बुआ की चुत गांड चोदकर मजा लिया- 1

बुआ सेक्स स्टोरी मेरे ख़ास दोस्त की बुआ के सेक्स जीवन की है. मुझे पता चला कि फूफा ने कोई लड़की रखैल बना रही है. बुआ की जिन्दगी सेक्स से खाली थी.

मेरे प्यारे दोस्तो और भाभियो, आप सभी को मेरा प्यार भरा कामुक नमस्कार.
आशा है आप सभी स्वस्थ होंगे और अपनी सेक्स लाइफ का भरपूर आनन्द उठा रहे होंगे.

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व इससे पूर्व प्रकाशित अन्य कहानियाँ आपने पढ़ीं और उनको सराहा, मुझे ढेर सारा प्यार दिया और जाने कितने प्रशंसकों की ईमेल भी मुझे आईं.

आपकी सराहना, प्यार, स्नेह और आपकी दोस्ती के लिए मैं दिल से शुक्रगुजार हूँ. आपमें से कुछ से मेरी अच्छी दोस्ती भी हुई … और कुछ से मेरी बात सिर्फ़ मैसेज के मध्यम से हुई … कइयों से अब भी चैट होती है.

बुआ सेक्स स्टोरी में आगे बढ़ने से पहले दोस्तो से अनुरोध है कि अपने लंड को अपने-अपने हाथों में धारण करें और भाभियों से प्यार भरी गुज़ारिश है कि वे अपनी मुनिया को ज़रा मुट्ठी से मसल कर तैयार होने का इशारा जरूर कर दें क्योंकि आपका प्यारा देवर राहुल (यानि मैं) कभी भी आपकी चुत के होश उड़ाने आ सकता है.

आज मैं अपनी और अपने एक मित्र की बुआ पूनम की आपबीती आपसे साझा करने जा रहा हूँ. मेरे बचपन के मित्र की बुआ पूनम, सूरत से बहुत खूबसूरत नहीं थीं और बदन से भी बहुत साधारण ही थीं. बुआ का इकहरा शरीर … बहुत पतला था और चुचे छोटे छोटे थे. मगर गांड ऐसी थी कि क्या कहूँ.

अभी सेक्स कहानी लिखनी शुरू ही की है पर मेरे मुन्ना भाई को बुआ की गांड याद आ गई और फुंफकारते हुए तन्नाने लगे हैं. आप इसी से अनुमान लगा सकते हैं कि पूनम बुआ की गांड क्या खूब होगी.

ये बुआ सेक्स स्टोरी सन 2007 का है, उस समय मेरा आना-जाना पूनम बुआ के घर थोड़ा बढ़ गया था. पूनम के पति, बृज को व्यापार में कुछ नुकसान हुआ था और इसीलिए पूनम बुआ थोड़ी परेशान रहने लगी थीं.

वो मेरे बचपन के मित्र की बुआ थीं, तो अपना भी प्रयास बनता था कि जो सहायता हो सके, वो की जाए.

धीरे धीरे रोज़ाना आना जाना शुरू हुआ और देखते ही देखते पूनम बुआ से मेरी निजी बातें भी होने लगीं.
पूनम बुआ बहुत धार्मिक थीं और बृज फूफा के स्वास्थ्य को लेकर भी परेशान रहती थीं.

बृज फूफा ने कुछ एफएमसीजी का काम शुरू किया था. अपने इस काम के लिए उन्होंने एक लड़की, जिसका नाम लता था, उसको मार्केटिंग के लिए भी रख लिया. लता रोज़ बृज फूफा के साथ बाज़ार जाती थी.

कुछ समय बाद मुझे पूनम बुआ से चला कि बृज के लता से संबंध बन गए हैं.

मैंने बुआ से पूछा कि किस हद तक सम्बन्ध बन गए हैं.
तो पूनम बुआ ने बताया- बृज मेरे सामने ही लता को चोद भी देता है.

बुआ के मुँह से चोदना शब्द सुनकर मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा … पर मैं होता कौन था पति पत्नी के बीच बोलने वाला.

