कभी कभी जीतने के लिए चुदना भी पड़ता है-2

कॉलेज गर्ल की नंगी चूत की कहानी का पिछला भाग: कभी कभी जीतने के लिए चुदना भी पड़ता है-1

मुझे मन में शक होने लगा कि सुनील मेरे साथ सेक्स करना चाहता है। उसने बोला- यार, मैं तुम्हें प्रतियोगिता जिताऊंगा, तुम मेरे साथ सेक्स कर लो, सेमीफाइनल जीतने के लिए अलग और फ़ाइनल जिताने के लिए अलग।

मेरे तो मानो कान सुन्न हो गए ये सुन के।
मैंने भड़क के कहा- दिमाग खराब है तुम्हारा, क्या बकवास कर रहे हो? अभी तुम्हारी कम्प्लेंट कर दूँगी तो जेल जाओगे सीधा।

सुनील ने बिना डरे कहा- मुझे जेल पहुंचा के तुम ट्रॉफी तो नहीं जीत पाओगी. पर हमारा कॉलेज तो जीतेगा ही। और वैसे भी मैं जो चीज़ मांग रहा हूँ, वो कभी खत्म नहीं होगी तुम्हारे पास से। अगर जीत गयी तो तुमसे सब खुश हो जाएंगे, सोचो तुम्हारे दोस्तो में, कॉलेज में, परिवार में कितनी इज्ज़त बढ़ जाएगी. सबको लगेगा की सुहानी कितनी होशियार है। सोच लो, वरना मैं तो जीतूँगा ही हर बार की तरह. वैसे भी एक बार हार जाता तो कोई खास फर्क नहीं पड़ता। अगर तुम्हारा मन बदले तो मुझे बता देना, वरना थैंक्स फॉर कॉफी!

और फिर सुनील उठ के चला गया मुझे कन्फ्यूज छोड़ के।

अब ज़िंदगी में कभी कभी हमें सही-गलत में से नहीं, सिर्फ हार-जीत में से किसी एक को चुनना पड़ता है।

मैंने तन्वी को फोन लगाया.
तो उसने मुझे सलाह दी- इसमें कोई बुराई नहीं है, जो भी होगा तुम दोनों के अलावा किसी को नहीं पता होगा। इसमें कोई इज्ज़त बेचने जैसी चीज़ नहीं है, बस लेन-देन की बात है। वरना तू हार ही तो जाएगी. सोच अगर तू जीत के आई तो तू और फ़ेमस हो जाएगी कॉलेज के टीचर्स की नज़र में! बाकी तेरी मर्ज़ी।

उस रात मैं यही सोच रही थी कि क्या करूँ।

मैंने रात को 1 बजे फैसला लिया और सुनील को फोन किया और हामी भर दी।
सुनील ने खुश होते हुए कहा- ठीक है तो कल सेमीफ़ाइनल है. उसके लिए तुम्हें अभी आना होगा चुदवाने।

मैंने कहा- नहीं, सेमीफिनल के बाद करूंगी।
सुनील ने कहा- नहीं सॉरी, या तो अभी … वरना मैं तो पढ़ ही रहा हूँ कल जीतने के लिए।

मैंने सोचा चुदवाना तो अब भी है और कल भी. तो क्या फर्क पड़ता है।
तो मैंने कहा- ठीक है, बताओ कहाँ आना है?
सुनील ने कहा- अपने रूम से निकलो और हॉस्टल के बेसमेंट के पास आ जाओ चुपचाप।

मैं चुपचाप सबकी नज़र बचा के वहाँ पहुँच गयी और सीढ़ियों के नीचे छुप के इंतज़ार करने लगी।

