बड़ी भाभी की चूत की चुदास-1

मेरे प्यारे दोस्तो
आप लोगों ने मेरी पिछली कहानी
दोस्त की बहन को चोद दिया
तो पढ़ी ही होगी।

उस अचानक हुई घटना से हम दोनों में प्यार हो गया। अभी हम दोनों ही प्रोफेशनल कोर्स कर रहे हैं, उसके बाद अपने घर वालों से बात करके हम शादी कर लेंगे। लेकिन अभी हमें जब भी मौका मिलता है तो हम पोर्न फिल्म देखते हैं और सेक्स भी कर ही लेते हैं। हम कोन्डम लगा कर चूत चोदन नहीं करते हैं क्योंकि एक बार लगाया था तो उसकी चूत के आस पास दाने और एलर्जी सी हो गई थी।

मैं अपने लन्ड की और वो अपनी चूत की, दोनों ही अपनी झाँटें साफ ही रखते हैं. मुझे उसकी चूत चाटना बहुत ही पसन्द है वो भी पूरे मजे ले कर चूत चटवाती है. लेकिन वो मेरा लन्ड नहीं चूसती है. इस पर वो कहती है कि लन्ड भी चूसूंगी और अपनी गांड में लन्ड भी लूँगी. लेकिन अपनी सुहागरात पर … क्योंकि उस दिन के लिए भी हमारे लिए कुछ नया होना चाहिए।

अभी तक हम सब पोजीशन में सेक्स कर चुके हैं। उसे बैड के कॉरनर में लेटाकर टाँगों को अपने कन्धे पर रख कर और मैं खड़े होकर उसे जकड़ कर चूत मारना ये हम दोनों की फेवरेट पोजीशन है. उसका कहना है कि इस पोजीशन में लन्ड बिल्कुल अन्दर तक जाता है।

आज की कहानी की ओर … यह कहानी मेरे और मेरी तहेरी भाभी के बीच की है, यानि कि मेरे सगे बड़े ताऊ जी की बहू।

चोदना तो मैं भाभी को बहुत पहले ही चाहता था लेकिन परिवार की भाभी हैं इसलिए कुछ भी करने से डर लगता था. क्योंकि मुझे ऐसा लगता था कि उनके पति उन्हें नहीं चोदते या सही से नहीं चोदते. जो कि बाद में पता चला कि मैं सही था कि उनके पति ने उन्हें 10 साल से चोदा ही नहीं है।
आज वो सपना भी पूरा हो गया।

अब आपको इस कहानी की नायिका यानि कि अपनी भाभी के बारे में बताता हूँ। भाभी का नाम पायल (परिवर्तित नाम), उम्र 35 साल, हाईट 4’7″ फिगर 36-34-36, रंग साँवला है और भाभी के दो बच्चे भी है, लड़की 13 साल की और लड़का 10 साल का।

वो कहते हैं ना ‘मुहब्बत की ऐसी लगी बिमारी कि दो बच्चे की मां भी लगे कुँवारी!’
भाभी मेरे से 10 साल बड़ी हैं, मतलब हमारे खानदान की सबसे बड़ी बहू (भाभी) की चुदाई उनके सबसे छोटे देवर (मैंने) ने की।

हमारे घर से उनके घर की दूरी 1 किमी है।
मैं अपना नाम नहीं बताना चाहूंगा। मेरा लन्ड 5 इन्च का है, उम्र 25 साल है, और हम बरेली में रहते हैं।
यह घटना छः महीने पहले यानि जून 2019 की है, जब मेरे बीच वाले ताऊ जी की बेटी की शादी के लिए हम सबको शहर से बाहर जाना था।

लड़के वाले तो लोकल के ही थे लेकिन शादी बाहर जाकर करने का प्लान था उनका। हमने शादी में जाने के लिए मिनी बस कर रखी थी जिसमें मेरी और दोनों ताऊ जी की ही फैमिली ही जानी थी. बाकी रिश्तेदार सीधे वही पहुँचने थे।

आखिर शादी का दिन भी आ गया. सुबह ही हमें जाने के लिए निकलना था. ताऊ जी के घर पर ही बस लग गई थी, सब आ गए थे।

