भाभी की भाभी खुद चुदने चली आई

उन्हें मैंने चुप कराते हुए कहा- आप रोओ मत.
मैंने उनके हाथ पर हाथ रखा, चुप कराने लगा. हाथ का स्पर्श पाते ही वो मुझसे लिपट गईं. मेरा कंधा भाभी जी के आंसुओं से भीग गया. मैंने भाभी जी से चुदाई के लिए इशारे से पूछा, तो उन्होंने हां में सर हिला दिया.

फिर मैंने अपने आपको कंट्रोल किया. उनका सर ऊपर करके आंसू पौंछे, तब उन्होंने रोना बंद किया. भाभी जी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा … जिससे मैं उनके ऊपर गिरने जैसा हो गया. मेरा मुँह उनके मुँह के सामने आ गया. उन्होंने मुझे पकड़ कर होंठों पर होंठ रख दिए. मुझसे भी कंट्रोल नहीं हुआ. मैंने भी होंठों को बहुत चूसा. उन्होंने किस करते करते मेरे बालों में हाथ डाल दिया.

कुछ मिनट बाद जब हम दोनों अलग हुए, तो मैं अपनी भाभी से आंखें नहीं मिला पाया.

मेरी भाभी जब वहां से चली गईं. तब साधना भाभी मेरे पास आकर लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगीं. मैं भी भाभी के दूध दबाने लगा. वो कामुक आवाजें निकालने लगीं.

मैंने सोफे पर बैठ कर ही उन्होंने गोद में खींच लिया. वो मेरी गोद में दोनों पैर फैला कर बैठ गईं और लंड को पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगीं. मैं भाभी के होंठों को फिर से जीभ से चूसने लगा.
वो अब तक इतनी गर्म हो गई थीं कि किस करते वक्त ही आवाजें कर रही थीं. मैंने किस करते हुए ही भाभी जी की साड़ी का पल्लू और ब्लाउज अलग कर दिया.

अब भाभी के मम्मों की बारी थी. उनके निप्पल एकदम टाईट थे, मैंने एक निप्पल को दांत से काटा. मैंने जैसे ही काटा, भाभी जी जोर से चीख उठीं और बोलीं- आह धीमे करो …

लेकिन तब तक मेरी भाभी उनकी चीख सुनकर अपनी साधना भाभी को देखने चली आईं.

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मेरी नज़र मिलने पर शरारती हंसी देकर चली गईं. अब मैंने साधना भाभी को खड़ा कर दिया. भाभी ने मुझे ऊपर से नंगा कर दिया. मैंने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया. उनका पेटीकोट सरकते हुए जमीन पर गिर गया. वो मेरे सामने चड्डी में आ गई थीं. मैंने तुरंत वो भी निकाल डाली. मैंने साधना भाभी की चुत में उंगली डाली … उनकी चुत गीली थी इसलिए मजा आया. मेरी दोनों उंगलियां सीधे अन्दर घुस गईं.

उन्होंने मेरे मुँह को अपनी चूत से लगा लिया. मैंने भाभी की चूत को पहले कुछ जगहों पर चूमा, बाद में कमर पर काटा और भाभी की गांड पर तीन चांटे मार दिए. भाभी सिसक कर मस्त हो उठी थीं.

अब मैंने खड़े हो कर उनकी पीठ को अपनी तरफ किया और एक पैर सोफे पर रख लिया. लंड चुत की दरार पर घिसने लगा.
वो कामुक स्वर में कहने लगीं- अब मत तड़पाओ … मैं बहुत तड़प चुकी.
मैं उनसे बोला- अपने मुँह पर हाथ रख लो भाभी.
भाभी ने अपनी हथेली को अपने मुँह पर रख लिया और मुझे इशारा कर दिया. भाभी इतनी अधिक चुदासी हो उठी थीं कि लंड को खुद अपनी चूत के अन्दर दबाने को मचल उठीं. इस वक्त साधना भाभी नीचे को हुईं और एक धक्का देते हुए मेरे खड़े लंड को पूरा अन्दर ले लिया.

मेरे मोटे लंड का दर्द भाभी जी सहन ही नहीं कर पाईं. भाभी अपनी दर्द भरी आवाज़ को दबाते हुए लंड का दर्द सहने लगीं. साधना भाभी की आंखों में से पानी निकल आया था.

मैंने भाभी का चेहरा अपनी तरफ किया और उनके आंसू को पी लिया. कुछ देर भाभी को चूमा … और उनके मम्मे भी सहलाए.
भाभी का दर्द कम होने पर वे खुद आगे-पीछे होने लगीं. भाभी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ की जोर से आवाज करने लगीं. भाभी की आवाज कम करने के लिए मैं उनको लगातार किस करता रहा. इस वक्त मेरा ध्यान भाभी की चुदाई से ज्यादा उनके मुँह से निकलने वाली चीखों पर था.

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मैंने एक हाथ से भाभी के मम्मे भी दबाए. थोड़ी देर बाद मैं सोफे पर बैठ गया और उन्हें अपने ऊपर ले लिया. ज्यादा गर्म होने की वजह से जल्दी ही भाभी जी अपना पानी छोड़ दिया.

मेरा अभी हुआ नहीं था, इसलिए मैं उनको सैट करके नीचे से धक्का मारने लगा. चुदाई से पच पच की आवाज आने लगी. वो फिर गर्म हो गई थीं और ऊपर नीचे हो रही थीं.
मुझे बहुत मजा आ रहा था.

अब मैंने उन्हें नीचे लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ गया. लंड की ख़ुशी कितनी अधिक है, ये भाभी की आंखें और चेहरा बता रहा था. मैंने उन्हें किस की, उन्होंने भी जीभ से जीभ मिला कर मेरा साथ दिया. मैं भाभी के मम्मे भी हाथ से दबा रहा था.

कोई दो मिनट बाद भाभी की चुदाई फिर से चालू हो गई. मैं धमाकेदार जोर के धक्के मार रहा था. उनके पैर मेरे कंधे पर थे. वो बड़बड़ाने लगीं- आ … आ … मजा आ रहा है. … जोर से …
मैं उनके बोबों पर चमाट भी मार रहा था. मैंने भाभी के दूध चांटा मार मार के लाल कर दिए थे.

कुछ ही देर में वो फिर से अकड़ने लगीं. इस बार मेरा भी होने को था. मैं इतना तेजी से भाभी की चुदाई कर रहा था कि उनसे पूछने से पहले ही मेरा माल छूट गया.
वो भी मस्त आवाज में बोलीं- आह करते रहो … मैं भी आने वाली हूँ.

मैंने अभी पांच धक्के ही मारे होंगे कि भाभी ने भी रस छोड़ दिया.
मैं उनके ऊपर ही लेट गया. हम दोनों की सांसें तेज़ चल रही थीं.

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