5 मिनट बाद सुनील भी स्टोर रूम की चाबी लेके आ गया।
मैंने कहा- चाबी कहाँ से मिली तुम्हें?
उसने बताया- मुझे पता था तुम जरूर मान जाओगी, इसलिए गार्ड रूम से पहले ही चुरा ली थी. वैसे भी ये पुराना वाला स्टोर रूम है, महीनों महीनों में खुलता है. और इतनी नीचे गार्ड भी चक्कर लगाने नहीं आते।

उसने ताला खोला और हम दोनों अंदर चले गए।

क्यूँकि स्टोर रूम बेसमेंट में था और बंद था इसलिए धूल वूल तो थी नहीं. वहाँ टूटी कुर्सियाँ, मेज, पुराने गद्दे, अलमारी वगैरह पड़े थे।

मैं सोच रही थी ‘वाह सुहानी, आज यहाँ भी चुदवाने को आ गयी. लगता है बहुत आगे जाएगी।’

इतने में सुनील ने कहा- मेरी मदद करो इन गद्दों को फर्श पे डालने में. और अब शरमाना छोड़ दो, चुदोगी तो जीतोगी भी।

अब लड्डू मर्ज़ी से खाओ या बिना मर्ज़ी के! लगता तो मीठा ही है.
तो मैं हल्के से मुस्कुराई और उसकी मदद करने लगी।

हम दोनों ने 3-4 मोटे मोटे गद्दे रख के अस्थायी बेड बना दिया. उसपे दीवारों के पर्दे चादर की तरह बिछा दिये।

मैं अब भी हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी, शायद सेक्स करने की खुशी हो रही थी अंदर ही अंदर।

सुनील ने कहा- तुम मुस्कुराते हुए बहुत प्यारी लगती हो, हमेशा स्माइल करते रहा करो।
मैंने कहा- ठीक है.
और मुस्कुराने लगी।

सुनील ने पूछा- तुमने पहले सेक्स तो किया हुआ ही है, इतनी खिल रही हो, इतनी खूबसूरत हो, बिना सेक्स के तो नहीं हो सकता. और वैसे भी आज कल खूबसूरत लड़कियों को कौन सही सलामत छोड़ता है।

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उसके जवाब में मैंने हाँ में सिर हिला दिया और चप्पल उतार के गद्दे पे बैठ गयी।

भले ही वो मेरा बॉयफ्रेंड ना हो पर ऐसे हालात में मन तो करने ही लगता है।

सुनील ने कहा- चलो शुरू करते हैं.
तो मैंने कहा- हम्म… ठीक है।

सुनील ने मेरे दोनों हाथ पकड़े और मुझे खड़ा करके अपने पास ले गया।

उसने अपने हाथ को मेरे सिर के पीछे ले जा के मेरे जूड़े का क्लचर खोल दिया और मेरे बाल झूलते हुए खुल गए।

मैं मुस्कुराती हुई नीचे देखने लगी तो साइड से थोड़े से बाल आगे भी आ गए।

सुनील तो मानो मुझे ऐसे देख के पिघला ही जा रहा था. वो कुछ देर तक तो मानो मुझे चुपचाप देखता ही रहा और ख्यालों में कहीं खो गया।

मैं सोचने लगी क्या हुआ, आगे क्यूँ नहीं बढ़ रहा?
तो सिर उठा के देखा तो वो मुझे देखता हुआ पता नहीं क्या सोच रहा था।

मैंने दबी हुई सी आवाज में पूछा- क्या हुआ?
तो वो वापस होश में आया और बोला- कुछ नहीं, तुम्हारी खूबसूरत और मासूमियत पे फिसल गया।

मैंने कहा- फिसलने से कोई फायदा नहीं है. तुम प्यार व्यार में मत पड़ जाना. मैं तुम्हें बॉयफ्रेंड नहीं बनाऊँगी, क्योंकि मेरा है पहले से ही।
सुनील ने कहा- पता नहीं साले को कैसे मिल गयी तुम, खैर जाने दो, आज उसकी मोहब्बत को मैं चोदूँगा पूरी रात।