उस दिन भाभी बहुत ही अच्छी लग रही थी और उनके चेहरे पर कुछ अलग ही मुस्कान थी।

भाभी मेरे पास आकर मुझसे बाते करने लगी और मेरी पढ़ाई के बारे में पूछने लगी. हम बस में बैठने जा ही रहे थे कि उनका पैर मुड़ गया और उनको सम्भालने में मेरा हाथ उनके बूब्स पर चला गया. मेरा लन्ड भी उभार मारने लगा, उनका इस पर कोई रिएकशन नहीं था।

फिर हम सही हुए और वो मेरे लन्ड से टच होते हुए वो बस में जाकर बैठ गई। हम सब बस में बैठ कर चल दिए।

बस में बहुत बार मेरा हाथ उनके बूब्स पर और उनका हाथ मेरे लन्ड पर लग जाता था क्योंकि पानी और नाश्ता मैं ही सबको पकड़ा रहा था।

वहाँ पहुँच कर दिन के प्रोग्राम किए और पास में ही होटल था जो पूरा हमारे लिए ही बुक था. रूम में जाकर आराम किया, शादी के लिए तैयार होने शुरू हो गए.

मैं जल्दी तैयार हो गया था इसीलिए शादी वाली जगह पर चला गया।

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थोड़ी ही देर में और सब भी आ गए.

जैसे ही मेरी नजर पायल भाभी पर पड़ी, मैं तो उन्हें देखता ही रह गया. क्या कयामत लग रही थी! उन्हें देखते ही मेरा लन्ड भी खड़ा हो गया.
वो रेड कलर के लहंगे में थी. मन कर रहा था कि इन्हें होटल में ले जा कर चोद दूँ। उनकी नजरों से ऐसा लग रहा था कि वो किसी को ढूँढ रहीं हों।

इतने में भाभी की नजर मुझसे मिली. वे मेरे पास आयीं और बोलीं- इतनी जल्दी क्यों आ गए आप? मैं आप को वहाँ ढूँढ रही थी।
मैं- जल्दी तैयार हो गया इसलिए! क्यों कोई काम था क्या?
भाभी- नहीं बस ऐसे ही।
मैं- वैसे अच्छी लग रही हो आप।
भाभी- थैंक्यू भईया।
इतना कह कर वो मेरे लन्ड से टच होती हुई निकल गईं।

मुझे आज उनके इरादे कुछ अलग ही लग रहे थे जैसे कि वो भी मुझसे चुदना चाहती हों।

फिर स्नैक्स खाकर और जयमाल की तैयारी थी. जयमाल का समय हो गया सब वहाँ पहुँच गए। पायल भाभी मेरे आगे ही खड़ी थी और वो अपनी गांड से मेरा लन्ड बार बार टच कर रही थी जिससे मेरा लन्ड खड़ा होने लगा. उन्हें भी इस बात का पता लग गया. वहाँ लोग भी ज्यादा ही खड़े थे जिससे ये सब किसी को भी पता नहीं चला।

इतने में भाभी ने मेरी तरफ देखा और मुस्करा कर बाथरूम की तरफ चल दीं।
बाथरूम बिल्कुल पीछे के हिस्से में था, मैं भी उनके पीछे पीछे चला गया.

उस समय वहाँ पर कोई भी नहीं था। भाभी बाथरूम में घुसी और दरवाजा बन्द करने ही वाली थी कि इतने मैं दरवाजा आधा रोक कर और हिम्मत करके अन्दर घुस गया।
भाभी बोलीं- अरे देवर जी, ये लेडीज टॉयलेट है।
मैं- पता है।
भाभी- आज आप के इरादे भी कुछ ठीक नहीं लग रहे हैं?
मैं- इरादे तो आप के भी ठीक नहीं लग रहे हैं।

इतना कहते ही मैंने उनके होंठ पर अपने होंठ रख दिए इस पर उनकी कोई प्रतिक्रिया न देखते हुए मैंने उनके होंठ चूसने शुरू कर दिए. वो भी मेरा साथ देने लग गयीं मैं अपना हाथ उनके बूब्स पर ले गया और दबाने लगा लगभग 5 मिनट तक हमारा चुम्बन चला।