मुझे आज पहली बार ऐसा लगा, जैसे पूनम बुआ का झुकाव मेरी तरफ बढ़ रहा है.
जबकि मेरे मन में पूनम बुआ के प्रति ऐसे कोई विचार नहीं थे.

मैं यहां बता दूं कि पूनम बुआ को एक बेटी और एक बेटा थे, जो उस समय छोटे ही थे.

मैंने बुआ को दिलासा दी और समय का इंतजार करने को कहा.

फिर समय बीता और पूनम बुआ की मुझसे बातें भी बढ़ती गईं. उनसे चुदाई की बातों को लेकर अब मेरी खुली खुली बातें होने लगी थीं.

एक दिन पूनम बुआ को कहीं जाना था, तो उन्होंने मुझसे मेरी कार में लिफ्ट मांगी.

मैंने उन्हें कार में बिठाया और चल दिया.
न जाने क्यों उसी समय एफएम पर गाना बजने लगा ‘होंठों से छू लो तुम, मेरा गीत अमर कर दो …’ जिसे सुन कर बुआ मुझसे कहने लगीं.

पूनम बुआ- ये गाना तुमने ख़ास चलाया है क्या?
मैं- एफएम चल रहा है बुआ जी.

पूनम बुआ- मुझे लगा, तुमने मेरे लिए चलाया.
मैं- आपको पसंद है क्या ये गाना?
पूनम बुआ- ह्म्म्म … ऐसी कोई बात नहीं है … पर अच्छा लगता है.

फिर बात ख़त्म खुद ही ख़त्म हो गयी.

उस दिन शाम में मुझे ये बात फिर ध्यान आई, तो मुझे लगा जैसे पूनम बुआ के मन में कुछ तो चल रहा है.
अब मेरे मन में बात को पता करने की जिज्ञासा जागी.

मुझे याद आया कि बृज फूफा, लता के साथ दो दिन को मार्केटिंग के लिए शहर से बाहर जाने वाले थे.
तो मैंने भी देर ना करते हुए, गाड़ी को पूनम बुआ के घर की तरफ घुमा दिया और उनके घर पहुंच गया.

उस समय रात के कोई 8 बजे थे और गर्मी के दिन थे तो कूलर चल रहा था.

पूनम बुआ बाहर बैठक में थीं और बेटा पढ़ाई कर रहा था, जबकि बेटी सो चुकी थी.

मुझे आया देख कर पूनम बुआ पानी ले आईं और फिर मेरे साथ ही सोफे पर बैठ गईं.
वो थोड़ी दूर को बैठी थीं मगर मेरा मन बहकने लगा था.

मेरी उनसे बातें शुरू हुई और सिलसिला कुछ यूँ बना.

मैं- आपने बताया नहीं, वो गाना आपको पसंद है?
पूनम बुआ- ऐसा कुछ नहीं. बस लगा कि तुमने शायद मेरे लिए चला दिया है!

मैं- आप चाहती हों, तो मैं दोबारा चला देता हूँ.
पूनम बुआ- क्यों मज़ाक करते हो. मैं वैसे ही बृज को लेकर बहुत परेशान रहती हूँ.

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मैं- अब ऐसा क्या कर दिया उन्होंने?
पूनम बुआ- शराब पी पी कर वो पहले ही अपना शरीर बेकार कर चुके हैं. तुम्हें क्या बताऊं, अब तो उनका जल्दी से खड़ा भी नहीं होता … और ऊपर से इन्होंने ये लता नाम की बीमारी और पाल ली.

ये सब सुनकर मैं तो जैसे सन्न सा रह गया था.
मेरे दिमाग में विचार आते देर ना लगी कि आज तो दावत में बुआ की चुत चोदने को मिल सकती है.

फिर भाभियो, आप सब तो जानती ही हो कि मेरे शिकारी को क्या चाहिए? चुत चुत और सिर्फ चुत.

मैंने बात आगे बढ़ाई.

मैं- बुआ आपने अपने सामने कैसे उन दोनों को सेक्स करने दिया? एक बार मना तो किया होता.
पूनम बुआ- मेरा बस चलता कहां है? और वैसे भी, मैं इस आदमी से परेशान हो चुकी हूँ. अब कम से कम बृज को लता की तरफ तो कर दूंगी … जब वो अगली बार मुझसे कोई फालतू की फरमाइश करेगा.

