चिकनी चाची के साथ मस्ती- 1

मेरी वासना की कहानी मेरी चाची के साथ दोस्ती और फिर उनके जिस्म के प्रति आकर्षण की. मुझे मेरी चाची बहुत हॉट माल लगती थीं.

दोस्तो, मेरी वासना की कहानी उन दिनों की है, जब मैं जवानी की फिसलन भरी उम्र में आया ही था … मतलब 19 साल का हुआ था.
बारहवीं के इम्तिहान सर पर थे और मैं पढ़ाई के लिए गांव से शहर जाता था.

बारहवीं में बोर्ड के एग्जाम का डर इतना ज्यादा था कि अभी महीने बचे होने के बावजूद घबराहट होती थी.
वैसे तो दिमाग में चंचलता भी बहुत ज्यादा थी. मगर जब किताब सामने आती थी तो फूंक सरक जाती थी. सारी चंचलता हवा हो जाती थी.

दोस्तों के साथ रह कर मैं मास्टरबेटशन के बारे में बहुत कुछ जान चुका था और इन्सेस्ट के बारे में भी काफी कुछ जान चुका था.
इन्सेस्ट वाली बात ने मेरे दिमाग़ पर बहुत गहरा असर किया था.

मैंने अन्तर्वासना पर परिवार के सदस्यों के साथ सेक्स की बहुत सारी कहानियां पढ़ी थीं.
काफी बार उन कहानियों को पढ़ कर मैंने लंड हिला कर रस टपकाया था और अब भी ये मेरा पसंदीदा शगल है.

जब मैं शहर से पढ़ कर वापस आता था तो खाना खाकर अपने कमरे में जाकर सो जाता था. फिर शाम को 5 बजे चाय पीने के लिए कमरे से बाहर आता था. तो उस समय मेरी चाची वहां रहती थीं.

मेरी और चाची की बहुत अच्छी बनती थी. हम दोनों आपस में बहुत सारी बातें करते थे. मैं कमरे से बाहर आता तो हमेशा चाची के साथ बना रहता था.

मुझे मेरी चाची बहुत हॉट माल लगती थीं. उनकी उम्र भी चाचा से दस साल कम थी.

मेरी नज़रें चाची के मम्मों पर टिकी रहती थीं. उनके चूचे बहुत बड़े बड़े थे … शायद 36 साइज़ के थे.

चूंकि चाची साड़ी पहनती थीं तो मम्मे बड़े होने के कारण उनका पल्लू ज़्यादा देर तक ऊपर नहीं रह पाता था. इसीलिए चाची मेरे सामने अपने पल्लू को सम्भालने में ज्यादा ध्यान नहीं देती थीं.
इससे मुझे चाची के गहरे गले के ब्लाउज में से उनके मम्मों की दूधिया घाटी देखने का मौक़ा मिल जाता था.
मैं उन दिनों चाची के मम्मे देख कर बहुत ज्यादा लंड हिलाने लगा था.

कुछ दिनों बाद मुझे एक तरकीब सूझी.

मैं अपनी टांग में दर्द का कारण बता कर चाची से मालिश करवाने लगा.

मालिश के वक्त मैं सिर्फ़ अंडरवियर में रहता था और चाची के हाथों से अपनी टांगों की मालिश करवा लेता था.

जब चाची मेरी जांघों तक मालिश करतीं तो उनके बड़े बड़े दूध देखने से मेरा लंड चड्डी में खड़ा होने लगता था.
चाची भी कनखियों से मेरे लंड को फूलता देख कर हंस देती थीं.

कुछ दिन ऐसे ही बीते … हफ्ते में तीन चार बार चाची से मालिश करवाना और बस उनके मम्मे देख कर लंड हिलाना मेरा प्रिय खेल बन गया था.

जब उन्हें मेरी इस नज़र के बारे में पता चला तो पहले तो वो नज़रअंदाज़ करने लगीं पर बाद में चाची ने अपने पल्लू को पिन लगाना चालू कर दिया.

ऐसे दिन बीतते गए.

मेरे इम्तिहान आ गए और इम्तिहान के बाद मैं छुट्टियां भी अच्छे से गुज़र गईं पर उस वक्त चाची को लेकर कुछ ज़्यादा हलचल नहीं हुई.

फिर मेरा एडमिशन कॉलेज में हो गया. मैं कॉलेज जाने लगा और चाची के साथ कुछ नहीं कर पाया.

जब मैं छुट्टियों में घर वापस आया तो चाची जी एक महीने के लिए गांव से बाहर गए हुए थे.
मैं चाची के साथ उनके कमरे में सोने लगा.

