चंडीगढ़ में देसी अनचुदी फुद्दी चोदी

मैंने अपना लंड उसकी फुद्दी के मुहाने पर सैट किया … और एक बार उसको देखा. मुझको पता था कि उसकी पहली बार है, तो उसे शांति से चोदना पड़ेगा, वर्ना उसे बहुत दर्द होगा. लंड डालने से पहले मैं उसे चूमता रहा और धीरे धीरे अपना लंड उसकी फुद्दी में डालने की कोशिश करता रहा. उसकी फुद्दी इतनी टाईट थी कि लंड अन्दर नहीं जा रहा था. मैं बार बार लंड उसकी फुद्दी में डालने की कोशिश करता, लेकिन वो हर बार फिसल कर बाहर आ जाता.

पर लंड डालना तो था ही.

मैंने उसकी फुद्दी को फिर से चाटना शुरू किया. तकरीबन 3-4 मिनट चाटने के बाद सरनी की फुद्दी ने पानी छोड़ दिया. उसे बहुत मज़ा आया. उसे लगा कि शायद यही सेक्स होता है.

मैंने उसे समझाया कि असली मज़ा तो अभी आना बाकी है. ये तो मात्र ट्रेलर था. पूरी फिल्म अभी बाकी है.

मैं फिर से उसे किस करने लगा. मैंने फिर से उसकी फुद्दी चाटनी शुरू की.

वो 10 मिनट में फिर से गर्म होने लगी. मैंने उसे अपना लंड मुँह में लेने के लिए कहा … लेकिन उसने मना कर दिया.

मैंने भी ज्यादा जिद नहीं की. पहले मैंने अपनी एक उंगली सरनी की फुद्दी में डाली और धीरे धीरे अन्दर-बाहर करने लगा. सरनी को थोड़ा सा दर्द हुआ. जब सरनी थोड़ा नार्मल हुई, तो मैंने दो उंगलियां डाल दीं. जब मैंने देखा कि सरनी की फुद्दी गीली हो चुकी है और मेरे लंड को अन्दर जाने में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी, तो मैंने किस करते करते अपने लंड को सरनी की फुद्दी पर सैट कर दिया.

मैं धीरे धीरे लंड को उसकी फुद्दी में डालने की कोशिश करने लगा. काफी देर के बाद लंड का टोपा उसकी फुद्दी के अन्दर चला गया. सरनी के मुँह से हाय निकला, पर उसने अपनी चीख अन्दर ही दबी ली. अगले शॉट ने मेरे लंड ने सरनी की सील तोड़ दी थी. सील टूटते ही सरनी एकदम से छटपटाने लगी, उसके मुँह से तेज चिल्लाने की आवाज निकलने को हो रही थी, मगर मुझे पहले से ही मालूम था, इसलिए मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा रखा था. उसके आंसू निकल आए, वो गूं गूं करके मुझे धकेल रही थी. मगर मैं गरम सांड की तरह उसकी फुद्दी में अपने लंड को फंसाए रहा.

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मेरे लगातार कुछ देर तक उसे सहलाने और चूची चूसने से उसकी पीढ़ा कम हो गई और अब तक धीरे धीरे करके मेरा लंड भी चूत की गहराई में उतर गया था. अब उसकी फुद्दी भी मेरे लंड को अपने अन्दर समाना चाहती थी. मैंने किस करते करते धीरे धीरे अपना सारा लंड उसकी फुद्दी में डाल दिया.

इसके बाद मैं फिर रुक गया और उसके मम्मे चूसने लगा. कुछ ही देर में लंड ने सरनी की फुद्दी में जगह बना ली थी और उसका दर्द मजे में बदलने लगा था.

क्या मज़ा आ रहा था. मैंने लंड को अन्दर बाहर करना शुरू किया. … कसम से आज से पहले कभी इतना मज़ा नहीं आया था.

मैं घस्से पर घस्सा मारे जा रहा था. पहले तो उसे काफी दर्द हुआ, लेकिन धीरे-धीरे वो नार्मल होने लगी. फिर वो भी कमर उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी. अब वो भी बहुत कामुक आवाज़ें निकाल रही थी.

कुछ देर चोदने के बाद उसकी चूत जब मेरा लंड लेने के लिए खुल गई, तो मैंने लंड निकाल लिया.

अब मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी बुंड और फुद्दी को चाटने लगा. कोई दो मिनट चाटने के बाद मैंने लंड को फिर से उसकी फुद्दी पर सैट किया.

मैंने सरनी की कमर से पकड़ कर लंड सरनी की फुद्दी में डाला. मैंने फिर से उसकी जबरदस्त ठुकाई शुरू कर दी. जैसे जैसे मेरा लंड अन्दर बाहर हो रहा था, वैसे वैसे मैं अपने आपको जन्नत में सैर करता हुआ जैसा महसूस कर रहा था.

मेरे लंड के निशाने पर सरनी की फुद्दी चुदने से उसकी कामुक आवाजें उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे और जोश दिला रही थीं. हर घस्से के साथ सरनी मस्त होती जा रही थी. जब लंड अन्दर जाता, तो मेरे लंड के साईड का हिस्सा सरनी की बुंड के गोल गोल चूतड़ों से टकरा रहा था.

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हम दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था. करीब 10 मिनट के बाद उसने मुझे कसके जांघों से पकड़ लिया और आगे की ओर खींचने लगी.
उसका स्खलन हो गया था इसलिए मैंने अपनी स्पीड कम कर दी. उसने खुद के झड़ने का पूरा मजा लिया और वो शिथिल हो गई.

थोड़ी देर बाद मैं फिर से शुरू हो गया. लंड और फुद्दी के मिलन से अब फच फच की आवाज़ आ रही थी. मैं झटके मारते हुए उसे किस कर रहा था. कोई दस मिनट मेरा भी निकलने वाला हो गया था. सरनी भी फिर से चरम पर आ गई थी. इस बार हम दोनों का एक साथ हो गया. मैंने अपना सारा माल सरनी की फुद्दी में छोड़ दिया.

मैं थोड़ी देर के लिए सरनी के ऊपर ही पड़ा रहा. इसके बाद हम दोनों बाथरूम में गए. अपनी फुद्दी पर लगा खून देखकर वो रोने लगी.
सरनी कहने लगी- ये तुमने क्या कर दिया?
मैंने उसे समझाया- पहली बार करने पर ऐसा हो जाता है. इसलिए डरने की कोई बात नहीं है.

वो मान गई और वापिस आ कर नंगी ही सो गई.

मुझे नींद नहीं आ रही थी. शायद सरनी भी नहीं सोई थी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. मैंने उसे पीछे से जफ्फी डाली हुई थी. जब मेरे लंड ने सरनी की फुद्दी को टच किया, तो वो फिर से खड़ा होने लगा. मैंने धीरे धीरे से उसकी टी-शर्ट भी निकाल दी. मैं तो पहले से ही बिल्कुल नंगा था. अब सरनी के जिस्म पर भी कोई कपड़ा नहीं था. मैं सरनी की नंगी पीठ को चूम रहा था. कभी उसकी गर्दन, कभी कान, कभी कान के पीछे, कभी उसके कंधों पर किस कर रहा था. उसका जिस्म मलाई जैसा था.

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