मैं- फालतू की फरमाइश? मैं नहीं समझा.
पूनम बुआ- अरे … तुम्हें सब बताना मैं जरूरी नहीं समझती.

मैं- हां … वैसे भी मैं होता कौन हूँ?
पूनम बुआ मेरे होंठों पर उंगली रखती हुई बोलीं- दोबारा ऐसा मत कहना. तुम नहीं जानते, अगर तुम नहीं होते, तो पता नहीं मेरा क्या होता.

मैं- तो फिर पूरी बात बताने में क्या दिक्कत है?
पूनम बुआ- कुछ नहीं. शराब की वजह से इनका खड़ा तो होता नहीं, पर सर पर हमेशा चढ़ी रहती है. तो कभी कुछ करेंगे तो कभी कुछ. जवानी वाली बात तो अब हो नहीं सकती … पर फिर भी दिन में 2-3 बार छेड़खानी कर देते हैं.

मैंने पूछा- जब खड़ा नहीं होता तो बृज फूफा ने लता को कैसे चोदा?

मैं भी थोड़ा बात को खोलना चाहता था, तो मुझे ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना पड़ा.
यूँ तो मैं पूनम बुआ के सामने ऐसे पहले भी बात कर चुका था, पर आज मैं पूनम बुआ को चोद कर अपना लंड शांत करने का मन बना चुका था और उसके लिए थोड़ा और खुलना बहुत जरूरी था.

पूनम बुआ- तो बृज कुछ करते थोड़े हैं. उनको तो सिर्फ लता के मुँह में देना होता है. और लता को भी क्या दिक्कत है, थोड़ी देर इनका मन बहला देती है इसके बदले उस रांड को आराम से सिर छुपाने को जगह मिल गयी है.
मैं- सिर्फ मुँह में … ऐसा कब से चल रहा है?

पूनम बुआ- कई साल हो गए राहुल. जब इनकी बदतमीजी हद से ज्यादा होने लगी, तभी मैंने लता को रखा था. मैं जानती थी और चाहती भी थी कि बृज लता के साथ सम्बन्ध बना लें. कम से कम अब मेरे मुँह में तो उनका पानी नहीं डलेगा.

मैं- इसका मतलब आपने पिछले कई सालों से सेक्स नहीं किया? और आप इस जवानी को कैसे काट रही हो?

पूनम बुआ ने हंसी में बात को टालते हुए कहा- कौन सी जवानी? कोई समझता ही कहां है इस बात को? कोई नहीं समझता कि एक औरत की भी जरूरत हो सकती है. औरत कुछ बोल दे … तो उसको बाज़ारू समझती है दुनिया. इसलिए यहां औरत का कुछ नहीं हो सकता.

पूनम बुआ के मुँह से इतना सुन कर मैंने उनका हाथ अपने हाथों में थाम लिया और उनको सांत्वना देने लगा. अभी तक पूनम बुआ सोफे के एक कोने पर बैठी थीं और मैं दूसरे कोने पर.

मैं पूनम बुआ के करीब आ गया और अब हम दोनों शांत हो गए थे.
कमरे में कूलर की आवाज़ के बावजूद हम दोनों के तेज़ी से धड़कते दिलों की धड़कन को आसानी से सुना जा सकता था.
मानो पूनम बुआ इस पल का न जाने कब से इंतज़ार कर रही थीं और मेरा तो आप सबको पता है.

अंधे को क्या चाहिए … दो आंख. और मुन्ना को तो आज दावत मिलने वाली थी.

मैंने भी देर ना करते हुए पूनम बुआ की तरफ बढ़ कर अपने होंठों को पूनम बुआ के होंठों पर रख दिया.
पूनम बुआ ने आंखें बंद कर लीं और पूर्ण समर्पण के साथ मेरे होंठों को चूसने लगीं.

कुछ देर के रसमय चुम्बन के बाद जैसे ही पूनम बुआ को बच्चों की याद आयी, तो उन्होंने खुद को पीछे खींचते हुए मुझे बराबर के कमरे में पढ़ रहे बेटे की याद दिलाई.

