खुली छत पर गांड की चुदाई की गंदी कहानी

उसके हर धक्के का जवाब मैं भी अपनी गांड को ऊपर उठा कर दे रही थी. हम लोग पूरे जोश में थे और एक दूसरे का पूरा साथ दे रहे थे. सर्दी में बदन से पसीना आने लगा था. इतना गर्म लंड ही मेरी चूत की प्यास को बुझा सकता था. बीस मिनट तक उसके मोटे लंड ने मेरी चूत को जम कर फैलाया. इस दौरान मैं तीन बार झड़ गई.

फिर एकदम से उसने अपने लंड को मेरी चूत से बाहर निकाल लिया. मुझे नहीं पता था कि वो क्या करने वाला है. लेकिन फिर उसने अपने लंड को अपने हाथ में लेकर हिलाना शुरू कर दिया.
उसके बाद उसने अपने लंड की तेजी के साथ मुट्ठ मारनी शुरू कर दी. मुझसे व्हिस्की का गिलास उठाने के लिए कहा. वो बहुत ही जोर से अपने लंड को अपने हाथ में लेकर रगड़ रहा था.

मैंने गिलास को उठा कर उसके हाथ में थमा दिया. उसने गिलास को लंड के नीचे कर लिया. फिर अचानक से उसके लंड से पिचकारी गिलास में गिरने लगी. उसने सारा माल व्हिस्की में मिला दिया.
दोबारा से उसने लंड को मेरे मुंह में दे दिया.

पूरा माल छूटने के बाद लंड में पीछे रह गई कुछ बूंदें मेरे मुंह में नमकीन सा स्वाद दे रही थी. मैंने उसके लंड को चाट कर साफ कर दिया. मैंने संतोष जी के लंड से निकल रही मलाई को पूरी तरह से निचोड़ लिया.
जिस गिलास में उसने अपना माल निकाला था उसने वो गिलास मुझे दे दिया पीने के लिए. संतोष ने उसमें थोड़ी सी शराब और मिला दी थी. वो पैग पीने में मुझे बहुत मजा आया. उसके माल की कॉकटेल और भी ज्यादा मस्त लगी मुझे.

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कुछ देर तक हम दोनों वहीं पर नंगे ही पड़े रहे और हीटर के सामने पड़े हुए एक दूसरे चूमते रहे. मेरी वासना कुछ ही देर में फिर से भड़क गई और मैंने उनके लंड को फिर से पकड़ लिया.

लेकिन अबकी बार वो मेरी गांड को चोदना चाहते थे; उन्होंने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरी गांड पर थूक दिया. फिर उसने अपने लंड के टोपे पर भी थूक लगा दिया और मेरी गांड में लंड को रख कर घुसाने लगे.

गांड के मामले में एक बात मैंने देखी थी कि गांड की चुदाई कितनी बार भी करवा लो लेकिन जब भी गांड में लंड जाता है तो वो दर्द करती है.

मुझे उसके मोटे लंड से गांड में दर्द होने लगा. मगर उसने पूरा लंड मेरी गांड की गहराई में उतार दिया. फिर जोर से धक्कों की बारिश मेरी गांड पर करने लगे. मैंने भी अपने सिर को नीचे कर लिया ताकि गांड ऊपर उठ जाये और लंड पूरा अंदर तक चला जाये. इस तरह वो तेजी से मेरी गांड की चुदाई करने लगा. फिर उन्होंने लंड को बाहर निकाल लिया और फिर से थूक लगाया. इस तरह से बार-बार वो लंड पर थूक लगा कर लंड को चिकना रख रहे थे.

गांड की चुदाई के दौरान भी मैं दो बार झड़ गई. फिर उसने अपना लंड मेरी गांड से निकाल लिया और बाहर निकाल कर एकदम से पूरा अंदर घुसा दिया. इस तरह से दो-तीन बार करने के बाद मेरी गांड में ही उसने अपना माल गिरा दिया.

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माल को गिराने के बाद उसने मेरी गांड से लंड को निकाल लिया और मुझे लंड चूसने के लिए कहा. लेकिन मैंने मना कर दिया क्योंकि लंड में बदबू हो गई थी.

दोस्तो, आप खुद ही सोचो कि रात के 12 बजे बिना तैयारी के कोई गांड की चुदाई करेगा तो लंड में स्मैल तो होनी ही थी. मैंने साफ मना कर दिया.

उसके बाद हम काफी देर तक वहीं बैठे रहे. मैंने संतोष के साथ बैठ कर सिगरेट पी. फिर मुझे मेरी बेटी के रोने की आवाज सुनाई दी. वो शायद नींद से जग गई थी. बेटी की आवाज को सुन कर मैंने अपनी नाइटी को पहन लिया और नीचे आ गई. संतोष भी अपने घर चले गये.

इस तरह से रात में मैंने व्हिस्की के साथ अपनी चूत की चुदाई करवाई. दोस्तो, आगे की कहानी में मैं आपको बताऊंगी कि कैसे मैंने ससुर जी और उनके दोस्त से अपनी चूत की चुदाई करवाई लेकिन अभी वो कहानी मैं बाद में सुनाऊंगी.

खुली छत पर गांड की चुदाई की गंदी कहानी पर कमेंट करिये और मैं कोशिश करूंगी कि आपके कमेंट और मैसेज का जवाब दे सकूं. मैं बिंदु रंडी फिर अगली कहानी लेकर आऊंगी.

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