चाची के साथ बस का सफ़र

मुझे पता था के बस के सारे लौग मेरी गीली गान्ड और पॅंट देख सकते हैं मगर मेरे पास कोई और चारा नई था. मेने पेशाब करना ख़तम किया और अपनी पॅंट उपर कर ली.

पॅंट अब बहुत ज़्यादा गीली हो गयी थी और मुझे अपनी गान्ड और टाँग गीली और ठंडी लग रही थी. मे शरम के मारे सिर नीचे रख के बस मे वापिस आया तो मेने देखा के बहुत से लोग मुझपे हास रहे थे.

मे जाके अपनी चाची के साथ गीली सीट पे बैठ गया और देखा के चाची मुझे प्यार और दुख से देख रही हैं.

उन्हों ने मेरे सिर को पकरा और अपनी छाती से लगा लिया और मुझे कहने लगी “कुछ नही होता बेटा, सब के साथ होता है ऐसा कभी ना कभी, अगली बार से घर से निकलने से पहले सूसू किया करो.”

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