भाभी बोलीं- अब जाकर आपने कुछ करने की हिम्मत कर ही दी।
मैं- आपने साथ दिया तो हिम्मत दिखानी ही पड़ी।
भाभी- कम से कम साँस तो लेने देते।
मैं- ऐसे कैसे आपको कुछ होने देता।

भाभी अपना हाथ मेरे लन्ड पर ले जा कर बोलीं- सुबह से साहब (मतलब मेरा लन्ड) बहुत खड़े हो रहे हैं।
मैं- आज आप लग ही बहुत अच्छी रही हो।
भाभी- बस आज?
मैं- मतलब आज कुछ ज्यादा ही।

भाभी- तो आज आप सुबह से ही अपनी भाभी पर नजर डाले हुए हैं?
मैं- आप भी तो सुबह से इस साहब (मेरा लन्ड) पर ध्यान दे रही हो।
भाभी- ये बस खड़ा ही होता है या कुछ करता भी है।
मैं- अभी लो.

अपना लंड बाहर निकालने के लिए मैं अपनी जीन्स का बटन खोल ही रहा था कि भाभी ने मेरा हाथ रोक कर कहा- यहीं करोगे क्या?
मैं- क्या भाभी … आपने ही तो कहा कि ये बस खड़ा ही होता है या कुछ करता भी है. अब कर रहा हूँ तो कुछ आप करने नहीं दें रही हो?
भाभी- अरे देवर जी, यहाँ हमें किसी ने देख लिया और हम पकड़े गए तो?
मैं- कुछ नहीं होगा भाभी जान।

तभी भाभी के फोन पर भईया की कॉल आ गया.
भाभी ने मुझे शान्त रहने के लिए कहा और बात करने लगीं.

उनकी बात खत्म होते ही भाभी कुछ ज्यादा ही खुश लगीं।
मैं- क्या हुआ?
भाभी- लो जी, आपके भईया ने ही हमारा प्रोग्राम सैट कर दिया, दोनों बच्चों को नींद आ रही है मुझे उन्हें सुलाने होटल जाना है और वहीं रूकना पड़ेगा, आपके भईया यहीं रूकेंगे।

मैं- वाह! अब तो कोई दिक्कत ही नहीं है फिर, आपके साथ ही मैं भी चल चलूँगा सोने का बहाना करके। लेकिन हमें जल्दी चलना होगा क्योंकि 11:30 बज रहे हैं और उस होटल वाले का रुल है कि वो रात 12:00 बजे के बाद से सुबह के 5:00 बजे तक किसी को भी न आने देगा और न ही बाहर जाने देगा।

भाभी ने किस किया मुझे और कहा- मैं बाहर जाकर देखती हूँ कि कोई है या नहीं तभी आप बाहर आ जाना.
फिर भाभी ने मेरे लन्ड पर हाथ लगा कर कहा- सी यू ऑन द बैड डियर।

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बाहर सब कुछ ठीक था वो मुझे बता कर चली गई.

मैं भी बाहर निकलकर जेन्टस टॉयलेट में थोड़ा रुक लॉन में आ गया।
वहाँ मुझे भईया मिल गए भाभी और बच्चों के साथ!
मैं समझ गया था कि वो उन्हें छोड़ने ही जा रहे होंगे।

वो मुझसे बोले- कहाँ था तू?
मैंने उन्हें इशारो में समझा दिया कि मैं बीयर पी रहा था।
भईया- अच्छा बेटे … चल भाभी को होटल तक छोड़ आ बच्चों को नींद आ रही है।
मैं- नींद तो मुझे भी आ रही है मैं कब से पापा को ढूँढ रहा हूँ रूम की चाबी के लिए, आप को पता है कि पापा कहाँ हैं?
भईया- इन सबके साथ ही सो जाना अपना रूम क्या खोलने की जरूरत है, हमारे रूम में तो दो डबल बैड हैं।