पहले पहल तो मैंने अपना पुराना रुटीन आजमाया, पर चाची की तरफ से कोई सकारात्मक भाव नहीं था.
इस बात से मैं उदास हो गया मगर ‘हारिए न हिम्मत बिसारिए न राम …’ वाला सूक्त याद किया और हिम्मत करके एक रात को चाची से बात की.

मैं- चाची, मुझे ग़लत मत समझना.
चाची- क्या हुआ बेटा?

मैं- मैं जो हमेशा देखता हूँ.
चाची- क्या देखते हो?

मैंने उनके मम्मों की तरफ देखते हुए उन्हें बताने की कोशिश की.

मैं- इन्हें … प्लीज़ चाची मुझे माफ़ कर दो.

मैंने चाची के पैर पकड़ कर उनसे माफी मांगी.

चाची- अरे ये क्या कर रहे हो बेटा, कोई बात नहीं … ये सब रहने दो.
मैं- चाची प्लीज़ आप किसी को बोलना मत.

चाची- नहीं बेटा नहीं, पर ये जो तुम देखते थे ना, वो ग़लत था. तुम्हें पता होना चाहिए.
मैं- चाची, हां प्लीज़ माफ़ कर दो. मैं एक बात बोलूं चाची?

चाची- क्या?
मैं- चाची मुझे ऐसा लगता था कि आपके इनमें दूध होता है.

चाची को पता था कि मुझे दूध पीना बहुत पसंद था.

तो चाची ने हंस कर कहा- नहीं, इनमें हर वक्त दूध नहीं होता है. वो तो सिर्फ तब ही होता है, जब बच्चा दुधमुँहा होता है.
मैं- सॉरी चाची.

चाची- अरे ठीक है, कोई बात नहीं. अब बाद में भी यूं देखना मत … ठीक है!
मैं- हां ठीक है चाची.

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उसी वक्त चेयर पर बैठते वक्त मेरे लंड के बॉल्स दब गए और बहुत दर्द करने लगे. मेरा मुँह तो रोने जैसा हो गया.

चाची- क्या हुआ बेटा!
मैं दबी हुई और दर्द भरी आवाज़ में कराहता हुआ बोला- कुछ नहीं चाची.

चाची- कुछ तो हुआ है, क्या हुआ … बता न.
मैं- ज़्यादा कुछ नहीं चाची, जाने दो.

चाची जरा गुस्सा करती हुई बोलीं- चुपचाप बता … क्या हुआ है?
मैंने इशारा करते हुए बताया- चाची वो मेरे गोले दब गए तो बहुत दर्द कर रहे हैं.

चाची- हे भगवान कैसे?
मैं- ज़्यादा कुछ नहीं हुआ, चाची क्रिकेट खेलते वक्त बहुत बार उधर गेंद लग चुकी है, इसलिए अब जरा सा भी दबने से दर्द होने लगता है.

चाची- डॉक्टर के पास जाना है क्या?
मैं- अरे नहीं चाची … बस थोड़ी जंप वगैरह मारूँगा … तो सब ठीक हो जाएगा.

चाची- मैं कुछ कर सकती हूँ क्या?
मैं- नहीं चाची … ज्यादा कुछ नहीं हुआ.

चाची- मालिश कर दूँ क्या?
मैं- अरे नहीं चाची, रहने दो.

चाची हंसती हुई बोलीं- कमाल है, आज तक मैं मालिश न करने के बहाने बनाती थी और आज तू मना कर रहा है … क्या बात है?
मैं- अरे चाची क्यों मज़े ले रही हो … पहले ही मेरी हालत बहुत पतली हो गयी है.

चाची- अरे बेटा, मैंने तो ऐसे ही कुछ मज़ाक किया था बस.
मैं- मुझे एक मिनट के लिए तो लगा कि आप सच में मेरे उधर मालिश कर दोगी.

चाची- चल हट … पागलों की तरह कुछ भी मत बोल देता है.
मैं हंसा- सॉरी चाची, रियली सॉरी.

मैं उनके पैर पड़ने के लिए झुका, तो और दर्द हो गया और मेरी आंख से पानी आ गया- सॉरी चाची!
चाची- अरे हर बार पैर क्यों पकड़ रहा है … कोई बात नहीं है. जा बाहर, हॉल में जाकर टीवी देख.

मैं बाहर आ गया और जंपिंग की. थोड़ी देर घूमा और इसके बाद टीवी देखने बैठ गया.
बाद में खाना खाकर सब सोने चले गए.

