चिकनी चाची के साथ मस्ती- 2

मैंने चाची के पेटीकोट में सर घुसा दिया और चुत चाटने लगा. चाची आंह आंह करती हुई मेरा सर दबा रही थीं और मैं अपनी जीभ से चुत चटाई कर रहा था.

दोस्तो, मैं केदार एक बार पुनः आप सभी की सेवा में हाजिर हूँ.

कहानी के पिछले हिस्से
चिकनी चाची के बदन को पाने की चाहत
में आपने जाना कि मैं अपनी चाची के साथ सेक्सी सपना देख रहा था, तभी मेरे लंड ने रस छोड़ दिया था.
उसी समय चाची ने मुझे हिला कर जगा दिया.

अब आगे :

चाची मेरी तरफ देखती हुई बोलीं- उठ बेटा केदार, कब तक सोता रहेगा?
मैं- ओह चाची … मैं कल देर से सोया था और …

चाची- और क्या!
मैं- मुझे सपना आ रहा था चाची.

चाची- अच्छा क्या सपना आ रहा था!
मैं- ऐसा कुछ खास नहीं, पर अच्छा था.
चाची- हम्म, कितना अच्छा था … वो साफ़ दिख रहा है.
वे मेरे बॉक्सर के गीलेपन की तरफ नज़र फेरती हुई बोलीं.

मैं शर्माते हुए और नज़र छिपाते हुए बोला- चलो चाची, मेरी चाय बना दो.
चाची- हां चल उठ जल्दी से … बहुत देर हो गयी है.

मैं- आप चलो, मैं फ्रेश होकर अभी आया.

फ्रेश होकर मैं चाय पीने आ गया. मैंने बॉक्सर अभी भी वही पहना हुआ था.

चाची- अरे तूने बॉक्सर नहीं बदला!
मैं ग़लती से बोल गया- बिना नहाए क्यों बदलूं … नहाते वक्त बदल लूँगा ना!

चाची- अरे तुम पागल हो क्या?
मैं- चाची आप ऐसे क्यों बात कर रही हो.

चाची- तू सच में नहीं जानता क्या?

मैं भ्रमपूर्ण नजरों से उन्हें देखने लगा.

चाची- अरे वहां सफेद दाग दिख रहा है और वो अभी भी गीला है.
मैं- अरे ये चाची … अच्छा इसके बारे में बात कर रही थीं, मैं अभी नहाने जा रहा हूँ और इसे धोने डाल दूँगा.

चाची- नहीं, मुझे देना … मैं धो दूँगी … आज तेरी बहन कपड़े धोने वाली है.
मैं- अच्छा आपको दे दूँगा.

फिर चाय पीने के बाद चाची बोलीं- अब दे दे.
मैं- अभी यहां?

चाची- हां, यहीं दे दे.
मैं- ठीक है लो.
मैंने एक तौलिया को लपेट लिया और बॉक्सर देकर वहां से निकल गया.

दूसरे दिन चाची को बाइक पर बिठा कर उनके पिताजी के गांव ले जाना था.
हम दोनों सुबह सुबह ही निकल गए.

बाइक पर बैठी चाची ने सपने के बारे में पूछा, तो मैंने हिम्मत करके उन्हें साफ़ साफ़ बता दिया.
चाची चुप रहीं.

तो मैंने उन्हें कहा- अरे चाची, वो नाइटफॉल हुआ था.
चाची- वो क्या होता है?

मैं- चाची, सपने में आप कुछ ऐसा देखते हो कि आपका माल निकल जाता है … और ऐसा तब होता है, जब बहुत दिनों से मास्टरबेटशन नहीं किया होता है.
चाची- अब ये मास्टरबेशन क्या है?

मैं- ओहो … चाची ये मैं कैसे बताऊं?
चाची- वैसे ही, जैसे मैंने तेरा गीलापन देखा था.

मैं- चाची ये वही सब होता है. बस मास्टरबेशन में हाथ का इस्तेमाल होता है. उसे हाथ से हिलाते हैं.
चाची- अच्छा अच्छा समझ गई … ज्यादा विस्तार से न बता.

मैं- सॉरी चाची, मैं कुछ ज़्यादा ही बोल गया.
चाची- अरे केदार ऐसा कुछ नहीं है. ये तो मैं ही पूछ रही थी ना, तभी तो तुमने बताया.

मैं- चाची एक बात बोलूं?
चाची- बोलो.