इतना कह के उसने ज़बरदस्ती अपने होंठ मेरे नर्म गुलाबी होंठों पे रख के ज़ोर से दबा दिये. वो मुझे धकेल के दीवार से सटा के ज़बरदस्त किस करने लगा।
शुरू में तो मैं भी हल्का सा विरोध सा कर रही थी. मैं उनहह… उन्नहह… करते हुए उसे धकेलने की कोशिश कर रही थी. पर फिर धीरे धीरे वासना में डूबने लगी तो विरोध बंद कर दिया और उसका साथ देने लगी।

सुनील पागलों की तरह मेरे नर्म होंठों को चूसे जा रहा था, मैं भी अब उसका साथ दे रही थी।
पूरे स्टोर रूम में पुच्छह … पुच्छह … पुच्छ … उम्महह … हम्म … की हल्की हल्की आवाजें आ रही थी।

उस वक़्त उसने लगभग दो ढाई मिनट तक तो किस ही किया.
और जब हटा तो बोला- क्या बात है सुहानी, तुम तो बहुत अच्छा किस करती हो।

मैंने कहा- तो तुमने क्या समझा है मुझे कि मुझे कुछ नहीं आता? इस सब में मुझे तुमसे ज्यादा अनुभव है.
और फिर ज़बरदस्ती मैं उससे चिपक गयी और किस करने लगी उसके होंठों को।

अब हम दोनों ही गर्म होने लगे थे। उसका लंड पैंट में खड़ा होने लगा था. और मुझमें भी चुदवाने की जबरदस्त इच्छा जाग चुकी थी।

मैं उसे चूम रही थी. वह अपने हाथ मेरी टीशर्ट पे रख के मेरे बूब्स को भींच रहा था. जिससे मेरी उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी।

फिर जैसे ही मैं किस कर के हटी, उसने मेरी टी शर्ट को ऊपर को उठा के निकाल दिया. मैं ऊपर से अर्धनग्न अवस्था में आ गयी।
मेरी काली ब्रा में फंसे मेरे बूब्स आज़ाद होने के लिए तड़प रहे थे।

मैंने भी जोश जोश में अपनी पीठ पे हाथ ले जा के हुक खोल दिये और ब्रा उतार फेंकी।
ब्रा उतरते ही मेरे गोरे और मोटे मोटे बूब फूल के आज़ाद हो गए।

सुनील उन्हें हैरानी से देखने लगा पहले तो … पर फिर तुरंत ही उन पे टूट पड़ा और बेदर्दी से भींचने लगा। मैं भी अब वासना में डूबते हुए और तेज़ तेज़ सीई … सी … सिसकारियाँ लेने लगी. और लंबी लंबी आहें भरने लगी।

वो कभी कभी मेरे निप्पल यानि चुचूक को भी मसल दे रहा था. जिससे मेरी ज़ोर की सीईई… निकल जा रही थी।

मैं अभी अपना हाथ उसके पाजामे पे फिरा रही थी और उसके लंड को उकसा रही थी।

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फिर उसने तुरंत ही अपने सारे कपड़े उतार दिये. वो अपनी छाती मेरी छाती से चिपका के हमारे जिस्म रगड़ने लगा। मुझे इससे बहुत मजा आ रहा था. उसका लंड मेरी लोअर में छुपी चूत पे रगड़ कर रहा था और उसमें गीलापन आता चला गया।

अब मैंने भी देर ना करते हुए अपनी लोअर पैंटी सहित उतार दी और उसके सामने नंगी हो गयी बिल्कुल। मेरी चिकनी नंगी चूत नुमाया हो गयी.

