शोरूम वाली भाभी के साथ पार्क में खुली मस्ती

ओरल सेक्स पोर्न स्टोरी में पढ़ें कि मैंने बाइक खरीदने के लिए शोरूम में फोन किया तो मेरी दोस्ती सेल्स गर्ल से हो गयी. वो शादीशुदा थी. एक दिन हम पार्क में मिले और …

नमस्कार मित्रो, यहां अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली सेक्स कहानी है.

बहुत समय से मैं अपनी इस ओरल सेक्स पोर्न स्टोरी को लिखना चाहता था, पर कभी समय ही नहीं निकल पाया.

आज मैं अपनी ज़िंदगी के सबसे अनोखे अनुभव के बारे में आप सबको बताना चाहूँगा.
मुझे उम्मीद है कि इस सच्चे और गर्म कर देने वाले अनुभव को पढ़ कर आप सबकी जवानी की आग भभक उठेगी.

मैंने गोपनीयता को बनाए रखने के लिए पात्रों के नाम बदले हुए हैं.

मेरा नाम राज है, मैं अहमदाबाद गुजरात का रहने वाला हूँ.

यह बात तब की है, जब मैं मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था.
मेरी आमदनी के लिए हमारी एक शॉप थी, जिसमें कोल्डड्रिंक और आइसक्रीम का बड़ा काम था.

मुझे बचपन से ही बिजनेस करने का मन था. अपनी पढ़ाई के साथ साथ में खुद का बिजनेस भी करता था.
मेरे पास अपनी कमाई के पैसे बहुत थे और मैं खर्च भी बहुत करता था.

उम्र का तकाजा था या पता नहीं क्या था कि मैं अलग अलग लड़कियों को पटाना और उनके साथ सोना मेरी आदत बन गई थी.
ये सब मानो जैसे मेरा शौक बन चुका था.

कॉलेज के दिनों की बात है. उस समय सब लौंडों को शायद ये भ्रम होता था कि लड़कियां अच्छी बाइक्स वाले लड़कों को ज्यादा पसंद करती हैं.
बाइक्स की बात करूं, तो लगता था कि रॉयल एनफील्ड जिसे बुलेट भी कहते हैं, उस जैसी महंगी बाइक से लड़कियां जल्दी पट जाती हैं.

मैं भी एक दिन बुलेट के बारे में ऑनलाइन देख रहा था. मैंने नज़दीक के एक शोरूम में अपना नाम और नंबर डाला.

एक घंटे बाद एक लड़की का कॉल आया.

लड़की- हैलो सर … मैं आरती बात कर रही हूँ … मैं बाइक के शोरूम से बोल रहीं हूँ … आपने R-15 के लिए अपना इंटरेस्ट शो किया था.
मैं- हां हां जी बताएं.

लड़की ने मुझे बाइक के बारे में सब जानकारी दी कि लोन कैसे हो सकता है … और लोन चुकाने की ईएमआई क्या होगी.

उसने मुझे सब बताया और शोरूम पर आने को कहा.

मैं- ओके आप मुझे एड्रेस भेज दीजिए.
आरती- ओके सर.

उसने मुझे एड्रेस भेज दिया. मैंने देखा तो वो किसी और ही शोरूम का था, जो मेरे घर से थोड़ी ही दूर था.

मैंने वापिस उसे कॉल किया और पूछा कि मैंने तो यहां अपना इंटरेस्ट शो नहीं किया था, तो आपके पास मेरा नंबर कहां से आया!

उसने कहा कि मैं पहले वहां जॉब करती थी. अभी मेरा चेंज हो गया है, तो आपका नंबर हमारे पास भी आ गया था.

मैंने उसके नम्बर पर व्हाट्सैप चैक किया तो ये उसका पर्सनल नंबर था. उसका नाम भी वही लिखा आ रहा था.

फिर मैंने फेसबुक पर उसको ढूँढ लिया.
फेसबुक पर उसके फोटो देख कर पता चला कि वो शादीशुदा है.

वो देखने में काफी सुंदर थी. उसकी हाइट नॉर्मल थी, चुचे उभरे हुए थे, कमर पतली थी और गांड कुछ ज्यादा ही उभरी हुई थी.

उसको देखकर लगता ही नहीं था कि यह एक भाभी है.
वो तो एक बीस साल की कली की तरह लग रही थी.
शादी के बाद भी उसकी जवानी वैसी की वैसी दिख रही थी.

मैंने और मेरे लंड ने मन बना लिया था कि इसको कैसे भी करके चोदना ही है.

उसको मैंने व्हाट्सैप पर मैसेज किया और उसके साथ फ्लर्टिंग करना चालू कर दी.