मैं- चाची मेरे सपने में आप थीं.
चाची- अच्छा वाहह … कहां थी?

मैं- अरे ऐसे ही हाथ से कर रही थीं … बस्स …
चाची- एक बात बता, सच बोलना.

मैं- चाची ज़रूर पूछिए तो सही.
चाची- क्या वो गीलापन मेरी वजह से था?
मैं- सच कहूँ तो हां चाची जी, प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिए.

चाची- अरे इसमें माफ़ी का क्या है, सब के साथ ऐसा होता होगा. सपना था, इसमें तेरी थोड़ी कोई ग़लती है.
मैं- हां.

चाची- और एक बात बता, मेरी ब्रा में भी गिराया था ना तूने!
मैं- सॉरी चाची जी.

चाची- बाइक रोक दे.
मैं- सॉरी रियली सॉरी चाची जी, माफ़ कीजिए.

चाची- अरे पागल, बाइक रोक … मुझे जोर से लगी है. यहां पास में तालाब भी है, चाहे तो तू तब तक चक्कर लगा आ.
मैं- अरे … अच्छा ठीक चाची जी.

चाची जी ने थैला हाथ में पकड़ा हुआ था … वो उसे अपने साथ ही ले गईं.

मैं चाची को छोड़ कर तालाब की तरफ निकल गया.

कुछ देर बाद चाची की आवाज़ आयी- केदार, यहां आ जल्दी से!

मैं वहां गया, तो वो झाड़ियों के पीछे एक पेड़ का सहारा लेकर खड़ी थीं. उनके चेहरे पर दर्द के भाव थे.

मैंने पूछा- चाची क्या हुआ?

अचानक से उन्होंने अपनी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर कर दिया और बोली- देख मुझे मधुमक्खी ने काट लिया है मेरी जांघ पर … तू ज़रा डंक निकाल दे.

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मैंने देखा कि चाची की गोरी जांघ पर लाल रंग का एक गोल चकत्ता बन गया था जिसके बीच में मधुमक्खी का डंक दिख रहा था.

मैं जल्दी से नीचे बैठा तो ने पैंटी नहीं पहनी हुई है और उनकी चूत पर छोटे छोटे बाल थे.
मेरे लंड ने अंगड़ाई सी ली.

तभी मैंने अपने नाखूनों से डंक खींच कर निकाल दिया.

फिर मैंने बाइक के पास जाकर पानी की बोतल निकाली. उस बोतल का पानी ठंडा था, मैंने अपने हाथ से चाची को थोड़ा पानी पिलाया और पानी से मधुमक्खी के काटे के स्थान को धोया.
ठंडे पानी से चाची को आराम मिला.

चाची- आह केदार, थोड़ा चैन पड़ा है.
मैं- अरे चाची, चलो अब जल्दी से चलते हैं.

चाची- पर तू पहले ज़रा मधुमक्खी का जहर चूस कर निकाल दे!
मैं हैरान हो गया चाची की इस बात से … फिर भी मैंने अपने होंठ चाची की जांघ पर लगा दिए और उसे चूसने लगा.
लेकिन मेरा मानना था कि ऐसे चूसने से कोई लाभ नहीं होने वाला था. पर मैं लगा रहा, मुझे बहुत मजा आ रहा था.

चाची की चूत की गंध भी मेरे नाक में चढ़ी जा रही थी जिससे मेरी उत्तेजना बढ़ रही थी.
मेरा लंड अकड़ कर खड़ा हो चुका था.

मैं चाची के चूतड़ पकड़ पर उनकी जाँघों को चाट रहा था.
चाची भी मधुमक्खी के काटे का दर्द भूल कर मेरी हरकतों का मजा ले रही थी शायद! वो सिसकारियां भर रही थी.

वासना के वशीभूत मैं अपनी उंगली उनके चूतड़ों की दरार में फिराने लगा. मेरी उंगली ने उनकी गांड के छेद को छुआ तो मैं उस छेद को सहलाने लगा.

तभी जैसे चाची को होश आया, वो खुद को मुझसे छुड़ा कर बोली- चलो अब चलते हैं.
मेरा लंड अपनी मुंडी ताने खड़ा था तो मैंने उनसे कहा- आप बाइक के पास जाइए, मैं पेशाब करके आता हूँ.

वो वापस बाइक के पास जाने की बजाए एक पेड़ के पीछे जाकर खड़ी रहीं और मैं लंड हिलाने लगा.

