अर्चना भाभी की चुदास और चूत चुदाई -1

‘आअहहाहह…’ उनको यूँ देख कर ही मुँह से ‘आहह..’ निकल गया।
जाँघों तक की ही नाईटी थी.. पैर खुले हुए थे.. बिल्कुल गोरे और चिकने पैर। स्लीवलैस नाईटी थी.. जिसे बेबीडाल टाइप फ्रॉक कह सकते हैं.. इसका गला भी काफ़ी खुला हुआ था..
अन्दर का नजारा भी साफ़ दिख रहा था.. उसने अन्दर ब्रा नहीं पहनी हुई थी.. तो उसकी आधी चूचियाँ बाहर दिख रही थीं।

मैं तो बस देखता ही रह गया। मुझे ऐसे देखते हुए कटीले अंदाज में बोली- ऐ.. मिस्टर क्या देख रहे हो.. मुझे कभी देखा नहीं क्या?
मैंने कहा- हाँ.. मैडम आपका ये सेक्सी बदन नहीं देखा था..
तो वो हल्की सी शर्मा गई.. बोली- धत्त..

अब हम दोनों बैठ गए.. बातें होने लगीं, अब बात थोड़ी खुल कर हो रही थी, भाभी ने पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?
मैंने कहा- अभी तो नहीं है.. पर जब मैं पुणे में पढ़ाई कर रहा था.. तो वहाँ कई थीं।
बोली- कैसी थीं?

मैं बोला- आपके जैसी तो एक भी नहीं थी.. पर एक ठीक थी.. उसका फिगर भी आपके जैसा तो नहीं था।
भाभी अब पैर पर पैर चढ़ा कर बैठ गई थीं.. जिससे उनके बगल से जाँघें साफ़ दिख रही थीं…
क्या चिकनी जांघ थी यार.. थोड़ी सी पैन्टी भी दिख रही थी।

भाभी- कुछ किया भी था.. कि केवल दोस्ती ही थी?
मैं- सब हुआ था भाभी.. कुछ भी बाकी नहीं रहा था।
मैंने बातों-बातों में उन्हें बताया कि मुझे अपने से बड़ी भाभी या आंटी अच्छी लगती हैं।
उसने पूछा- ऐसा क्यों?
मैंने कहा- उन में एक अलग आकर्षण होता है.. जैसे आप में है।

मैंने बताया कि पुणे में भी एक आंटी से मेरा फिजिकल रिलेशन बन चुका था.. दो साल उसे अच्छी तरह जम कर खिलाया भी था.. जबकि उनकी उमर भी 45 की थी।
वो बोली- तब तो तुम मास्टर हो..

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मैंने कहा- ऐसा भी नहीं है.. बस सेक्स के टाइम मैं खुद से ज़्यादा साथी का ख्याल रखता हूँ।
चूंकि अब बात सेक्स पर शुरू हो गई थी.. तो वो भी खुल कर बात कर रही थी।
बोली- जरा खुल कर बताओ कि कैसे ख्याल रखते हो?
मैंने कहा- भाभी अब मुझे लगता है आपको सब खुल कर नहीं खोल कर ही बताना पड़ेगा।

बोली- हाँ.. तो जब इतना हम लोग खुल कर बात कर रहे हैं तो और खुल कर बताओ ना.. मुझे अच्छा लग रहा है।
मैंने कहा- मैं चुदाई में बहुत टाइम लेता हूँ।
उसने कहा- कितना?
तो मैंने कहा- आराम से करने में 3 घंटा..
बोली- बाप रे.. इतनी देर तक करते हो?

मैंने कहा- इस टाइम में फोरप्ले बहुत करता हूँ। औरतों को 2 या 3 बार तो पहले ही झाड़ देता हूँ।
वो हैरत से बोली- अच्छा..!
अब भाभी आगे झुक कर बैठी थी जिससे उनके चूचे बाहर लटक रहे थे। यार क्या मस्त बोबे दिख रहे थे.. मैं तो ललचाई आँखों से उनको ही देख रहा था।

मैं एक 2 सीटर कुर्सी पर बैठा था, मैंने भाभी से कहा- इसी पर आप भी आ जाओ न.. नहीं तो बात कोई बाहर भी सुनाई पड़ सकती है।
वो आ गई.. फिर बोली- अब बताओ..

मैंने कहा- पहले अच्छे से साथ में बैठ के बातें करते हैं, फिर सीने से देर तक कसके चिपका कर चुम्मियाँ करते हैं।

मैंने अपने इतना पास सेक्सी भाभी को देखा तो मेरा लंड बहुत टाइट हो चला था।

मैंने भी इस वक्त बिना चड्डी के एक हाफ-पैंट पहना हुआ था.. तो मेरा लंड ने हाफ पैन्ट में तंबू सा बनाया हुआ था और मैं लगातार उसे धीरे-धीरे सहला भी रहा था।
भाभी लौड़े की तरफ देख कर बोली- और बताओ.. कि करते कैसे हो?
मैंने कहा- सीने से चिपकाने के बाद मस्त वाली चूमा-चाटी होती है।

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अब भाभी भी मेरी बातों से गरम होने लगी थीं। मेरा कंधा उनके कंधे से टकरा रहा था।
अचानक मैंने अपना हाथ भाभी की कमर में डाल दिया, भाभी थोड़ा हिली.. पर बोली कुछ नहीं।

मैं बताता भी जा रहा था और बगल में भाभी के कमर को सहला रहा था।
भाभी थोड़ा काँपते आवाज़ में बोली- और क्या करते हो?
मैंने जरा और जोर से कमर को दबाते हुए कहा- उसके बाद.. पूरी बॉडी की मसाज..
यह कह कर मैंने भाभी की कमर के बगल में थोड़ा दबा भी दिया.. जिससे भाभी के मुँह से ‘आअहह..’ निकला।

अब मैंने भाभी के गले पर अपना होंठ रख दिया जिससे भाभी और गर्म होने लगी।
मैंने भाभी का हाथ अपनी जाँघ पर अपने लंड के करीब रख दिया।
अब मैं भाभी की जाँघ को सहला रहा था और उनके गले पर चुम्मी कर रहा था। फिर धीरे-धीरे मैं भाभी के होंठ की ओर बढ़ रहा था।

आहह.. क्या फीलिंग थी दोस्तो.. अब भाभी के होंठ पर मैंने अपने होंठ रख दिए।
अचानक भाभी ने अपने होंठ खोल दिए और मुझसे कसके किस करने लगी, उनका हाथ नीचे मेरे लंड पर आ गया था.. वो लौड़े को सहला रही थी।

मैंने भाभी के कान में कहा- भाभी, अन्दर चल कर बाकी कहानी बिस्तर पर बताता हूँ।

दोस्तों भाभी की चुदास बढ़ चुकी थी बस अब उनको बिस्तर तक ले जाकर चोदना बाकी था उनको बिस्तर में किस तरह से गरम किया और पूरी मस्ती से चोदा.. ये सब आपको अगले भाग में लिखूँगा अभी आप बस मुझे अपने विचारों से अवगत कराने के लिए मुझे ईमेल लिखें.. जिससे मेरा हौसला बढ़े..

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