मैं यहां अपनी तारीफ नहीं करते हुए कहना चाहूँगा कि किसी भी लड़की के साथ फ्लर्टिंग करने में मेरी मास्टरी थी.

लड़की धीरे धीरे खुल सी रही थी, उसने बताया कि उसकी लव मैरेज हुई थी, मगर वो इस शादी से खुश नहीं है.
उसके हज़्बेंड का कहीं और भी चक्कर चल रहा है.

ये सब सुनकर मैं मन ही मन खुश हो गया कि इसके साथ काम बन सकता है.

उसे थोड़ा विश्वास में लेने के बाद मैंने एक दिन उसको प्रपोज़ कर दिया और उसने भी बिना कोई नाटक के हां कर दिया.

हमारी पहली मुलाकात फिक्स हुई.

एक दिन उसने कहा- मैं शाम को सात बजे जॉब से फ्री होती हूँ, अगर तुम्हें ऐतराज़ ना हो तो मुझे घर ड्रॉप कर दोगे!
मैंने भी कहा- हां क्यों नहीं जानेमन, आपके दीदार के लिए तो मेरी आंखें बेताब हैं, जिया बेकरार है.

वो हंस कर मुझे बाय बोलकर ऑफ़लाइन हो गई.

अब बस इंतज़ार शाम का था.

मैं शाम को तैयार होकर ठीक सात बजे उसके शोरूम से थोड़ा दूर बस स्टैंड के पास जाकर वेट करने लगा.

थोड़ी देर बाद उसका कॉल आया.
मैंने बताया कि मैं तुम्हारा इधर वेट कर रहा हूँ.

वो मुझे दूर से देखकर ही पहचान गई थी.
उसने मुझे फोन पर ही बोला- हां मैंने तुम्हें देख लिया है. ब्लू शर्ट में बड़े सेक्सी लग रहे हो.
मैंने कहा- तुम कहां हो जानेमन अब और भी ना तड़पाओ.

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उसी पल वो मेरे सामने आकर खड़ी हो गई.
उसने अपना मुँह दुपट्टे से बांधा हुआ था इसलिए वो मुझे नजर नहीं आई थी.

फिर उसने हाथ हिलाया तो मैं समझ गया कि अपना माल यही है.

इस वक्त मुझे सिर्फ़ उसकी खूबसूरत और प्यारी सी आंखें ही दिख रही थीं.
मैं उसकी आंखों में जैसे डूब ही गया था.

उसने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा- चलो भी अब … घर नहीं जाना है क्या!

मैंने उसे अपनी बाइक पर बिठाया और चल पड़ा.

मैं पूरे रास्ते उसी को मुड़ मुड़ कर देख रहा था.
वह मेरा मुँह अपने हाथों से आगे करती हुई कह रही थी कि बाइक चलाने पर ध्यान दो वरना एक्सिडेंट हो जाएगा.

मैंने भी फ्लर्टिंग करते हुए कहा- तुम्हें नहीं देखेंगे तो बेशक मर जाएंगे.
मेरी उसको इतने प्यार से देखने की लालसा को देखकर उसने कहा- एक काम करते हैं, कहीं रुक कर थोड़ी देर बैठते हैं.

नेकी और पूछ पूछ … जब लड़की ही ये पहल कर रही हो तो वो कोई चूतिया ही होगा जो न माने.

मेरे घर के नज़दीक और रास्ते में ही एक गार्डन आता था. जो मानो प्यार करने वाले कपल्स के लिए ही बनाया गया था.
उस गार्डन में इतने कपल्स आते थे कि उसका नाम ही फिज़िकल गार्डन हो गया था.

मैंने उससे सीधे पूछ लिया कि चलो फिज़िकल गार्डन में जाकर बैठते हैं.

यह सुनते ही, उसने भी पीछे से मुझे कसके पकड़ा और बोली- क्यों, क्या इरादा है … बहुत जल्दी में हो क्या!

उसने जिस तरह से मुझे पकड़ा था, मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी.
उसी समय मैंने झटके से ब्रेक लगा दिया. वो मेरी पीठ से एकदम से चिपक गई.

मैंने उसकी चुचियों की रगड़ को महसूस करते हुए कहा- नहीं नहीं जान … ऐसा कुछ नहीं है. यह तो रास्ते में आता है तो कहीं और घूमना ना पड़े. यदि कहीं दूर गए तो तुम्हें ही घर जाने में लेट हो जाएगा.
उसने हंस कर कहा- तो फिर ठीक है … उधर ही चलो. वैसे मुझे देरी की कोई चिंता नहीं है.

