैं बोला- मगर आप इतने यकीन के साथ कैसे कह सकती हो कि उसको मेरा लंड चाहिए?

शिवानी बोली- मैं एक औरत हूं. एक औरत ही दूसरी औरत की बातों का सही मतलब समझ सकती है. मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि उसकी चूत में तुम्हारे लंड के नाम की खुजली हो रही है.

मैं बोला- मगर भाभी, अभी उसने इस तरह की कोई बात नहीं की है.
वो बोली- तो तुम ही शुरूआत करके देख लो. अगर कुछ गड़बड़ हुई तो मैं अपने आप संभाल लूंगी.

मैंने वैसा ही किया.

रात को खाना खाने के बाद करीब 9 बजे सुमीना के व्हाट्सएप से मैसेज आया और हम दोनों बातें करने लगे.
मैं बोला- भाभी, आपका पति कैसा इन्सान है, वो तो आपका बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखता है.

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वो बोली- हां शुभम, मैं अपने पति से इतनी परेशान हूं कि मैं तुम्हें सारी बात बता भी नहीं सकती.
मैं बोला- मैं समझ सकता हूं भाभी.
फिर मैंने मजाक में बोला- फिर तो आपको सेक्स का सुख भी नहीं देता होगा वो?

उसने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया. उसने सीधा गुड नाइट बोल दिया और बात बंद कर दी.

मैंने सोचा कि पता नहीं इसे क्या हो गया. उसके कुछ देर के बाद फिर मैं शिवानी के पास गया. उसको मैंने सारी बता बताई जो भी सुमीना के साथ हुई.

शिवानी बोली- कोई बात नहीं, तुम कल फिर से उसके साथ बात करना. वो एकदम से अपने मुंह से चूत चुदाई करवाने की बात नहीं करेगी. तुम्हें उसको धीरे धीरे गर्म करना होगा.

फिर शिवानी के साथ मैंने खाया. उसके बाद वो बर्तन धोने के लिए चली गयी. वापस आई तो मैंने उसको बेड पर अपने पास खींच लिया. मैं उसको नीचे गिरा कर उसके होंठों को चूसने लगा. उसके बूब्स को दबाने लगा. वो भी मेरा साथ देने लगी.

15 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के साथ चूमा-चाटी में मशगूल रहे. उसके बाद हम दोनों ने कपड़े उतारे और मैं उसकी चूत चाटने लगा. कुछ ही देर में भाभी की चूत ने पानी छोड़ दिया और मैंने उसकी चूत चाटने का मजा लिया और सारा पानी पी लिया.

अब उसका मन भी करने लगा. उसने मुझे नीचे लिटा लिया और एक रंडी की तरह मेरे लंड को चूसने लगी. वो मेरे लंड को मुंह में लेकर लॉलीपॉप के जैसे चूस रही थी. कभी मेरे टोपे को दांतों से काट लेती थी. मुझे बहुत मजा दे रही थी साली.

पांच मिनट तक उसको लंड चुसवाने के बाद मैंने उसे नीचे बेड पर गिरा लिया. फिर उसकी टांगों को फैला कर उसकी चूत के ऊपर लंड को रख दिया. मैं सेक्सी चुदक्कड़ भाभी की चूत पर अपने लंड को रगड़ने लगा और वो एकदम से चुदासी हो गयी.

वो अपने होंठों को दांतों तले दबाने लगी. अपनी चूचियों को अपने हाथों से भींचने लगी. मैं समझ गया कि इसकी चूत अब और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकती है.

शिवानी सिसकारते हुए बोली- तुम ऐसा सोचो कि सुमीना तुम्हारे सामने नंगी लेटी हुई है और तुम्हारा लंड लेने के लिए तड़प रही है.
मैं बोला- नहीं, मैं आपको शिवानी समझ कर ही चोदूंगा. मैं शिवानी भाभी को ही प्यार करता हूं. अगर आपने फिर से सुमीना को बीच में लाने की कोशिश की तो मैं चला जाऊंगा.

वो बोली- ठीक है मेरे राजा, तो फिर अब और मत तड़पाओ मेरी चूत को, इसमें अपना लंड ठोक कर चोद दो इसे. अब ये और बर्दाश्त नहीं कर सकती है. इसको तुम्हारे लंड की बहुत तेज प्यास लगी है. इसकी प्यास को बुझाओ, जल्दी करो.. आह्ह … चोदो मुझे।

शिवानी की चुदास देख कर मैंने उसकी चूत में लंड पेल दिया. एक ही बार में लंड उसकी चूत में उतर गया और मैं उसकी चूत को पेलने लगा. शिवानी मदहोश होने लगी. मेरी स्पीड बढ़ती चली गयी. पच-पच की आवाज के साथ मैं उसकी चूत को ठोकने लगा.

भाभी की चूत में लंड इतना मजा दे रहा था. उसके मुंह से बहुत ही कामुक आवाजें निकल रही थीं- आह्ह … शुभम … आह्ह और जोर से! चोदो यार … आह्ह मजा आ रहा है. पूरा ठोक दो लंड को मेरी चूत में! मेरी चूत तुम्हारे लंड की दीवानी है. इसकी प्यास को मिटा दो, अपने लंड का प्यार बरसा दो इस पर।

भाभी को मैंने उठाया और घोड़ी बना लिया. उसकी गांड को थाम कर पीछे से उसकी चूत में लंड को पेल दिया. तेजी से मैं उसकी चूत में लंड के धक्के देने लगा. भाभी का सिर बेड के सिरहाने पर टकराने लगा. वो फिर भी कामुक आवाजें निकालते हुए चुदती रही.

इस पोज में लगभग 20 मिनट तक भाभी की चूत की चुदाई की और वो दो बार झड़ गयी थी. फिर मैंने भी अपने लंड का माल उसकी चूत में भर दिया. हम दोनों थक कर लेट गये. थोड़ी देर के बाद शिवानी भाभी ने फिर से मेरे सोये हुए लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.

पांच मिनट के अंदर ही फिर से मेरा लंड उसकी चूत फाड़ने के लिए तैयार हो गया. मैंने उसकी गांड में उंगली दे दी और अंदर बाहर करने लगा. बीच बीच में उसकी चूत में भी उंगली देकर उसको गर्म करने लगा मैं. वो फिर से लंड लेने के लिए प्यासी हो गयी.

उस रात मैंने शिवानी भाभी की चूत तीन बार चोद डाली. मैं बुरी तरह से थक गया. फिर वहीं पर सो गया. सुबह जल्दी ही फिर भाभी ने मुझे उठा दिया और मैं अपने रूम में आ गया. मुझे ऑफिस भी जाना था.

उसके बाद मैं फ्रेश हुआ और ऑफिस के लिए तैयार होने लगा. नाश्ता करके मैंने ऑफिस के कपड़े पहने और निकलने लगा. जाते हुए मेरी नजर सुमीना पर पड़ गयी. वो मुझे देख रही थी.

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