जैसे ही मैं मुठ मारने लगा तो चाची बोली- अरे केदार, तू फिर से चालू हो गया?
मैं खुद को संभालते हुए बोला- अरे चाची आप गयी नहीं?

तब मैं पैंट की जिप बंद करते हुए बोला- हां चलो चाची.

मेरा लंड अभी भी तना हुआ था, पर अचानक से चाची के सामने आ जाने से थोड़ा ढीला हो गया.
चाची मेरे लंड को देखते हुए हंस दीं और बाइक की तरफ चल दीं.
मैं उनके पीछे पीछे आ गया.

बाइक पर बैठ कर हम दोनों जा रहे थे, तब चाची बोलीं- केदार आज जो भी हुआ, ये किसी को पता नहीं चलना चाहिए, तुम्हें मेरी कसम है.
मैं- अरे चाची कैसी बात कर रही हो आप. ऐसी बात को मैं बाहर कैसे बोल सकता हूँ. आप टेंशन मत लो, किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा.

चाची- ठीक है.

कुछ पल बाद चाची बोली- तू मुठ क्यों मार रहा था?
मैं- अरे चाची, आपकी जांच चूसते हुए आपकी मस्त चीज दिख गयी थी तो मेरा खड़ा हो गया था.

चाची- फिर तुमने करते करते क्यों एकदम से रुक गए थे?
मैं- आप अचानक से टोक दिया था ना!

चाची- सॉरी सॉरी. मैंने तुम्हारे मजे में दखल दे दिया.
मैं- चाची अगर आप चाहो तो आप मुझे उससे अच्छा मजा दे सकती हो!

चाची कुछ नहीं बोलीं, चुप रहीं.
वे बाद में बोलीं- अच्छा एक बात बता, कितना बड़ा है तेरा?

ये कुछ ज़्यादा ही गर्म सवाल हो रहे थे और मेरा इनके सवालों की वजह से ही फिर से खड़ा हो गया था.

मैं- कभी नापा नहीं चाची.
चाची- अगर तुझे अच्छा लगे तो मुझे अभी ही दिखा दे.
मैं- हां क्यों नहीं … आप अभी ही हाथ लगा कर देख सकती हैं.

मेरे ये कहते ही अचानक से चाची ने अपना हाथ आगे किया और मेरे लंड पर रख दिया.

आह क्या करेंट सा लगा … क्या बताऊं.

चाची ने थोड़ी देर तक ऊपर से ही लंड सहलाने के बाद मेरी टी-शर्ट के अन्दर हाथ डाला. फिर नीचे ले जाते हुए उन्होंने अपने हाथ को मेरी पैंट में घुसेड़ा और कच्छे के अन्दर डाल दिया.
वो लंड को मसलने लगी थीं. इससे मेरा लंड चरम पर आ गया था और वीर्य निकलने वाला हो गया था.

मैं- चाची बस करो … वरना बॉक्सर की तरह ये पैंट भी गीली हो जाएगी
चाची ने खुश होते हुए कहा- ठीक है हो जाने दो.

मैं- चाची ये, तो ग़लत है, आपने ही कहा था न.
चाची- तब मेरी ही मति मारी गयी थी. छोड़ इस बात को, अभी कितनी देर है और लगेगी … ये बता!

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मैंने गाड़ी रोक दी. चारों तरफ घना जंगल था, रास्ते के आजू बाजू बहुत पेड़ थे. मैंने गाड़ी अन्दर घने जंगल की तरफ मोड़ दी.

मैं- चाची अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है … मुझे हिलाना है, मैं अभी आया 5 मिनट में.
चाची- मुझे देखना है तुम्हारा!
मैं- ठीक है चलो.

मैंने लंड निकाला तो चाची हैरान रह गईं.

चाची ने उंगलियों के हिसाब से बताया- चाचा से तेरा चार अंगुल बड़ा है.
मैंने ख़ुशी से लंड हिलाया.

चाची- केदार, वास्तव में तेरा लंड तेरे चाचा से काफी बड़ा है.
मैं- अब देख लिया, जाओ अब आप.
चाची- नहीं, मेरे सामने कर … अभी मुझे देखना है.

मैं चाची के दूध देखते हुए लंड हिलाने लगा और चाची भी गर्म हो गईं.
मुझे लगा कि अब चाची मेरे लंड का मजा ले लेंगी.