मैंने बाइक गार्डन के बाहर लगाई और हम दोनों अन्दर चले गए. उस दिन अन्दर काफ़ी अंधेरा था. वहां की लाइट्स शायद खराब थीं या पता नहीं क्या बात थी.

मैं उसे एक अच्छी जगह ले गया, जहां आसपास कोई नहीं था. हम दोनों वहां जाकर बैठ गए.

अब जाकर उसने अपना दुपट्टा निकाला और वो मुझसे एकदम से चिपक कर बैठ गई.

उसके बदन की खुशबू मुझे आज भी याद है. महक से ही लगा कि उसकी जवानी खुशबू सी ही बह रही हो.

उसके बाल एकदम सीधे, होंठ जैसे नॉटी अमेरिका की पोर्न ऐक्ट्रेस के हों.
उसकी लाल लिपस्टिक, गाल और चेहरा एकदम गोरा देख कर मेरे पैंट के अन्दर छिपा हुआ शैतान जाग चुका था.
ये उसने भी देख लिया था.

हम दोनों की नजरें मिलीं और मुझे उसकी आंखों में शरारत सी दिखी.

मुझसे रहा ही नहीं गया और मैंने उसके बालों को पकड़ कर अपने करीब खींच लिया.
अगले ही पल मैंने अपने होंठ उसके होंठों से लगा दिए.

हालांकि मुझे किस करने का अभी उतना एक्सपीरियन्स नहीं था.
पर वो शादीशुदा थी, तो जरा सी भी हिचकिचाहट के बिना वो मेरा पूरा साथ देने लगी थी.

उसने मेरे सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया था और अपनी ओर खींच रही थी.

हम दोनों के बीच किसी इंग्लिश मूवी की तरह फ्रेंच किस होने लगी थी.
मैं तो जैसे सब कुछ भुला कर उसके होंठों में खो सा गया था.

हमारी किस लगभग दस मिनट तक चली होगी.
उसकी लिपस्टिक से मेरे होंठ भी लाल हो चुके थे.

इसके बाद वो मेरी गोदी में आकर बैठ गई. मेरी आंखों के सामने उसके दोनों तने हुए चुचे थे जो मेरे पूरे शरीर में वासना का सागर तूफान मचा रहे थे.

हम दोनों वापिस एक दूसरे के होंठ को लॉक करके चूमने लगे.
कभी वो मेरे पूरे चेहरे को पूरी मदहोश होकर चूमने लगती थी, तो कभी मेरे गले पर काट रही थी.

उस समय उसका काटना भी मुझे भरपूर सुख दे रहा था.
मैंने भी उसके गालों पर, चेहरे पर चूमा, फिर गले से होते हुए उसके कंधे पर चूमने लगा.
उसके टॉप की किनारी तक का पूरा बदन मेरे होंठों की जद में था. मैं किसी भूखे शेर की तरह उस पर टूट पड़ा था.

वो मादक आहें और कराहें भर रही थी.
उसकी जवानी की सिसकती आवाज़ मुझे और कामुक कर रही थीं.

हम दोनों को यह तक भी अहसास नहीं हो रहा था कि आसपास में कौन है और हम दोनों कहां हैं. हम दोनों बस अपनी ही मस्ती में मदहोश थे.

मैंने उसको किस करते करते अपने हाथों को उसके टॉप के नीचे से डालकर ब्रा तक ले गया और उसके मम्मों को ब्रा के बाहर से ही दबाने लगा.

मम्मों पर मेरा हाथ जाते ही वो और कामुक हो गई और मेरा सर पकड़ कर अपने मम्मों पर दबाने लगी.

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मैं भी पूरे पागलपन के साथ उसके मम्मों को बाहर से खाए जा रहा था.
फिर मैंने उसके टॉप को ऊपर कर दिया और ब्रा को भी ऊपर करने की कोशिश की. पर उसके चुचे काफ़ी कड़क हो चुके थे और ब्रा में कस चुके थे.

मैंने ब्रा को खोल दिया और उसे ऊपर करके उसके मम्मों को देखने लगा.

उसके गोरे गोरे स्तन मेरी आंखों के सामने थे.
मम्मों पर काले रंग के निप्पल एकदम टाइट हो चुके थे.

उसके चुचे सहलाने में एकदम सॉफ्ट और देखने में पूरे तने हुए थे.
एकदम गोल चुचों को देखकर मेरा पैंट में लंड इतना टाइट हो चुका था कि मानो अभी पैंट फाड़ कर उसकी चूत में घुस जाएगा.

मैंने उसके चूचों को दोनों दोनों हाथों से पकड़ लिया और दबाने लगा.
फिर एक को मैंने अपने मुँह में भर लिया और दूसरे को मसलने लगा.

उसके निप्पल को अपने दांतों के बीच लेकर हल्के हल्के से काटने लगा और खींचने लगा.