हम अब भी दीवार से सटे हुए ही थे और एक दूसरे के बदन को चूम रहे थे। वो चूमते चूमते मेरी नंगी चूत पे आ गया. उसने मेरी चिकनी चूत को पहले सूंघा और फिर किस करने लगा पागलों की तरह।
मैं दीवार में सिर गड़ाए उम्महह … उम्मह … उम्हह … उमम्ह … करती हुई उस पल का भरपूर आनंद लेने लगी।

उसकी जीभ के स्पर्श में मेरी चिकनी नंगी चूत में खलबली मची थी. चिकनी चूत चाटने का मजा आ रहा था और उसने गीला होने भी शुरू कर दिया था।

मैं वासना में खोयी हुई आँखें बंद किए और ऊपर सिर किए उसका नाम भी भूल गयी. मैं उसे करन बुलाते हुए बोलने लगी- आहह … करन और चाटो मेरी चिकनी नंगी चूत. आहह … करन … प्लीज करन … आहह।

सुनील एक पल के लिए रुका और बोला- चाट तो रहा हूँ! और हाँ, करन नहीं सुनील बोलो ना प्लीज! मुझे और जोश आयेगा। चिकनी चूत चाटने का मजा ही कुछ और है!
मेरा ध्यान टूटा और मैंने मुस्कुराते हुए कहा- ओह सॉरी सुनील … और फिर बस उमम्ह सुनील … उम्महह … प्लीज. सुनील … आहह … लव यू बेबी … आहह।

मेरी नंगी चूत इतनी गीली हो चुकी थी कि सुनील का मुंह भी गीला हो चुका था। उसने अपने होंठों को हाथ से पौंछा और हट गया और खड़ा हो गया।

मैं अपने होश में आयी और पूछा- क्या हुआ?
तो उसने बोला- अब तुम भी तो मुझे खुश कर दो, ये लो!
और उसने अपना लंड मेरी तरफ बढ़ा दिया।

अब तक तो मुझे इतना अनुभव हो ही चुका है कि आगे क्या करना था, पता था।

मैं पालथी मार के फर्श पे ही बैठ उसकी टाँगों के बीच और लंड को किस करने लगी धीरे धीरे। मैंने ऊपर को देखा तो सुनील की आँखें बंद हो गयी थी आनंद में।
मैंने अपने कोमल हाथों से उसके लंड की खाल पीछे सरका दी और लिंगमुंड को बाहर निकाल लिया. मैंने देखा कि वो फड़फड़ा रहा था।

अब मैंने सिर्फ लिंगमुंड को अपने बंद होंठों पे रखा और धीरे धीरे से अपने होंठों पे दबाते हुए मुंह खोलते हुए अंदर ले गयी।

सुनील ने तो बस आह … करी और मैंने उसका लंड बाहर निकाल दिया।

मैंने उसकी सिसकरी सुनी तो ऊपर देखा. उसे बहुत मजा आ रहा था और मेरे चेहरे पे भी मुस्कुराहट आ गयी ये देख के।

अब मैंने देर करना उचित नहीं समझा क्योंकि मेरे अंदर भी सेक्स यानि चुदाई की जबर्दस्त इच्छा जाग चुकी थी।
इसलिए मैं गुप्प … गुप्प … उसका लंड मुंह में अंदर बाहर करते हुए चूसने लगी.
और सुनील भी उम्महह… उमह्ह… उमम्ह… उमम्ह… करता हुआ मजे ले ले के लंड चुसवाता रहा।

करीब 3 – 4 मिनट तक मैंने उसका लंड चूसा. और फिर ऊपर देख के कहा- अब तो ठीक है ना? चुदाई शुरू करें?
सुनील ने कहा- लगता है बहुत सेक्स है तुम्हारे अंदर? जो इतनी आग लगी हुई है।

मैंने कहा- सब में होता है. तुम ज्ञान मत दो बस चोदना शुरू करो।
सुनील ने कहा- ठीक है जानेमन, आओ ऊपर आओ.

तो मैं अपनी चिकनी नंगी चूत लेकर खड़ी हो गयी उसके सामने।

आपकी सुहानी चौधरी
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