पूनम बुआ मुझसे बोलीं- बराबर वाले कमरे में नन्नू पढ़ रहा है और किसी भी आवाज़ को सुनकर वो इधर आ सकता है. बृज आने के बाद नन्नू से हर बात पूछते हैं … और नन्नू उनसे कुछ नहीं छुपाता.

मैंने पूनम बुआ को आश्वस्त किया और बराबर के कमरे में जाकर उनके बेटे को चॉकलेट दी, जो मैंने रास्ते में उसके लिए ही खरीदी थी.

फिर मैंने बच्चे को बोला- बाहर कमरे में एक चूहा आ गया है. तेरी मम्मी उसको बाहर निकाल रही हैं. मैं तेरा कमरा बाहर से बंद कर देता हूँ, जिससे वो घूम कर इस कमरे में ना आ जाए.

चूहे के नाम से नन्नू थोड़ा घबरा गया और बोला- भैया, आप जल्दी से कमरा बंद कर दो. मुझे चूहे से डर लगता है.

मेरा काम हो गया था. मैंने बाहर आकर कमरे की कुण्डी लगायी और वापस आ कर बुआ के बराबर में बैठ गया.

मैंने फिर से पूनम बुआ का हाथ अपने हाथ में थाम लिया था.

मैं- हो गया तुम्हारा नन्नू सैट … तो हम कहां थे?
पूनम बुआ- हम कुछ गलत तो नहीं कर रहे राहुल?
मैं- गलत और सही के चक्कर में पड़ने से पहले तो आप इस बात को तैयार हो जाओ कि अगर सब सही ही करना है … तो फिर से बृज का लंड चूसना पड़ेगा और उसके लंड का पानी भी पीना पड़ेगा क्योंकि सही के लिए आपको पहले लता को घर से बाहर करने की जरूरत है बुआ जी.

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पूनम बुआ कुछ सोच में पड़ गईं.
पर मैंने उनका हाथ हौले हौले से सहलाना शुरू कर दिया था.

बुआ अपने हाथ को अपने तेज़ धड़कते दिल तक ले गईं और कुछ सोचते हुए उन्होंने अपना सिर अपने और मेरे हाथ जुड़े हुए हाथों पर झुका दिया.

देर ना करते हुए मैंने भी अपने हाथ को जैसे उनके सीने से लगाया और दूसरे हाथ से उनके सिर को ऊपर उठा दिया.

मैंने देखा कि बुआ की आंखों में आंसू थे. मैंने उनकी आंखों को दूसरे हाथ से साफ़ किया, पर एक हाथ मैंने अब भी उनके सीने पर ही रखा था.

फिर मैंने अपने हाथ को उनके हाथ से छुड़ाया और सिर्फ उनके हाथ को सीने से नीचे करते हुए अपने एक हाथ को उनके नंगे सीने पर रख हल्के से सहलाना शुरू कर दिया.
धीरे धीरे अपनी एक उंगली उनके ब्लाउज के अन्दर पहुंचा दी.

मेरी कोशिश थी कि मैं पूनम बुआ के निप्पल को एक बार टच करूं, पर उससे पहले कि मैं वहां तक पहुंच पाता, पूनम बुआ ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे सवालिया नज़रों से देखने लगीं.
मैंने भी अपनी नज़रों से ही उनको जवाब दिया कि वो मेरा हाथ ना रोकें, पर उन्होंने मेरा हाथ नहीं छोड़ा.

अब मैंने अपना हाथ उनके सीने से हटा दिया और उनसे थोड़ी दूर होकर बैठ गया.
वो भी अपना मुँह दूसरी दिशा में करके हो गईं.
ये मेरा अपना गुस्सा दिखाने का तरीका था क्योंकि ये तो मुझे पता था कि आज चाहे जो हो जाए, पूनम बुआ मेरे लंड का पानी अपनी चुत में जरूर लेंगी.

मुश्किल से एक मिनट भी नहीं बीता होगा कि पूनम बुआ मेरे पास आकर मेरे हाथ को थाम कर बैठ गईं.