रात तकरीबन एक बजे के आस पास मेरी आंखें खुलीं.
चाची मेरे बाजू में ही सोती थीं.
मैंने उन्हें गहरी नींद में सोते हुए देखा तो मैं थोड़ा ऊपर को खिसक गया था.

अब मेरा लंड लगभग चाची के हाथ से पास आ रहा था.

मैंने एक पल सोचा और उसी तरफ को करवट ले ली. इससे मेरा लौड़ा चाची के हाथ से हल्का सा टच हो गया.
जैसे ही उनके हाथ से मेरा लंड टच हुआ, मेरी पूरी बॉडी में मानो करेंट सा आ गया और लंड एकदम से कड़क हो गया.

तब पता नहीं नींद में … या जान बूझकर पर थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरे लंड को हाथ में पकड़ लिया.

आह ये सब इतना गजब महसूस हुआ कि उधर ही मेरा सब माल निकल गया और मैं करवट बदल कर सो गया.

बाद में कुछ ज़्यादा ख़ास दिन नहीं गुज़रे, ऐसे ही बीत गए.

चाची से सब कुछ बता देने के बाद से मैंने भी उनके मम्मों को देखना बंद कर दिया था.

थोड़ा समय और बीत गया.

अब मैं फिर से चाची के मम्मों को नजरें चुरा कर देखने लगा था; मैं पहले जैसा माहौल भी बनाने लगा था.

अब मैं चाची के साथ पहले जैसा टाइम बिताने लगा, उनसे बातें करने लगा.

उन्हीं दिनों फिर से गर्मी की छुट्टियां आ गईं.

एक दिन हम दोनों यूट्यूब पर वीडियो देख रहे था. मैं उनके पीछे से देख रहा था और मैंने पीछे से ही उनके कंधे पर सर रखा था.
सामने वीडियो चल रहा था, पर मैं उनके कान के साथ खेल रहा था, उनके कानों को उंगलियों से छेड़ रहा था.

मुझे भी उनकी भारी होती सांसें सुनाई दे रही थीं. धीरे धीरे चाची की सांसें थोड़ी तेज़ हो गयी थीं.
कुछ देर बाद मुझे पता नहीं क्या हुआ, मैं पीछे से हट गया और चला गया.

मेरे दिमाग़ में अब बार बार एक ही बात आ रही थी कि चाची की सांसें तेज़ क्यों चल रही थीं.
मन में आने लगा था कि क्या चाची को मुझमें कुछ उम्मीद दिखने लगी थी.

चाची अभी भी मोबाइल में वीडियो देख रही थीं.
मैं छिप कर उनकी हरकतों को देखने लगा.

कुछ पल बाद चाची उठकर बाथरूम में चली गईं तो मैं भी उनके पीछे चला गया.

मैं बाथरूम के बाहर दरवाजे के बाजू खड़ा हो गया और कान लगा कर अन्दर की आवाजों को सुनने लगा.

अन्दर की कामुक आवाजों को सुनते ही मेरा हाथ अपने आप लंड पर आ गया और मैं लंड हिलाने लगा.

मुझे अन्दर की आवाजों से साफ़ समझ आ रहा था कि चाची चुत में कुछ डालकर मजा ले रही हैं, मस्त आवाजें आ रही थीं.

दस मिनट बाद जब चाची बाहर आ गईं.
तब मैं उनके पास आ गया.

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उनका चेहरा कुछ अलग ही बात बयान कर रहा था … चेहरे के हाव-भाव बदले हुए थे.

मैंने चाची से नॉर्मल बात करते हुए उनसे चाय की मांग की और कुर्सी पर बैठ गया.

चाची ने चाय बना कर मुझे दी और चाय देते समय दूध भी दिखा दिए.
उन्होंने इस बात पर ध्यान दिया था कि मैं उनकी चुचियों को देख रहा हूँ या नहीं … मगर मैंने उनकी चूचियों को एक पल देखा और नजरें हटा लीं.

चाची कुछ नहीं बोलीं और मैं भी चाय पीकर बाहर चला गया.

दूसरे दिन दोपहर के 12 बजे के आस पास मुझे बेड पर उनकी ब्रा रखी दिखी.
मैं खुद पर कंट्रोल ही नहीं कर पाया और मैंने ब्रा उठा कर देखा.
उसमें उनकी चूचियों का साइज़ 36 डी लिखा था.
मुझे अन्दर से ख़ुशी हुई कि मैंने उनकी चूचियों को आंखों से सही नापा था.

मैंने चाची की 36 डी साइज़ की चूचियों को याद करके मुठ मारना शुरू कर दी.
कुछ देर में चाची की ब्रा में ही लंड का सारा माल गिरा दिया.

