शादीशुदा औरतों की चूत का दीवाना

थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने उसको नीचे लेटा लिया, उसकी टांगों को अपनी कंधों पर रखकर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा तो उसके मेरा लंड पकड़ के अपने चूतड़ों के होल पर यानि गांड पर रखा.
मैंने हैरान हो गया कि ये अपनी गांड मरवाना चाह रही है? मैंने उसकी आँखों में प्रश्नवाचक दृष्टि से झाँका तो उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई और उसने ‘हाँ’ में सर हिलाया.

और मैंने हल्का सा धक्का लगाया तो मेरे लंड का सुपारा उसके अन्दर चला गया.

वो चिल्ला उठी.. तो मैं रुक गया और उसके मम्मों को दबाने सहलाने लगा. उसका थोड़ा दर्द कम हुआ तो फिर मैंने उसकी जाँघों को पकड़ कर धक्का मारा और पूरा लंड अन्दर पेल दिया. वो फिर से एकदम से चिल्ला उठी. मैंने उसके होंठों पर किस करना शुरू कर दिया.

फिर थोड़ी देर में उसके सामान्य होने पर मैं उसकी गांड में अपना लंड अन्दर बाहर करने लगा. अब उसको भी मजा आने लगा था. उसकी गांड में लंड पेलने के साथ ही मैं उसकी चूत में भी उंगली कर रहा था, जिससे उसको डबल मजा आ रहा था.

वो कामुकता से भर गई और मादक सिसकारियां लेते हुए कहने लगी- आह.. और तेज रवि.. थोड़ा और तेज़ करो.
मैं और तेज़ करने लगा.

थोड़ी देर बाद उसकी चूत से पानी निकलने लगा और वो अपनी गांड को भी सिकोड़ने लगी. वो शिथिल होते हुए बोली- आह.. रवि मैं गयी.. मैं गयी.. आह आह.
उसके झड़ जाने पर भी मैं नहीं रुका.. और लगातार लंड पेलता रहा. फिर 5 मिनट बाद मेरा भी निकलने वाला था.
मैं बोला- निशा मैं आने वाला हूँ.. कहां निकालूँ?
वो बोली- अन्दर ही आने दो.

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मैं थोड़ी देर तक कुछ और धक्के मारता रहा फिर इसके बाद मैंने अपने लंड का पूरा वीर्य उसकी गांड में ही छोड़ दिया.

यह पहली बार था, जब मैंने किसी की गांड में अपना पानी छोड़ा था. फिर मैं उसके ऊपर ही निढाल हो कर लेट गया. वो भी गहरी साँसें ले रही थी.

थोड़ी देर तक यूं ही लेटे रहने के बाद हम दोनों ने अपने आपको साफ़ किया. फिर वापस आकर दुबारा से बेड पर लेट गए और बातें करने लगे.

थोड़ी देर बाद की चूमा-चाटी के बाद मैं फिर से तैयार हो गया. अब मैं उसकी चूत की जम कर चुदाई करने के मूड में था. वो भी चुत चुदवाने के लिए पोजीशन बना कर लेट गई. मैंने एक ही शॉट में लंड उसकी चुत में पेल दिया. थोड़ी देर की चिल्लपों के बाद धकापेल चुदाई शुरू हो गई. मैंने उसके मम्मों के निप्पलों को अपने होंठों में भर कर मींजना शुरू कर दिया.

मैं इस वक्त उसके ऊपर इस तरह से लदा हुआ था कि नीचे से उसकी चूत में मेरा लंड हाहाकार मचा रहा था और ऊपर उसके थन मेरे होंठों का शिकार बने हुए थे.

बीस मिनट की धकापेल चुदाई के बाद वो झड़ गई और मुझे रुकने का कहने लगी.

मैं लंड को उसकी चूत में फंसाए यूं ही उसके निप्पलों को टूंगता रहा.

कुछ देर बाद उसकी गांड उठने लगी तो मैं समझ गया कि ये फिर से गरमा गई है. बस मैंने फिर से ठोकरों की बरसात कर दी. वो भी गांड उठा उठा कर लंड की चोटों का सामना कर रही थी.

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फिर अचानक हम दोनों का चरम आ गया और हम दोनों ही अपने जिस्मों को ऐंठते हुए एक दूसरे में समाने की कोशिश करने लगे.

इस बार तो मुझे इतना मजा आ रहा था कि लंड रस किधर निकालूँ, ये पूछने का ध्यान ही नहीं रहा भी. फिर मेरे लंड का माल उसकी चुत ने ही पी लिया.

उस दिन मैंने दो बार उसके साथ चुदाई की. फिर उसने मुझे 1000 रुपए दिए और बोला कि अब जब भी मैं बुलाऊंगी तुम आ जाना.
उस दिन से अब तक मैंने कई बार उसकी चुदाई की.

एक बार जब मैंने उसको बोला कि कोई और कांटेक्ट भी दो.
वो बोली- हां जरूर दूंगी, तू मेरी मस्त सेवा करता है. मैं तुझे अपने सहेलियों से जल्दी ही मिलवा दूंगी. पर मुझे न भूल जाना.
मैंने उसको अपने गले से लगा कर किस किया और उसको भरोसा दिलाया कि तुम मेरी पक्की ग्राहक हो बल्कि मेरे लिए ग्राहक से भी बढ़ कर हो. मैं तुम्हें कभी नहीं भूल सकता.

इसके बाद उसके और उसकी सहेलियों के साथ मेरा सेक्स चलने लगा और मुझे अब भी मजा मिल रहा है.

आपको मेरी ये चुदाई की कहानी कैसी लगी.. मुझे ईमेल करके जरूर बताना.

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