मेरा गुस्सा अब भी बरकरार था, पर मैंने अपना चेहरा उनकी तरफ किया, तो उन्होंने जैसे अपनी नज़रों से ही समर्पण कर दिया और मेरे हाथ को फिर से अपने हाथों में थामे, दिल पर रख लिया.

मैंने भी देर ना करते हुए फिर से उनके ब्लाउज में उंगली सरका दी.
पर इस बार मेरी दो उंगलियां अन्दर थीं.

मेरी उंगलियां सीधे उनके निप्पल को छूकर ही रुकीं.
पूनम बुआ ने एक आह भरी और आंखें बंद कर लीं. मैंने उनके निप्पल को दोनों उंगलियों के बीच लेकर मसलना शुरू कर दिया और पूनम बुआ की कामुक सिसकारियां भी बढ़ती चली गईं.

मैं समझ चुका था कि पूनम बुआ तैयार हैं और इसलिए मैंने दूसरे हाथ से पूनम बुआ के ब्लाउज के एक बटन को खोल कर गले को थोड़ा नीचे सरकाते हुए उनके निप्पल को बाहर निकाल लिया, ताकि मैं उसको अपने होंठों से चूम सकूं.

पूनम बुआ का रंग यूँ तो साफ़ था … तो छोटे से गोरे चुचे पर हल्के भूरे रंग का उनका निप्पल तन्नाया सा खड़ा था.

बुआ अपनी सुध खो चुकी थीं और जैसे मेरे आलिंगन में आने को बेताब थीं.

मैंने जैसे ही उनके निप्पल को चूमा, पूनम ने अपनी बांहों में मुझे भर लिया और मेरे बालों में अपने हाथ ऐसे फेरने लगीं, जैसे मुझसे कह रही हों कि आज इनको चूस चूस कर इनका सारा रस पी जाओ.

मैंने पूनम के निप्पल को फिर से हल्के से चूमते हुए खींचा, तो बुआ के बदन में जैसे कंपन सी हुई. उसी समय एकाएक मैंने उनके निप्पल को तेजी से चूसना शुरू कर दिया.

क्या अनूठा अनुभव था दोस्तो … मैं आनन्द के समंदर में गोते खा रहा था और पूनम बुआ भी उसी समंदर में डूबती जा रही थीं.

मैंने पूनम बुआ के चुचे को चूसते चूसते काटा भी, सहलाया भी.
इस दौरान बुआ का बदन कांपता रहा और मेरी उत्तेजना बढ़ती रही.

मैंने थोड़ा होश संभाला और इससे पहले देर होती, पूनम बुआ के ब्लाउज के बटन खोल दिए. मैंने उनको झूठा विरोध करने का भी मौका नहीं दिया था. इसलिए उनका चेहरा ऐसा हो गया था जैसे काटो तो खून नहीं.

देखने में तो पूनम बुआ का सीना सपाट था … पर हल्के हल्के चुचे तो सभी महिलाओं के होते हैं और आप सभी ने कभी ना कभी ये अनुभव किया ही होगा.

अब मैंने एक एक करके बुआ के दोनों चुचों को मसलना, चूसना और काटना शुरू कर दिया था.
पूरा कमरा बुआ की सिसकारियों की आवाज़ से गूंज रहा था.

मैंने पूनम को याद दिलाया- नन्नू बराबर कमरे में है और अभी सोया नहीं है. तेज आवाज मत करो.
तब जाकर बुआ की सिसकारियां थोड़ी हल्की हुईं.

पूनम बुआ मुझे पहले ही बता चुकी थीं कि बृज उनको अपना लंड चुसाता है और उनके मुँह में अपना पानी भी डालता है.

आप सबको तो पता ही है कि मुझे लंड चुसाना कितना पसंद है. जब कोई लड़की, भाभी या औरत मेरा लंड चूसती है … तो मैं एकदम से मदहोश हो जाता हूँ, आसमान में उड़ने लगता हूँ, मेरा लंड फूल कर और मोटा हो जाता है.

अब बुआ मेरे लंड को कैसे चूसती हैं या नहीं चूसती हैं. ये सब मैं बुआ सेक्स स्टोरी के अगले भाग में लिखूंगा. आप मुझे मेल कर सकते हैं.
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