थोड़ी देर बाद वो नहा कर आ गईं.
उस दिन बहुत काम था तो वे देर से नहायी थी.
नहाने बाद वो ब्रा पहनने लगी तो वो उन को कुछ गीला सा लगा. चाची उसे सूंघ कर हल्के से मुस्कुरा दीं और ब्रा को पहन लिया.

अब चाची की मेरी तरफ देखने की नज़र बदल गयी थी.

मेरे दिमाग में अभी भी चाची की ब्रा चल रही थी कि उनकी चूचियों पर मेरे लंड का माल लगा है.
मुझे अपने ख्यालों में उनके चूचों में ऊपर से गीलेपन का दाग दिखते महसूस हो रहे थे.
मैं वो स्लोगन सोच कर मन ही मन मुस्कुराने लगा कि दाग अच्छे होते हैं.

मैं लेट गया और आंखें बंद कर लीं. मेरा दिमाग कुछ सोचने लगा कि घर पर मेहमान आ चुके थे, चाची उनके लिए खाना बना रही थी.

तभी अचानक बाहर से कुछ गिरने की तेज आवाज़ आई.
सब लोग दौड़ कर बाहर देखने गए.

उधर देखा तो एक बड़े ट्रालर में लोहा गिराया गया था.

मैं भी वहां चला गया था और चाची मेरे ठीक बगल में खड़ी थीं.

अचानक से चाची ने मेरे लंड को पकड़ लिया और थोड़ा हिला कर उसमें करेंट डाल दिया.

बाद में जब सब खाना खा रहे थे, तब चाची बाथरूम की तरफ गईं.
मैं पहले से ही बाथरूम में था. वो अन्दर आईं तो मैं उनके मम्मों को दबाने लगा.

चाची सिहर उठीं और बोलीं- अरे अभी नहीं … बाद में, अभी मेहमान हैं.
मैं- कोई बात नहीं चाची बस 5 मिनट के लिए दबा लेने दो.
चाची- ठीक है, जल्दी करो.

मैंने वैसे ही चाची के मम्मों को मसलना चालू रखा.
फिर अपना एक हाथ चाची की चुत पर ले गया और ऊपर से सहलाने लगा.

वो भी कंट्रोल नहीं कर पाईं और अपना एक हाथ मेरे लंड पर ले गईं. दूसरे हाथ से मेरा हाथ अपनी चुत पर दबाने लगीं.

मैंने ज़्यादा समय ना लेते हुए बैठते हुए चाची की साड़ी पेटीकोट के अन्दर अपना मुँह ले गया और उनकी रस टपकाती चुत में उंगली से दाने को मसलने लगा और खेलने लगा.

अपनी टांगें फैला कर चाची ने मेरे सर को अपनी चुत पर दबाया तो मैं चुत पर थूक लगा कर चाटने लगा, जीभ अन्दर डालने लगा, उनकी क्लिट से खेलने लगा.

चाची की आवाज़ ज्यादा ना निकले इसलिए उन्होंने अपने हाथ को अपने मुँह पर लगा लिया था.
फिर हल्की सी आवाज़ आई और चाची ने चुत का बांध खोल दिया.
चुत का रस टपक कर मेरे मुँह में समाने लगा; मैंने पूरा रस चाट लिया और चाची की चुत साफ़ कर दी.

फिर उनकी साड़ी से बाहर आकर मैंने उन्हें किस किया.

उन्होंने अपना हाथ नीचे किया और मेरा लंड बाहर निकाल कर हिलाना शुरू कर दिया.

जैसे ही चाची मेरे लंड को अपने मुँह में लेने वाली थीं कि मेरा माल निकल गया.

उसी समय चाची चिल्लाईं- इतनी देर तक कौन सोता है … उठ जाओ केदार!

मेरा सपना टूट गया और मेरी आंख खुल गयी.
मेरा लंड खड़ा था और पूरा माल निकल चुका था.
मेरा बॉक्सर गीला हुआ पड़ा था. चाची की नज़र वहां से हट ही नहीं रही थी.

दोस्तो, मेरी चाची की कामुक नजरों को देख कर मैं एकदम से शर्मा गया और चादर को अपने बॉक्सर पर ओढ़ने लगा.

चाची ने चादर खींची और बोलीं- अब चादर भी गीली करेगा. चल उठ जल्दी!

देसी चाची सेक्स कहानी के अगले भाग में मैं बताऊंगा कि चाची के साथ मेरी मस्ती किस तरह से आगे बढ़ी और मामला लंड चुत की सीमा तक पहुंच गया.

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मेरी वासना की कहानी का अगला भाग: चिकनी चाची के साथ मस्ती- 2