उसे मेरा इस तरह करना सहा नहीं जा रहा था, उसकी मीठी आहें तो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी.
पर मदहोशी में कौन रोकता है. उल्टा वो तो मुझे दोनों हाथों से दबा रही थी.

मेरे मुँह में एक मम्मे का मजा था, तो मेरे दोनों हाथ उसकी कमर में से पैंट में घुस गए थे.
मैं उसकी गांड को दबा रहा था.

हम दोनों पूरी तरह से मदहोश हो चुके थे.
मैंने उसके सिर को मेरी गोदी में रख कर सुला दिया.

उसने अपनी पैंट पर दुपट्टा डाल दिया. मेरा मुँह उसके चूचों को भरके उसके दोनों निप्पलों को बारी बारी से काट रहा था.

उसी समय मैंने अपना एक हाथ उसकी चूत में लगा दिया.
उसकी चूत साफ नहीं थी. चुत पर झांटें उगी थीं.

शायद बहुत समय से उसने सेक्स नहीं किया था और उसे इस बात का अहसास नहीं था कि मैं आज ही उसकी चुत में हाथ लगा दूंगा.
इसीलिए उसने अपनी चुत की सफाई नहीं की थी.

जैसे मैंने उसकी चुत में उंगली डाली, वो एकदम गर्म थी और पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.
उसकी चूत की गर्मी से ही पता चल गया था कि वो कामुकता की हर सीमा पर कर चुकी है.

मैं भी उसकी चूत में उंगली को डाल कर अन्दर बाहर करने लगा. मैं कभी होंठ चूसने लगता, तो कभी उसके मम्मों को मुँह में भरके चूस लेता.

उसने भी मेरे लंड को बाहर निकाल लिया और हिलाने लगी.

हम दोनों जैसे सालों से एक दूसरे के साथ सेक्स करते आ रहे हों, वैसे लग रहा था.
किसी को कुछ भी बोलने की ज़रूरत नहीं थी.

उसकी ‘आहह … उम्म्म्म … आहह … उम्म्म्म …’ की आवाज़ मेरी कामुकता की आग में जैसे पेट्रोल लगा रही थी.

मैं और जोरों से उसको किस करते हुए उंगली को अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ ही देर में मैंने उसकी चुत में अपनी दो उंगलियों को एक साथ डाल दिया.
उसकी टाइट चुत में दो उंगलियां डाल दीं.

तो वो दर्द के मारे छटपटाने लगी और मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी.
पर मैंने उसको कसके पकड़ा हुआ था, उसे हिलने ही नहीं दिया.

थोड़ी ही देर में उसकी चूत में से रस निकल गया.

मेरी उंगलियां पूरी तरह गीली हो चुकी थी. मैंने वो रस उसके मम्मों पर लगा दिया और पूरा चाट गया.

अब वो मेरी गोद में उल्टा लेट गई और मेरे लंड को उसने अपने मुँह में ले लिया.

उसने जैसे ही मेरे लंड को मुँह में लिया, ऐसा लगा मानो मेरी पूरी जान उसके मुँह में चली गई हो. मेरा दिमाग़ सुन्न हो चुका था.

अब मेरे मुँह से मादक आवाजें निकलना चालू हो चुकी थीं.
वो मज़े से मेरे लंड को मुँह में अन्दर बाहर करती हुई चूस रही थी.

जब उसने मेरे गोटों को भी मुँह में भर लिया तो मैं रह ही नहीं पाया.
पर मैं कुछ भी नहीं कर सकता था.

मैंने अपने आपको पूरी तरह से उसके हवाले कर दिया था.

उसने और ज़ोर ज़ोर से मेरे लंड को अन्दर बाहर करना चालू कर दिया.

उसके मुँह की गर्माहट में मेरा लंड गोते लगाए जा रहा था.

दस मिनट तक उसने मेरे लंड को लगातार चूसा. इसके बाद मैं भी काबू न कर सका और अपना सारा माल छोड़ दिया.

मेरे लंड रस की हर बूँद को उसने अपने मुँह में ले लिया और पी गईं.

हम दोनों का ओरल सेक्स पोर्न खेल होने के बाद हम दोनों ने खुद को ठीक किया और शांति से बैठ गए.
हमारे बीच कुछ देर बातें हुईं, फिर हम दोनों गार्डन से निकल गए.

मैंने उसको घर छोड़ते हुए पूछा- जानेमन, अब चूत की सवारी कब कराओगी?
जवाब में वो बोलीं- बहुत जल्द ही मेरे राजा.

इसके साथ ही उसने एक नटखट सी मुस्कुराहट दी और चली गई.

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