खुली छत पर गांड की चुदाई की गंदी कहानी

मैं उनके पास गई तो उन्होंने सिगरेट मेरी तरफ की. मैंने मना कर दिया कि मैं सिगरेट नहीं पीऊंगी.
फिर वो बोले- पहले तू दारू भी नहीं पीती थी लेकिन अब मेरे साथ पीती है. एक बार कश लगा कर देख मजा आता है.
संतोष जी के कहने पर मैंने सिगरेट का कश भरा तो मुझे अच्छा लगा. मैंने एक दो कश लगाये और फिर संतोष जी ने मुझे अपने पास खींच लिया और मेरे होंठों को चूसने लगे.

होंठों को चूसते हुए ही वो मेरे चूचों को भी दबा रहे थे. मैंने कुछ देर पहले ही अपनी बेटी को दूध पिलाया था. इसलिए मेरे चूचों से दूध भी निकलने लगा. संतोष जी मेरा दूध पीने लगे. मुझे अपने चोदू यार को अपना दूध पिलाने में अलग ही मजा आ रहा था. वो जोर से मेरे चूचों को दबा रहे थे. मुझे दर्द भी हो रहा था लेकिन साथ ही मजा भी आ रहा था.

फिर मैंने भी अपने यार का लंड अपने हाथ में पकड़ लिया; उसको पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी. फिर कुछ देर तक चूमा-चाटी हुई और हम दोनों अलग हो गये.

संतोष जी पैग बनाने लगे, पैग बनाते हुए वो बोले- तेरी पेशाब वाली कॉकटेल मैंने काफी दिन से नहीं पी है.
मैंने कहा- मुझे भी आपकी पेशाब वाली कॉकटेल पीने का मन कर रहा है.

मुझे भी नशा चढ़ा हुआ था. इसलिए मैं भी गंदा सेक्स करना चाह रही थी.

वो बोले- पहले तुम अपना पेशाब पिलाओ, उसके बाद मैं अपना पिलाऊंगा. मेरा पिलाने का तरीका कुछ अलग होगा.

मैं खुश हो गई. संतोष जी आज कुछ अलग ही करने वाले थे.

हम दीवार के पास में थे तो हम लोगों को ज्यादा ठंड नहीं लग रही थी. मैंने उठ कर अपनी नाइटी हटा कर संतोष जी के पैग में थोड़ा सा पेशाब कर दिया. उन्होंने पैग में व्हिस्की मिलाई और फिर पी गये.

अब मुझे उनके लंड के अंदर का पेशाब पीने का मन कर रहा था. संतोष जी ने अपना तना हुआ लंड बाहर निकाल लिया. पहले मैंने उनके लंड को अपनी जीभ से चाट लिया. फिर उसको मुंह में ले लिया और मजे से चूसने लगी.

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संतोष जी ने मेरे मुंह में ही थोड़ा थोड़ा सा पेशाब करना शुरू कर दिया. मुझे अपने मुंह में उसका गर्म पेशाब महसूस हो रहा था. मुझे इससे और ज्यादा सेक्स चढ़ने लगा.
फिर उन्होंने मेरे मुंह में लंड को दिये रखा और व्हिस्की को लंड पर गिराने लगे. अब पेशाब और व्हिस्की दोनों ही मेरे मुंह में जा रहे थे.

मैं इधर लण्ड चूसे जा रही थी और वो कपड़े उतार कर नंगे हो चुके थे। फिर उन्होंने मुझे नंगा किया और मेरी चूचियों को पीने लगे. एक हाथ से वो मेरी चूची को मसल रहे थे और दूसरी चूची को अपने होंठों से पी रहे थे.
मैं भी उफ्फ्फ … आआहह … कर रही थी। मैं भी पूरे जोश में थी.

फिर उन्होंने मेरी चूत को चाटना शुरू किया। मेरी चूत की फांक को फैला कर उसमें अपनी जीभ चला रहे थे। वो कभी मेरी चूत के छेद में अपनी जीभ डालते और कभी गान्ड के छेद में।
उनकी जीभ मुझे चूत में भी पूरा मजा दे रही थी लेकिन जब वो गांड में जीभ डाल रहे थे तो अजीब सा मजा आ रहा था … बहुत मस्त आनंद दे रहे थे वो; इसलिए मैं दस मिनट में ही झड़ गई.

शराब के नशे और चुदाई के नशे में हम लोगों को ठण्ड का अहसास ही नहीं था। जो थोड़ी बहुत ठण्ड थी वो हीटर दूर कर दे रहा था।

संतोष जी अपना लण्ड मेरी चूत पर घिसने लगे। मैं पूरी तरह लण्ड के लिए तड़प रही थी। मैंने संतोष जी से कहा- अब मत तड़पाओ, अब डाल दो।
मेरे कहने पर उन्होंने अपने लण्ड को मेरी चूत पर कई बार पटका. उनके लंड की पटक से चूत में और ज्यादा खुजली लग गई थी. मैं उनके लंड को चूत में लेने के लिए और ज्यादा मचल उठी थी. जब उनका लंड मेरी चूत पर पटका खा रहा था तो चट-चट की आवाज हो रही थी और मेरी चूत की खुजली बढ़ती ही जा रही थी.

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फिर उन्होंने अपना 8.5 इंच का लंड मेरी चूत में घुसा दिया. एकदम से लंड चूत में जाने से जैसे मेरी जान ही निकल गयी. लंड के अंदर घुसते ही मैं जोर से चीखी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
और उन्होंने अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख दिया. वो अपने होंठों को मेरे होंठों पर सटा कर पूरे जोर से मुझे चूसने लगे. मेरी आवाज अंदर ही दब गई.

लेकिन मुझे चूत में अभी दर्द हो रहा था. लेकिन संतोष जी बहुत ही चोदू किस्म के इन्सान हैं. उनको मेरे दर्द की परवाह नहीं थी. वो मेरी चूत में अपने मोटे लंड के झटके देने लगे.

काफी देर के बाद मेरा दर्द कम होना शुरू हुआ. फिर मुझे मोटे लंड से चूत में मजा आने लगा. मैं भी पूरी मस्ती में आ गई. मैं अपने यार का लंड पूरा का पूरा अपनी चूत में ले रही थी. उसका लंड बहुत मोटा था और मेरी चूत में पूरा फंस कर उसको चोद रहा था. मुझे बहुत मजा आ रहा था. मेरे मुंह से आह्ह … आह्हह की गर्म आवाजें निकल रही थीं.

कुछ देर की चुदाई के बाद मेरे यार ने मेरे पैरों को पकड़ कर अपने कन्धे पर रख लिया. मैंने अपने दोनों पैरों को उसकी गर्दन पर लपेट दिया. अब पोजीशन और भी मजेदार हो गई थी. उनका लंड अब पूरी जड़ तक मेरी चूत में घुस सकता था और उस कमीने ने भी इसका पूरा फायदा उठाया. वो पूरी ताकत के साथ धक्के लगाने लगा. पूरा लंड मेरी चूत में जड़ तक घुसने लगा. मगर अब मुझे दर्द नहीं हो रहा था बल्कि मजा आ रहा था. संतोष मेरी चूत में लंड को पूरा अंदर तक पेलने लगा.

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