मैं- चाची अगर आप अपना ब्लाउज खोल दो तो मेरा काम जल्दी हो जाएगा.

चाची ने ब्लाउज खोल दिया. सफ़ेद रंग की ब्रा में चाची की भरी हुई गजब की चूचियां, ऐसे तनी हुई दिख रही थीं मानो पर्वत चोटियां हों.

वो मेरे काफी करीब आ गई थीं. मैंने उनको एक पेड़ के सहारे से टिका दिया और उनके एक दूध को दबाने लगा.

मेरे ऐसा करते ही उन्होंने भी अपने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया और हिलाने लगीं.

सच में आज बड़ा मस्त फील हो रहा था.

मैं चाची के पेटीकोट के अन्दर हाथ करके एक उंगली से पैंटी के ऊपर से ही उनकी चुत से खेलने लगा.

चाची इतना गर्म हो गयी थीं कि उनके नाख़ून मेरी पीठ पर गड़ कर मुझे दर्द दे रहे थे.
मैंने चाची के पेटीकोट के अन्दर सर घुसा दिया और सीधा चुत को चाटने लगा.

चाची आंह आंह करती हुई मेरा सर दबा रही थीं और मैं अपनी जीभ से चुत संग चटाई का खेल खेल रहा था.

कुछ ही देर में चाची का रस निकलने वाला हो गया था.
उनकी टांगों की जकड़न मेरे सर पर बढ़ती ही जा रही थी, इससे मुझे साफ़ समझ आ गया था कि चाची अपनी चरम सीमा पर आ गई थीं.

मैं उसी समय रुक गया.

चाची एक रंडी की भाषा में बोलीं- आंह क्या हुआ बे … रुक क्यों गया मादरचोद!

मैंने पहली बार चाची के मुँह से गाली सुनी थी, मुझे बहुत मजा आया.

मैं- अपना रस आप खुद पीना चाहोगी?
चाची कराहते हुए मीठी आवाज में बोलीं- हां पी लूंगी हरामी … मगर जल्दी से मेरी प्यासी चुत में अपना मुँह फिर से लगा.

मैं वापस से चाची की चुत में उंगली डालते हुए जीभ से चुत चाटने लगा.

चाची- उंह उउउई …. अईईई … कट गई आह केदार … मेरा आने वाला है … अहह पी ले भोसड़ी के पूरा रस चाट ले … आंह आंह. अहह ओह.

मैंने चाची की चुत का पूरा का पूरा रस अपने मुँह में ले लिया और पेटीकोट से बाहर निकल कर उनको किस करने के लिए उठा.

उन्होंने मेरे लंड को हाथ में ले लिया. मैंने उन्हें किस किया और उनकी चुत का थोड़ा सा रस, उनके मुँह में दे दिया. बाकी रस मैं पी गया.

उन्होंने रस का स्वाद लिया और अपने मुँह में भरे अपनी चुत के रस में थोड़ा सा थूक मिला कर मेरे लंड पर लगा दिया.

अब चाची मेरा लंड जोर जोर से हिलाने लगी थीं.

मैं भी अपनी चरम सीमा पर था और उनके मम्मों को मसलते हुए मैंने पूरे दूध लाल कर दिए थे.

अगले कुछ पलों में मैंने अपने लौड़े का माल चाची के मम्मों पर गिरा दिया.

झड़ने के बाद चाची ने मुस्कुरा कर देखा और हम दोनों उधर ही जमीन पर लेट गए.

कुछ देर बाद हम दोनों अपने कपड़े ठीक करके तैयार हो गए.

मैंने कहा- देखा चाची, हम दोनों ने कुछ ऐसा वैसा किया भी नहीं और दोनों सॅटिस्फाई हो गए.
चाची हंस कर बोलीं- हां केदार, लेकिन तेरा लंड बहुत तगड़ा है.

मैंने चुटकी ली- चलो तो अभी अन्दर बाहर कर लेते हैं.
चाची बोलीं- अभी नहीं … लेकिन बाद में कभी जरूर इस बारे में सोचूँगी.

फिर मैंने बाइक स्टार्ट की तो चाची ने मेरी पीठ पर अपनी चूचियां अड़ा दीं और मुझसे बोलीं- अब तू कभी भी इनका मजा ले सकता है.

मैंने हंस कर हामी भर दी और चल दिया.

फिर मैं चाची को उनके मायके छोड़ कर आ गया.

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