मैं- अरे नहीं … मुझे चेंज भी तो करना है और डबल बैड तो हमारे रूम में भी हैं।
भईया- तेरे पापा अन्दर हैं जा जल्दी जा कर चाबी ले आ क्योंकि 12 बजने वाले हैं।

फिर मैं पापा से चाभी लेकर और भाभी के साथ होटल की तरफ चल दिया. रास्ते में भाभी मेरे साथ और बच्चे आगे चल रहे थे तभी भाभी ने मुझसे धीरे से कहा- मेरे रूम की खिड़की से होटल का मेन गेट दिखता है. जब वो बन्द हो जाएगा तो मैं आपके रूम पर आ जाऊँगी।

तभी होटल आ गया. रूम्स फस्ट फ्लोर पर थे। दोनों अपने अपने रूम्स में चले गए।

ठीक 12:10 पर मेरे रूम के गेट पर खट खट हुई मतलब मेन गेट बन्द हो गया।
और यहाँ से शुरू होती है भाभी की चुदाई की रासलीला।

मैंने तुरन्त दरवाजा खोल कर भाभी को अन्दर लेकर दरवाजा बन्द कर दिया और दरवाजे से सटा कर उन्हें दबाकर उनके होंठ चूसने लगा. वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं। हम एक दूसरे की जीभ भी चूस रहे थे।

मेरा एक हाथ उनकी कमर पर, दूसरा उनके बूब्स पर और अपने लन्ड से उनकी चूत पर दबाव बना रहा था। वो अपने दोनों हाथों से मुझे जकड़े हुए थी और लन्ड का दबाव जब उनकी चूत पर पड़ रहा था तो उनके मुंह से उत्तेजित होकर वो सिसकारी निकल रही थी और उनकी सिसकारियों से मैं उत्तेजित हो रहा था।

भाभी के साथ मेरा चुम्बन 10 तक मिनट चला और इस बार भाभी ने मुझे रोका भी नहीं. वो भी चुम्बन का पूरा मजा ले रही थीं।

फिर उन्होंने मुझे रुकने के लिए कहा और उन्होंने अपना मंगलसूत्र उतार के रख दिया। इस पर न मैंने उनसे कुछ कहा और न ही उन्होंने।

मंगलसूत्र उतारते ही भाभी ने मुझे दीवार बार सटा दिया और मुझे चूमने लगी। इस बार मेरे दोनों हाथ उनकी गांड पर थे जो उनकी गांड को दबा रहे थे। मैंने लन्ड से चूत को दबाना जारी रखा।

धीरे धीरे मैं अपना एक हाथ उनके ब्लाउज पर ले गया और उनकी ब्लाउज की डोर खोल दी. उसमें चैन भी थी वो भी खोल दी। मैंने भाभी का ब्लाउज उतार दिया। दुपट्टा और ज्वैलरी वो अपने ही रूम में छोड़ कर आयीं थी।

फिर मैं अपना हाथ लहंगे की डोरी की ओर ले गया और उसे भी खोल दी. उसकी चैन को मैं ढूँढता … इतने में उनका लहँगा अपने आप ही नीचे सरक गया।
मैं सोचने लगा कि ये लहँगा क्या सिर्फ एक डोर पर ही टिका था?
अगर ऐसे में किसी ने गलती से या जानबूझ कर ये डोर खोल दी तो इनके जिस्म की नुमाइश लग सकती थी।

मुझसे रूका नहीं गया और मैंने भाभी से पूछ भी लिया तो भाभी बोलीं- नहीं ऐसा नहीं है, मैंने फ्रेश होने के लिए उतारा था तो उसके हल्की सी डोर पर टिका लिया क्योंकि थोड़ी देर में तो उतरना ही है।
मैं हँस दिया उनकी बात पर!

तभी मेरा ध्यान उनकी बिकिनी पर गया जोकि उन्होंने रेड कलर की ब्रा और पैन्टी पहन रखी थी जिसमें वो बहुत ही ज्यादा अच्छी लग रही थीं।
मैंने कहा- भाभी आप बिकिनी ? में बहुत ही अच्छी लग रही हो।

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